मुज़फ़्फ़रनगरः लौट रही है शांति, कर्फ्यू में ढील

  • 11 सितंबर 2013
मुज़फ़्फ़रनगर
Image caption मुज़फ़्फ़रनगर में पिछले दो दिनों में कोई बड़ी हिंसक वारदात नहीं हुई है.

सांप्रदायिक हिंसा से जूझ रहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में अब धीरे-धीरे शांति लौट रही है.

पिछले दो दिनों में यहां कोई बड़ी हिंसक वारदात नहीं हुई है. प्रशासन कर्फ्यू में भी ढील दे रहा है. बुधवार को पाँच घंटे तक कर्फ्यू में ढील दी गई.

मुज़फ़्फ़रनगर में 27 अगस्त को कवाल गाँव में तीन युवकों की हत्या के बाद से शुरू हुई सांप्रदायिक हिंसा में अब तक 34 लोगों की जान जा चुकी है.

शामली और मेरठ ज़िलों को कुछ इलाक़ों में भी हिंसा हुई है.

उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (क़ानून व्यवस्था) अरुण कुमार के मुताबिक अब तक 38 लोग इस हिंसा में मारे जा चुके हैं.

कर्फ़्यू में ढील

Image caption मुज़फ़्फ़रनगर में जारी कर्फ्यू में और ज़्यादा ढील देने पर विचार किया जा रहा है.

मुज़फ़्फ़रनगर के डीएम कौशल राज ने बीबीसी को बताया, ''मुज़फ़्फ़रनगर में पिछले साठ घंटों से हालात शांतिपूर्ण बने हुए हैं. किसी प्रकार का कोई विशेष तनाव नहीं देखा गया है.''

कौशल राज का कहना है, ''ग्रामीण क्षेत्रों में अभी शांति है. पिछले दो दिनों में कोई हिंसक वारदात नहीं हुई है.''

ज़िलाधिकारी के मुताबिक कुल 69 लोग घायल हुए थे जिनमें से फिलहाल आठ ही अस्पताल में भर्ती हैं बाकी सबको छुट्टी दी जा चुकी है.

दंगों पर राजनीति

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ सत्ताधारी समाजवादी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया है कि वो उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी का गुजरात मॉडल अपनाना चाहती है.

सपा की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष अबू आसिम आज़मी ने कहा, '"उत्तर प्रदेश में भाजपा का कोई अस्तित्व नहीं रह गया है. यही वजह है कि वो सांप्रदायिक तनाव पैदा कर रही है."

समाजवादी पार्टी के महासचिव नरेश अग्रवाल ने कहा कि मुज़फ़्फ़रनगर के कुछ अधिकारियों ने ढीला रवैया दिखाया और हिंसा के बारे में समय पर सूचना नहीं दी.

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद अखिलेश यादव सरकार ने दो दिन के भीतर ही स्थिति को काबू में कर लिया.

भाजपा ने कहा था कि मुज़फ़्फ़रनगर हिंसा में पार्टी की कोई भूमिका नहीं है.

पार्टी के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अच्छी तरह जानती है कि यह किसका किया-धरा है और स्थिति के सामान्य होने के बाद सच्चाई सबके सामने आ जाएगी.

इससे पहले अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रहमान ख़ान ने मंगलवार शाम प्रधानमंत्री से मुलाकात कर हिंसा पर चिंता ज़ाहिर की.

उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि वे उत्तर प्रदेश सरकार को हिंसा रोकने के लिए तमाम ज़रूरी क़दम उठाने के लिए कहें.

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