मुज़फ़्फ़रनगर में कर्फ़्यू पूरी तरह से हटा

  • 17 सितंबर 2013
Image caption मुज़फ़्फ़रनगर में 7 सितंबर से हिंसा शुरू हुई थी

दंगाग्रस्त मुज़फ़्फ़रनगर के सभी भागों से कर्फ़्यू हटा लिया गया है. सांप्रदायिक हिंसा के चलते वहाँ दस दिन पहले कर्फ़्यू लगाया गया था, लेकिन अब प्रशासन का मानना है कि वहाँ हालात सामान्य हो चले हैं. इसलिए इसकी ज़रूरत नहीं है.

ज़िला मजिस्ट्रेट कौशलराज शर्मा ने पत्रकारों को बताया, ''स्थिति अब शाँतिपूर्ण है. कई महत्वपूर्ण लोगों ने इलाक़े का दौरा किया है. इसलिए हमने फ़ैसला लिया है कि शाम सात बजे के बाद ज़िले में कोई कर्फ़्यू नहीं रहेगा.''

उनका कहना था कि रात को सुरक्षाकर्मियों की गश्त जारी रहेगा. ज़िले के सारे स्कूल खोल दिए गए हैं और जल्द ही इस पर फ़ैसला लिया जाएगा कि क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बुलाए गए सेना के जवानों को कब वापस बैरकों में भेजा जाए.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रवीण कुमार का कहना था कि स्थिति पर कड़ाई से नज़र रखी जाएगी और सुरक्षाकर्मियों की संख्या में कोई कमी नहीं की जाएगी ताकि कोई अवाँछित घटना न हो सके.

उन्होंने ये भी कहा कि क्षेत्र में सभी शराब की दुकानों को सिर्फ़ शाम सात बजे तक ही खुले रहने दिया जाएगा.

दंगों के बाद से इलाके में 1700 हथियार लाइसेंस रद्द किए गए हैं और आने वाले दिनों में कुछ और लाइसेंस रद्द किए जाएंगे.

Image caption मुज़फ़्फ़रनगर में सात सितंबर से हिंसा शुरू हुई थी

ज़िला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक ने लोगों से अपील की कि वो अफ़वाहें न फैलाएं और सांप्रदायिक सद्भाव के लिए काम करें. प्रशासन द्वारा बनाए गए 41 सहायता शिविरों में इस समय 7198 लोग रह रहे हैं. अधिकतर लोग अपने घर जाने के लिए तैयार नहीं हैं.

विपक्ष का कटाक्ष

इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी ने हिंसा प्रभावित इलाक़ों का दौरा किया और वादा किया कि दोषियों के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

वो बसीकलाँ गाँव में बनाए गए राहत शिविर में गए, जहाँ हिंसा के शिकार मुसलमानों ने शरण ली है. उन्होंने जाटबहुल बवाली और खांजपुरा गाँवों का भी दौरा किया.

राजनीतिक दलों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मुज़फ़्फ़रनगर दौरे की आलोचना की है. बीजेपी ने इसे ’ सेक्युलर टूरिज़्म’ बताया है जबकि बहुजन समाज पार्टी ने इसे नाटक की संज्ञा दी है.

यूपीए का बाहर से समर्थन कर रही समाजवादी पार्टी ने भी सरकार पर व्यंग्य करते हुए कहा है कि ये अच्छा है कि प्रधानमंत्री इस तरह की यात्रा कर रहे हैं क्योंकि चुनाव नज़दीक आ रहे हैं.

समाजवादी पार्टी नेता आज़म ख़ान का कहना था कि अच्छा होता कि प्रधानमंत्री ने दूसरे दंगाग्रस्त इलाकों जैसे फ़ैज़ाबाद, मथुरा और बरेली का भी दौरा किया होता.

बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह का कहना था कि अगर केंद्र सरकार ने समय पर उत्तर प्रदेश में हस्तक्षेप किया होता तो इतनी बड़ी दुखद घटना वहाँ नहीं होती.

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