मीडिया ने बनाई है मोदी की छवि: चिदंबरम

मोदी

वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कांग्रेस की कमान युवाओं के हाथों में दिए जाने की वकालत करते हुए कहा है कि राहुल गाँधी अगले आम चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करेंगे.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में वित्त मंत्री ने माना कि गुजरात के 'विवादास्पद' मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी कुछ शहरी युवाओं में लोकप्रिय हैं और उन्होंने मुख्य विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं में जोश भरा है, लेकिन चिदंबरम ने अनुसार मोदी की छवि को बनाने में मीडिया का हाथ है.

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी का “ट्रैक रिकॉर्ड काफ़ी उतार-चढ़ाव वाला रहा है.”

नरेंद्र मोदी के आलोचक उन पर आरोप लगाते रहे हैं कि उनकी सरकार ने वर्ष 2002 के गुजरात दंगों को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए लेकिन मोदी इन आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं.

राहुल गाँधी पर पूछे गए एक सवाल पर चिदंबरम ने कहा, “मुझे इस बात की खुशी है कि आप राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री के तौर पर देखते हैं लेकिन आपको ये सवाल उन्हीं से पूछना चाहिए. वक्त आ गया है कि पार्टी की कमान नए और युवा हाथों में सौंपी जाए.”

पी चिंदरबरम से पहले भी कई दूसरे कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को अगले प्रधानमंत्री के तौर पर पेश किए जाने की बात कह चुके हैं लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी कह चुके हैं कि वो प्रधानमंत्री बनने की होड़ में शामिल नहीं हैं.

अमरीका यात्रा से पूर्व रॉयटर्स को दिए गए साक्षात्कार में चिदंबरम ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से चल रही आर्थिक मंदी और कई मामलों में भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद ये सोचना गलत होगा अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव में कांग्रेस को हार का मुँह देखना पड़ेगा.

उन्होंने कहा, “आप हमें इतनी जल्दी खारिज मत करिए.”

मंदी

भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी का शिकार है. एक वक्त करीब 10 प्रतिशत की रफ़्तार से बढ़ने वाली भारतीय अर्थव्यवस्था पिछले एक दशक में सबसे कम पाँच प्रतिशत की रफ़्तार से बढ़ रही है.

रुपए की कीमत गिरी है, और अर्थव्यवस्था में जान फूंकने की सरकार की तमाम कोशिशों का बहुत असर नहीं पड़ा है.

सरकार ने रीटेल और नागरिक उड्डयन जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश को अनुमति तो दे दी लेकिन इन कदमों के बावजूद अर्थव्यवस्था रफ़्तार नहीं पकड़ पा रही है.

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि जब सरकार ने खाद्य सुरक्षा बिल और भूमि अधिग्रहण बिल को संसद में पारित करवाया तो उसे गरीबों से ज़्यादा अगले चुनाव में दोबारा सत्ता हासिल करने का ख्याल था.

सरकार ने मंदी के अंतरराष्ट्रीय कारणों को ज़िम्मेदार बताया है लेकिन विपक्ष ने इसके लिए नीतियों और कथित सरकारी भ्रष्टाचार को ज़िम्मेदार ठहराया है.

पिछले कुछ महीनों में एक के बाद कई स्कैंडलों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बेदाग छवि पर भी असर डाला है. चाहे वो 2जी घोटाला हो, कॉमनवेल्थ घोटाला हो या फिर कोयला घोटाला, इन सभी मामलों ने सरकार के कामकाज को प्रभावित किया है.

ऐसे वक्त जब कई विश्लेषकों के अनुसार विदेशी निवेशकों का भारतीय अर्थव्यवस्था में विश्वास कम हुआ है, पी चिदंबरम अपनी अमरीका यात्रा के दौरान निवेशकों को लुभाने की कोशिश करेंगे.

बातचीत में चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने खर्चों को कम करने के लिए कटौती के आदेश दिए हैं और उससे कुछ बचत होगी.

उन्होंने रेटिंग एजेंसियों द्वारा भारत की रेटिंग में कटौती के खतरे को खारिज कर दिया.

चिदंबरम ने कहा, “रेटिंग में कटौती का कोई खतरा नहीं है. अगर कोई एजेंसी रेटिंग की कटौती करने के लिए उम्मीदवार देशों की तलाश कर रही है तो उसके लिए आधे दर्जन दूसरे देश मौजूद हैं.”

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