दिल्ली गैंगरेप: चारों अभियुक्त दोषी करार, सज़ा कल

दिल्ली गैंगरेप, अदालत, फ़ैसला, अभियुक्त, 16 दिसंबर

पिछले साल दिल्ली में चलती बस में सामूहिक बलात्कार के चार अभियुक्तों को अदालत ने दोषी पाया है. इन चारों पर सामूहिक बलात्कार, हत्या, हत्या के प्रयास, अप्राकृतिक कृत्य, सुबूत मिटाने और डकैती के आरोप थे.

दोषी करार दिए जाने के बाद अब अदालत बुधवार को इन अभियुक्तों को सज़ा सुनाएगी.

इस मामले में एक नाबालिग़ दोषी को तीन साल की सज़ा पहले ही सुनाई जा चुकी है. एक अभियुक्त की सुनवाई के दौरान जेल में ही मौत हो चुकी है.

बचाव पक्ष के वकील वी के आनंद के मुताबिक़ जज ने कहा है कि सभी चारों अभियुक्तों को सभी धाराओं में दोषी करार दिया गया है और सज़ा पर बुधवार 11 बजे बहस होगी.

उधर, अभियुक्तों के वकील ने इस फ़ैसले पर कहा है कि वह इसे हाईकोर्ट में चुनौती देंगे. उनका कहना है, ''शिकायतकर्ता ने कहा था कि उसके साथ दो लोगों ने बलात्कार किया था, मगर सत्ता के दबाव में उनके मुवक्किलों को फंसाया गया.''

उनका कहना है कि चारों में एक अभियुक्त बस में ही नहीं था, जबकि दूसरा दिल्ली से बाहर था और इसके सुबूत अदालत में जमा कराए गए हैं.

अदालत के भीतर

जिस वक़्त अदालत अपना फ़ैसला सुना रही थी, पीड़ित का परिवार न्यायाधीश और अभियुक्तों से कुछ ही दूरी के फ़ासले पर मौजूद था. अभियुक्तों के इर्द-गिर्द पुलिस का घेरा था. जैसे ही अदालत ने अभियुक्तों को दोषी करार दिया, पुलिस अभियुक्तों को बाहर ले गई. अभियुक्तों को दोषी करार दिए जाने के बाद पीड़ित की मां की आंखों में आंसू थे.

न्यायाधीश योगेश खन्ना ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा, ''मैं सभी अभियुक्तों को दोषी करार देता हूं. उन्हें सामूहिक बलात्कार, सुबूतों को मिटाने और अप्राकृतिक कृत्य का दोषी पाया गया है. इन्होंने ने एक असहाय पीड़ित की हत्या का काम किया है.''

अदालत परिसर के बाहर लोगों ने प्रदर्शन कर चारों अभियुक्तों को मृत्युदंड देने की मांग की है.

16 दिसंबर 2012

यह मामला पिछले साल 16 दिसंबर का है, जब राजधानी दिल्ली में 23 साल की फ़िज़ियोथिरेपी छात्रा और उसके साथी पर चलती बस में हमला किया गया था. युवती से कुछ लोगों ने सामूहिक बलात्कार कर दोनों को सड़क पर फेंक दिया था.

पुलिस ने इसके बाद बस ड्राइवर समेत पांच अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया. इसके अलावा एक नाबालिग़ युवक को भी पकड़ा गया, जिस पर सबसे ज़्यादा क्रूरता बरतने के आरोप थे.

युवती को दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया, पर उसकी हालत बिगड़ती गई. लोगों के विरोध के बीच उसे सिंगापुर के अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया.

मगर वहां भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और 29 दिसंबर को गैंगरेप की शिकार इस छात्रा की मौत हो गई थी.

फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट

Image caption दिल्ली में मंगलवार को साकेत कोर्ट परिसर के बाहर काफ़ी भीड़ थी. लोगों को उत्सुकता थी कि अदालत क्या फ़ैसला करने वाली है.

इस दौरान दिल्ली समेत पूरे देश में जमकर प्रदर्शन हुए और समाज के अलग-अलग तबकों से बलात्कार के ख़िलाफ़ कड़े क़ानून बनाने की मांग उठी थी.

23 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की सुनवाई और जल्द निपटारे के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया गया. इस साल तीन जनवरी को पांच अभियुक्तों के ख़िलाफ़ पुलिस ने 33 पेज की चार्जशीट दायर की. 21 जनवरी 2013 को कैमरे की निगरानी में पांच अभियुक्तों के ख़िलाफ़ केस की सुनवाई शुरू हुई.

नाबालिग़ अभियुक्त की सुनवाई कर रहे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 28 जनवरी को अपने अहम फ़ैसले में उसे नाबालिग़ घोषित कर दिया. दो फ़रवरी को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांच अभियुक्तों के ख़िलाफ़ आरोप तय कर दिए.

जेल में मौत

केस की कार्यवाही चल ही रही थी कि 11 मार्च को एक अभियुक्त राम सिंह तिहाड़ जेल की बैरक में मृत पाए गए. जेल प्रशासन के मुताबिक़ उन्होंने ख़ुदकुशी की थी जबकि उनके परिवार का आरोप था कि उनकी हत्या की गई थी.

इसके बाद 31 अगस्त को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग़ को छात्रा से बलात्कार और हत्या का दोषी पाते हुए उसे तीन साल की सज़ा सुनाई.

Image caption दिल्ली समेत पूरे देश में गैंगरेप के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हुए और समाज के अलग-अलग तबकों से बलात्कार के ख़िलाफ़ कड़े क़ानून बनाने की मांग उठी थी. (फ़ाइल फ़ोटो)

उधर, तीन सितंबर को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में भी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ सुनवाई ख़त्म हो गई. फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में कुल 130 बैठकों में मामले की सुनवाई पूरी हुई और सौ से ज़्यादा गवाहों की गवाहियां दर्ज की गईं.

वर्मा कमेटी

इस बीच सरकार ने लोगों की पुरज़ोर मांग के बाद बलात्कार के क़ानूनों में बदलाव के लिए देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जेएस वर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया. जस्टिस वर्मा कमेटी को देश भर से 80 हज़ार सिफारिशें मिली.

कमेटी ने दुनिया भर के उदाहरणों को ध्यान में रखते हुए इस पर गहराई से विचार किया. जस्टिस वर्मा ने 29 दिनों में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी.

इस रिपोर्ट में बलात्कार के लिए फ़ांसी की सज़ा की मांग को ठुकरा दिया गया था.

हालांकि कमेटी ने बलात्कार और महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा के दायरे और उसके पैमाने को लेकर कड़े क़ानून बनाने की अनुशंसा की.

इसके बाद संसद ने बलात्कारियों के लिए मृत्यु दंड सहित कड़ी से कड़ी सज़ा के प्रावधान वाले नया विधेयक पास किया.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार