आसाराम, उनके बेटे पर बलात्कार का नया आरोप

आसाराम, बलात्कार

आसाराम के जेल जाने के बाद उनके ख़िलाफ़ आरोपों की बारिश हो रही है. जोधपुर आश्रम में बलात्कार के आरोप के बाद अब आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं पर सूरत में शारीरिक शोषण का नया केस दर्ज हुआ है.

यह केस दो सगी बहनों ने दर्ज कराया है. सूरत के जहांगीरपुरा थाने में दर्ज कराई गई इस एफ़आईआर के मुताबिक़ बड़ी बहन का यौन शोषण आसाराम ने और छोटी बहन का शोषण उनके बेटे नारायण साईं ने किया. एफ़आईआर में आसाराम की पत्नी और बेटी के नाम भी शामिल किए गए हैं.

आरोप है कि आश्रम में इन दोनों बहनों को आयुर्वेदिक दवाएं बनाने का काम दिया गया था, जहां उनका यौन शोषण किया जाता रहा. दोनों बहनों की अब शादी हो चुकी है.

नया मामला

बड़ी बहन के मुताबिक़ आसाराम ने अहमदाबाद के मोटेरा आश्रम में उसके साथ 2001 से 2007 के बीच कई बार बलात्कार किया.

छोटी बहन की शिकायत के मुताबिक़ आसाराम के बेटे नारायण साईं ने उससे सूरत के जहांगीरपुरा आश्रम के अलावा साबरकांठा जिले के गांभोई आश्रम, पटना आश्रम, काठमांडू आश्रम और मध्यप्रदेश के मेघनगर आश्रम में बलात्कार किया.

Image caption आसाराम इस समय जोधपुर जेल में बंद हैं. हाईकोर्ट में उनकी ज़मानत याचिका रद्द हो चुकी है.

एफ़आईआर के मुताबिक़ छोटी बहन 2002 से 2004 तक आश्रम में साधक रहीं. छोटी बहन को थोड़े समय के लिए आसाराम के हिम्मतनगर आश्रम की संचालिका भी बनाया गया था. बड़ी बहन आसाराम की आयुर्वेदशाला में दवा बनाने में मदद करती थीं.

दोनों का आरोप है कि उन्होंने जब ख़ुद पर होने वाले अत्याचार का विरोध किया, तो उन्हें परेशान किया गया और बाद में आश्रम में चोरी का झूठा आरोप लगाकर निकाल दिया गया.

बड़ी बहन क़रीब दस साल आसाराम के आश्रम में साधक रहीं और 2007 में उन्होंने आश्रम छोड़ा.

पुलिस जाँच

सूरत के पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं के खिलाफ केस दर्ज होने की पुष्टि की है.

बीबीसी से बातचीत में अस्थाना ने कहा, “नारायण साईं के ख़िलाफ़ सूरत पुलिस जाँच शुरू कर चुकी है. आसाराम के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर को अहमदाबाद पुलिस को भेज रहे हैं, क्योंकि अपराध अहमदाबाद में हुआ है.”

उनका कहना है कि पुलिस जल्द ही नारायण साईं का बयान रिकॉर्ड करेगी.

Image caption आसाराम के कई पुराने भक्त अब उनका साथ छोड़ चुके हैं.

ये मामला 2002 से 2004 के बीच का है. पुलिस को शक है कि जिस दौरान यौन शोषण हुआ होगा, उस वक़्त एक बहन नाबालिग़ रही होगी.

नईं मुश्किलें

इस बीच चचेरे भाइयों दीपेश और अभिषेक की रहस्यमय मौत के मामले में पांच साल बाद उनके परिवारों ने फिर न्याय के लिए आंदोलन तेज़ कर दिया है. दोनों के शव आसाराम के आश्रम के पास मिले थे.

इन परिवारों ने 7 और 8 अक्टूबर को अहमदाबाद में धरने के साथ अपने आंदोलन को नए सिरे से शुरू करने का फ़ैसला लिया है.

2008 में बापू के साबरमती आश्रम में दीपेश और अभिषेक वाघेला नाम के दो बच्चों की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी. सीआईडी ने मामले की जाँच की और आश्रम के सात साधकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी.

इसमें ग़ैरइरादतन हत्या का आरोप लगाया गया था.

शनिवार को अहमदाबाद में मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने सात में से चार आरोपियों के ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती वॉरंट के आदेश दिए. उदय संघानी, अजय शाह, विकास खेमका और मिनकेत पत्रा के ख़िलाफ़ वारंट जारी किए गए.

मृतक दीपेश के पिता प्रफुल्ल वाघेला ने शनिवार को एक समाचार पत्र को इंटरव्यू में कहा था, “जोधपुर पुलिस आसाराम और उनके अधीनस्थों को गिरफ्तार कर सकती है, तो गुजरात पुलिस क्यों नहीं?”

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