झारखंड: बच्ची से दुष्कर्म व हत्या के दोषी को फांसी

झारखंड की अदालत ने रेप के आरोपी को दोषी करार दिया और फांसी की सज़ा सुनाई

रांची की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 11 वर्षीय एक नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी पाए गए एक अभियुक्त को फांसी की सज़ा सुनाई है.

तीन अक्टूबर को अदालत ने ये सज़ा सुनाई थी, पर अगले दिन अदालत में अवकाश होने के चलते शनिवार को इस फैसले का पता चला.

अभियुक्त विशेष महतो उर्फ़ 'हेना अभी जेल में है.

त्वरित अदालत में सरकारी वकील ममता श्रीवास्तव का कहना था, "अपर न्यायायुक्त सीमा सिन्हा ने अभियुक्त को यह सज़ा सुनाई है. उन्हें पिछले 30 सितंबर को दोषी ठहराया गया था."

भारतीय दंड विधान की धारा 376 के तहत महतो को आजीवन कारावास, 302 के तहत मृत्युदंड और 201 में साक्ष्य छुपाने के लिए सात साल की सज़ा सुनाई गई है.

मामला

Image caption सरकारी वकील ममता श्रीवास्तव ने बताया कि 30 सिंतबर को अभियुक्त को दोषी ठहराया गया था.

यह मामला झारखंड की राजधानी रांची से करीब 40 किलोमीटर दूर बेड़ो थाना क्षेत्र के चनकोपी गाँव का है.

आठ मई 2008 को अभियुक्त ने दुष्कर्म के बाद बच्ची की धारदार हथियार से हत्या कर दी थी. इसके बाद शव को एक कुएं में फेंक दिया था.

दो दिन बाद 10 मई 2008 को बच्ची का शव बरामद किया गया था.

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने महतो को गिरफ़्तार कर लिया था. महतो पास के ही एक गाँव कमल टोली के रहने वाले हैं.

सरकारी वकील ने बताया कि पुलिस में दर्ज एफ़आईआर के मुताबिक घटना के दिन दोपहर बाद बच्ची गांव में पास के एक बगीचे में आम चुनने गई थी.

अभियुक्त ने अकेले देखकर बच्ची से बलात्कार किया और हत्या कर शव को कुएं में फेंक दिया.

Image caption महिलाओं के विरूद्ध अपराध के मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए पाँच जनवरी 2013 को त्वरित न्यायालय का गठन किया गया.

सरकारी वकील के मुताबिक़ इस मामले में 21 जनवरी 2009 को आरोप तय किए गए.

इस मामले में पीड़िता की तरफ से 14 लोगों ने गवाही दी और बचाव पक्ष की ओर से अभियुक्त की पत्नी ने गवाही दी थी.

उसने अपने पति को निर्दोष बताया था.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पीड़ित पक्ष की तरफ से गवाहों के बयान पर ग़ौर करने के बाद फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने यह फैसला सुनाया.

महिलाओं के विरूद्ध अपराध के मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए पाँच जनवरी 2013 को रांची में यह न्यायालय बनाया गया है.

सरकारी वकील का कहना है कि झारखंड में फास्ट ट्रैक कोर्ट में किसी अभियुक्त को मृत्युदंड की सजा सुनाये जाने का यह पहला मामला है.

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