क्या महिलाओं के लिए जगी है उम्मीद?

16 दिसंबर की रात दिल्ली में चलती बस के अंदर एक लड़की के साथ हुई बलात्कार की घटना के बाद सड़क से लेकर संसद तक सभी ने महिलाओं के साथ बढ़ते अपराध की घटनाओं पर चिंता जताई.

ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि पिछले नौ महीनों के दौरान व्यापक जन आन्दोलनों और लंबी बहस से क्या हासिल हुआ है.

यह सही है कि इस दौरान देश में बलात्कार की घटनाएँ बढ़ी हैं, लेकिन महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए इस दौरान कई ऐसे फैसले भी किए गए हैं जो मील का पत्थर साबित होंगे.

ऐसे ही कुछ फैसलों पर एक नज़र-

हेल्पलाइन

दिल्ली सरकार ने महिलाओं के लिए एक हेल्पलाइन की शुरुआत की. इस हेल्पलाइन का नंबर 181 है. यहां प्रतिदिन 3,000 से अधिक कॉल आती हैं. ऐसी पहल उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित कुछ दूसरे राज्यों में भी देखने को मिलीं.

सख्त कानून

संसद ने बलात्कार विरोधी विधेयक को पारित किया. नए कानून में बलात्कार या सामूहिक दुष्कर्म के लिए अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान है.

मृत्युदंड का प्रावधान

इस तरह का अपराध दोबारा करने पर अधिकतम सजा के रूप में मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है.

संपत्ति में हिस्सा

Image caption देश भर में लोग बलात्कारियों के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहे हैं.

शादी के बाद खरीदी गई पति की संपत्ति में महिला का हिस्सा सुनिश्चित करने वाले एक विधेयक को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी.

बलात्कारी से समझौता नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बलात्कार के पीड़ित और अपराधी के बीच हुए समझौते को दोषी की सजा कम करने का आधार नहीं बनाया जा सकता.

घूरना भी अपराध

नए कानून में महिलाओं के घूरने और पीछा करने जैसे मामलों में दूसरी बार के अपराध को गैर जमानती जुर्म बनाया गया है.

निर्भया फंड

आम बजट में महिलाओं की सुरक्षा के लिए 1000 करोड़ रुपए के निर्भया फंड और अलग से महिला बैंक बनाने जैसे कदम की घोषणा की गई.

तेज़ाब हमलों पर सख्ती

महिलाओं पर तेज़ाब हमला करने पर दस साल तक कारावास का प्रावधान पास हुआ है.

किसी भी व्यक्ति को फोटो पहचान पत्र के बिना तेज़ाब नहीं बेचा जाएगा.

महिला बनी मुखिया

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक के तहत प्रावधन है कि लाभार्थी परिवार की मुखिया 18 वर्ष से अधिक उम्र की कोई महिला ही होगी.

फास्ट ट्रैक कोर्ट

दिल्ली सरकार ने बलात्कार संबंधी मामलों के लिए सभी जिला अदालतों में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया.

महिला पुलिस की नियुक्ति

दिल्ली के हर थाने में महिला पुलिस की नियुक्ति को अनिवार्य किया गया. महिलाओं से संबंधित मामलों की जांच अब महिला पुलिस अधिकारी ही करेंगी.

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