आरबीआई: बढ़ीं ब्याज दरें, शेयर बाज़ार धड़ाम

  • 20 सितंबर 2013

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2013-14 की मौद्रिक नीति की मध्यावधि समीक्षा करते हुए अपनी नीतिगत दरों रेपो दर में .25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 7.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.50 प्रतिशत कर दिया है. रिजर्व बैंक के ताजा कदमों से कर्ज महंगा होगा.

ऐसे में आरबीआई के नए गवर्नर रघुराम राजन से सस्ते कर्ज की उम्मीद लगाकर बैठे उद्योग जगत को निराशा हाथ लगी और दोपहर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स में 500 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई.

इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट भी बढ़कर 6.5 प्रतिशत हो गई है.

पढ़िए क्या होती है मौद्रिक समीक्षा

रेपो रेट में वृद्धि होने से बैंकों को रिज़र्व बैंक से महंगा कर्ज़ मिलेगा, जिसका सीधा असर आम आदमी की ईएमआई पर पड़ेगा और आने वाले दिनों में बैंकों से कर्ज़ लेना महंगा हो सकता है.

बैंकों को थोड़ी राहत

हालाँकि रिज़र्व बैंक ने नकद सुरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कोई बदलाव नहीं किया है और यह दर चार प्रतिशत के स्तर पर स्थिर है. इससे बैंकों को थोड़ी राहत जरूर मिलेगी.

रेपो रेट वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक रिज़र्व बैंक से कर्ज़ लेते हैं और अगर बैंक अपना धन रिज़र्व बैंक के पास जमा करते हैं तो उन्हें रिवर्स रेपो रेट के आधार पर रिज़र्व बैंक से ब्याज मिलता है.

मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) को 10.25 प्रतिशत से घटाकर 9.5 प्रतिशत कर दिया गया है. इस दर के आधार पर बाजार में नकदी की कमी होने पर बैंक रिज़र्व बैंक से कर्ज़ ले सकते हैं. इस फैसले से आम आदमी को मिलने वाला कर्ज सस्ता होगा.

केन्द्रीय बैंक ने अपनी समीक्षा में कहा है कि घरेलू मोर्चे पर उद्योग और सेवा क्षेत्र के कमज़ोर प्रदर्शन के कारण विकास के अनुमान कमज़ोर बने हुए हैं.

ताजा मौद्रिक समीक्षा से साफ़ है कि रिज़र्व बैंक ने नए गवर्नर रघुराम राजन की पहली प्राथमिकता महंगाई को काबू में रखने की है, और फिलहाल उद्योगों को सस्ते कर्ज़ के लिए अभी इंतजार करना होगा.

महंगाई पर नियंत्रण

मौद्रिक नीति जारी होने के बाद रघुराम राजन ने संवाददाताओं से कहा कि उन्हें फंडिंग की लागत और महंगाई, दोनों का मुकाबला करना है, लेकिन रिजर्व बैंक के लिए महंगाई पर नियंत्रण अधिक महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि फिलहाल फंडिंग की लागत काफी अधिक है और उन्होंने जल्द से जल्द सामान्य मौद्रिक परिचालन पर लौटने की उम्मीद जताई.

उन्होंने कहा कि "यूरोप, जापान और ब्रिटेन की अर्थव्यवस्थाओं में तेजी का रुख देखने को मिल रहा है. इससे हमारे निर्यात को मदद मिल सकती है. ऐसा हुआ तो हम उम्मीद से पहले अपने राजकोषीय घाटे को काबू में कर सकेंगे."

एक संवाददाता ने जब रघुराम राजन से हिंदी में जवाब देने का अनुरोध किया तो उन्होंने कहा कि "मैंने एक साल के भीतर में हिंदी में इंटरव्यू देने का वादा किया है."

निराश हुआ बाज़ार

रिज़र्व बैंक के इस कदम का बाजार पर बुरा असर देखने को मिला. दोपहर 12 बजे बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स सूचकांक 500 अंकों की गिरावट के साथ 20143 अंक पर कारोबार कर रहा था.

इस दौरान सबसे अधिक गिरावट बैंकिंग शेयरों में देखने को मिली और बैंकिंग शेयरों के प्रदर्शन को दर्शाने वाला बैंक निफ्टी करीब छह प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था.

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