ब्लैकबेरी ख़रीदने चला कौन है यह भारतीय?

जब दुनिया भर के विश्लेषक ब्लैकबेरी के दिन बीतने की बात कर रहे हैं तब इस स्मार्टफ़ोन पर अरबों रुपयों का दांव एक भारतीय ने लगाने का फ़ैसला किया है.

क़रीब 294 अरब रूपए में ब्लैकबेरी को ख़रीदने का प्रस्ताव देने वाली कंपनी फ़ैयरफ़ैक्स फ़ाइनेंशियल होल्डिंग्स के संस्थापक, अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं प्रेम वत्स.

63 साल के प्रेम वत्स का जन्म 1950 में हैदराबाद में हुआ था. उनका बचपन हैदराबाद में ही गुज़रा. बाद में आईआईटी मद्रास से उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की.

इसके बाद वत्स 1972 में लंदन चले गए. इसके बाद पिता के कहने पर वे कनाडा पहुंचे और वहीं से वेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री ली.

इसके बाद प्रेम ने कनाडा के फ़ाइनेंस सेक्टर में अपने क़दम जमाने शुरू किए जो आज मज़बूती से जमे हुए हैं. 1985 में उन्होंने फ़ेयरफैक्स फ़ाइनेंशियल होल्डिंग्स की कमान संभाली.

कनाडा का 'वॉरेन बफ़ेट'

उन्हें लोग कनाडा का वॉरेन बफ़ेट कह कर बुलाते हैं. इसकी वजह यह है कि प्रेम ने अब तक निवेश का वही तरीक़ा अपनाया है जो वॉरेन बफ़े की ख़ासियत रही है. अमरीकी अरबपति कारोबारी वॉरेन बफ़ेट ने बर्केशायर हाथवे इंक की स्थापना कर बीमा कंपनियों में निवेश करके भारी मुनाफ़ा कमाया.

ठीक उसी तर्ज़ पर प्रेम वत्स उन कंपनियों में निवेश करते रहे हैं जिसमें दूसरे इंवेस्टर निवेश करने से घबराते हैं. प्रेम वत्स ने अब तक अपने करियर में डाउन मार्केट और आउट ऑफ़ स्टॉक कंपनियों में ज्यादा निवेश किया है.

ब्लैकबेरी पर भरोसा

प्रेम वत्स हमेशा से ब्लैकबेरी का बचाव करते रहे. उन्हें इस बात का भरोसा है कि ब्लैकबेरी अभी भी बाज़ारमें ज़ोरदार वापसी कर सकती है.

उनकी कंपनी फ़ेयरफ़ैक्स फ़ाइनेंशियल ब्लैकबेरी की तीसरी सबसे बड़ी निवेशक थी. इस साल अगस्त तक प्रेम वत्स ब्लैकबेरी के निदेशक मंडल में शामिल थे.

उन्होंने ब्लैकबेरी पर नियंत्रण के मुद्दे पर कहा है, "इस सौदे से ब्लैकबेरी, इसके उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के लिए एक नया अध्याय खुलने वाला है."

हालांकि प्रेम वत्स के सामने बेहद मुश्किल चुनौती है.

एक दौर था जब वाटरलू, ओंटारियो स्थित ब्लैकबेरी के फ़ोन का अपना जादू था. ख़ास तौर पर बीबीएम (ब्लैकबेरी मैसेजिंग) तो बेहद लोकप्रिय हुआ था, क्योंकि इसमें निजी ई-मेल की पुख्ता सुरक्षा गारंटी थी.

मुश्किल चुनौती

लेकिन ब्लैकबेरी अपनी बढ़त को क़ायम नहीं रख सका. ऐपल के आईफ़ोन और गूगल के एंड्रायड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले स्मार्ट फ़ोन के सामने ब्लैक बेरी पिछड़ता गया.

फ़ोन की ब्रिकी में गिरावट के चलते ब्लैकबेरी को एक अरब डॉलर के नुक़सान का अनुमान है. पिछले सप्ताह ही कंपनी ने 4500 कर्मचारियों की छंटनी का फ़ैसला लिया था.

ऐसे में प्रेम वत्स के लिए आने वाले दिन बेहद चुनौती भरे हो सकते हैं.

लो प्रोफ़ाइल प्रेम

वैसे प्रेम वत्स की एक बड़ी ख़ासियत ये भी है कि वो बेहद कम आमदनी में अपना गुज़ारा चला लेते हैं. दूसरे अरबपतियों के मुक़ाबले में वे अपनी कंपनी से कम वेतन लेते हैं. यही वजह है कि तमाम उपलब्धियों और कंपनी को मोटा मोनाफ़ा दिलाने के बाद भी प्रेम वत्स कनाडा के सबसे अमीर आदमियों में 102वें नंबर पर आते हैं. 2012 के वित्तीय साल में उनका कुल वेतन 6.22 लाख डॉलर (क़रीब 40 करोड़ रुपए) रहा था.

इतना ही नहीं दुनिया के जाने माने निवेशक होने के बाद भी वे बेहद लो प्रोफ़ाइल में रहना पसंद करते है. 1985 से फ़ेयरफ़ैक्स की कमान संभालने के बाद अगले 15 सालों तक उन्होंने कभी मीडिया से बात नहीं की. 2001 से पहले वे निवेशकों की बैठकों में शामिल होने से बचते रहे.

सटीक होगा दांव?

लेकिन बाज़ार के आकलन और निवेश के मसले पर प्रेम वत्स का अंदाज़ा सही बैठता रहा. 1987 में दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में आई गिरावट, 1990 में जापान का संकट और 2008 के आर्थिक मंदी के दौरान उनका अंदाज़ा हमेशा सटीक साबित हुआ.

ऐसे में कारोबारी दुनिया में यही सवाल तैर रहा है कि क्या इस बार प्रेम वत्स का दांव सटीक साबित होगा?

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