मुज़फ़्फ़रनगर: आज़म का खंडन, नेताओं पर वारंट

आज़म खान ने पत्रकारों से बातचीत में स्टिंग पर कई सवाल उठाए और आरोपों का खंडन किया.

उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री आज़म खान ने एक स्टिंग ऑपरेशन में खुद पर लगे इन आरोपों का खंडन किया है कि उन्होंने मुज़फ़्फ़रनगर में दंगों के दौरान पुलिस पर दंगाइयों के खिलाफ नरमी बरतने का दबाव डाला था.

आज़म खान ने कहा कि इस मामले से उनका कोई लेना देना नहीं है और अगर उन्हें दोषी पाया गया है तो वो सज़ा भुगतने को तैयार हैं.

एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में मुज़फ़्फ़रनगर के दो पुलिस अधिकारियों ने कथित तौर पर कहा था कि दंगाइयों के खिलाफ़ नरमी बरतने के लिए राजनीतिक दबाव बनाया गया था.

बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में आज़म खान ने कहा, “जिस न्यूज़ चैनल ने ये स्टिंग ऑपरेशन टीवी पर दिखाया है, उसे ख़ुद इस मामले में जांच करनी चाहिए. मेरे मोबाइल और घर के नंबर, दफ्तर के नंबर सभी के रिकॉर्ड्स उपलब्ध है उनकी जांच की जानी चाहिए.”

आज़म खान ने आगे कहा, “अगर मैं दोषी पाया गया तो मुझे सज़ा मिलनी चाहिए. मैं कड़ी से कड़ी सज़ा भुगतने के लिए तैयार हूं. मैं उस तरह का व्यक्ति नहीं हूं जो इस तरह के काम करता हो.”

इस बीच, मुज़फ़्फरनगर की एक स्थानीय अदालत ने उग्र भाषणों से हिंसा भड़काने के आरोप में बसपा के एक सांसद, बसपा और भाजपा के कई विधायकों समेत 16 राजनेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं.

'मरना पसंद करेंगे'

आज़म खान ने आरोप लगाया है कि चैनल के रिपोर्टर ने पुलिस अधिकारियों को बातों में उलझाकर ऐसी बातें कहलवाई. आज़म खान ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि जब रिपोर्टर सवाल पूछ रहे थे, तब उनकी आवाज़ पर बीप की ध्वनि क्यों लगाई गई, उसे सुनाया क्यों नहीं गया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार दोनों पुलिस अधिकारियों को स्टिंग ऑपरेशन दिखाए जाने के बाद मंगलवार देर रात मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले से हटा दिया गया.

स्टिंग ऑपरेशन में इन अधिकारियों ने कथित तौर पर दंगाइयों के विरुद्ध नरमी के पीछे सरकारी दबाव की बात कबूली थी.

पीटीआई के अनुसार बुधना और फुगना के इन पुलिस इंस्पेक्टरों के तबादले को बड़े अधिकारियों ने ‘रुटीन कार्यवाही’ करार दिया है.

आज़म खान ने पत्रकारों को बताया, “एक ऐसा ट्रेंड जिसमें कैमरा में दिख रही अपुष्ट चीज़ों को टीवी पर दिखया जाता है, वो काफ़ी खतरनाक है. मैं एक साधारण आदमी हूं और इसके खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करूंगा.”

खान ने कहा है कि उन्होंने पुलिस या प्रशासन के काम में कभी दखल नहीं दिया है और ऐसा करने से पहले वो ‘मरना पसंद करेंगे’.

गिरफ्तारी वारंट

Image caption मुज़फ़्फ़नगर कई दिनों तक सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में रहा

उधर मुज़फ़्फ़रनगर की अदालत ने दंगों के मामले में 16 राजनीतिज्ञों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं जिनमें बसपा सांसद कादिर राना, भाजपा विधायक संगीत सोम और भारतेंदु सिंह, बसपा विधायक नूर सलीम और मौलाना जमील, कांग्रेस नेता सादीउजमान और भारतीय किसान यूनियन के प्रमुख नरेश टिकैत शामिल हैं.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रवीण कुमार ने बताया कि इस पर दो दिन के भीतर अमल किया जाएगा.

उन्होंने कहा, “हमने तीन से चार राजनेताओं को गिरफ्तार किया है. हमने कुछ सबूत जुटाए हैं. कुछ और सबूत जल्द जुटाए जाएंगे और गिरफ्तारियां होंगी. जो भी दोषी होगा, उसे दो दिनों में गिरफ्तार किया जाएगा. ये जांच का मामला है.”

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