मुज़फ़्फ़रनगरः अखिलेश पहुँचे नहीं कि एसएसपी निलंबित

कवाल गाँव

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रविवार को दंगा प्रभावित मुज़फ़्फ़रनगर के दौरे पर पहुँचे. वे कवाल गाँव भी पहुँचे जहाँ 27 अगस्त को हिंसा की पहली वारदात हुई थी.

कवाल गाँव में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को विरोध का सामना भी करना पड़ा. कुछ लोगों ने अखिलेश यादव के ख़िलाफ़ नारेबाजी की और उन्हें काले झंडे भी दिखाए.

अखिलेश यादव के कवाल गाँव से निकलने के बाद गाँव के लोग संतुष्ट नज़र नहीं आए. स्थानीय लोगों का कहना था कि मुख्यमंत्री मात्र औपचारिकता पूरी करने के लिए आए थे. उन्होंने कुछ घरों का दौरा ज़रूर किया लेकिन किसी के लिए राहत की कोई घोषणा कवाल गाँव में नहीं की.

पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश ने कहा, 'ये घटना दुखद है. गाँवों से लोग घर अपना छोड़ आए हैं. हमें लोगों में भरोसा पैदा करना है. माहौल ख़राब न हो इसके लिए कोशिशें की है. जिन लोगों ने माहौल ख़राब किया है या जिनकी वजह से जानें गई हैं उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी.'

राहत कार्यों पर अखिलेश ने कहा, 'सरकार बहुत जल्द ही राहत कार्य शुरू कर देगी. जिन लोगों के घर नष्ट हुए हैं उनकी भरपाई की जाएगी. मदद देनी शुरू कर दी गई है. लोगों का जो भी नुकसान हुआ है उसकी भरपाई की जाएगी'

अखिलेश यादव ने कहा, '27 तारीख के बाद जो घटनाए हुईं है उस पर जाँच आयोग की रिपोर्ट आएगी और जो भी दोषी होगा उसे सज़ा दी जाएगी'

एसएसपी निलंबित

इस बीच, अखिलेश यादव ने दंगों के दौरान मुज़फ़्फ़रनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रहे सुभाष चंद्र दुबे को निलंबित कर दिया है.

अखिलेश यादव से पहले ही राष्ट्रीय लोक दल के सांसद और केंद्रीय मंत्री अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी भी मुजफ्फरनगर पहुँच गए. जयंत चौधरी ने अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों से मुलाकात की और न्याय का भरोसा दिया.

बीबीसी से बातचीत जयंत चौधरी ने कहा, 'वे खुद तो यहाँ आ रहे हैं लेकिन बाकी पार्टी के नेताओं को यहाँ पहुँचने से रोक रहे हैं. यह भी राजनीति ही है. यहाँ लोगों में सरकार के ख़िलाफ़ गुस्सा है.'

शांति बहाली की संभावना पर जयंत चौधरी ने कहा, 'गाँवों में दोनों ही समुदायों के लोगों की भावना ये है कि शांति बहाल हो. लोगों के बीच आई असुरक्षा की भावना को दूर करना बड़ी चुनौती है. हज़ारों लोगों ने पलायन किया है. दोनों समुदाय के लोगों को जोड़कर ही उन्हें वापस लाया जा सकता है.'

Image caption अखिलेश के मुज़फ़्फ़रनगर पहुँचने से पहले ही जयंत चौधरी भी वहाँ पहुँच गए

सोमवार को प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी भी का भी मुज़फ़्फ़रनगर पहुँचने का कार्यक्रम है. कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी भी मुज़फ़्फ़रनगर का दौरा करेंगे.

सेक्युलर टूरिज़्म

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दौरे पर टिप्पणी करते हुए भाजपा नेता मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा कि ये सेक्युलर टूरिज़्म हैं.

इससे पहले, मुज़फ़्फ़रनगर गए भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद को जिले की सीमा के बाहर ही रोक दिया गया था.

गौरतलब है कि मुज़फ़्फ़रनगर के कवाल गाँव में 27 अगस्त को एक हिंसक वारदात में तीन युवकों की हत्या के बाद समूचे मुज़फ़्फ़रनगर में तनाव व्याप्त हो गया था.

अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक समुदाय के लोगों की महापंचायतों ने माहौल को और ख़राब कर दिया और सात सितंबर को हुई 'बेटी बचाओ महापंचायत' के बाद समूचे मुज़फ़्फ़रनगर में दंगे भड़क गए थे जिनमें अभी तक 40 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है.

इलाक़े के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग पलायन कर राहत शिविरों में रह रहे हैं. उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक सरकारी शरणार्थी शिविरों में ही करीब दस हजार लोग रह रहे हैं. पलायन करने वालों में अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय के लोग हैं.

पिछले चार दिनों से मुज़फ़्फ़रनगर में हिंसा की कोई ताज़ा वारदात नहीं हुई है. लेकिन अभी भी कुछ इलाक़ों में तनाव व्याप्त है.

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