पायलिन: लोगों में ख़ौफ और सड़कों पर सन्नाटा

Image caption पायलिन तूफ़ान ओडीशा तट को शनिवार शाम को हिट करने वाला है.

चक्रवर्ती तूफ़ान पायलिन भारत के पूर्वी तट से अब से कुछ ही घंटों में टकराने वाला है और ओडीशा की राजधानी भुवनेश्वर से लेकर गंजम ज़िले तक लोग सड़कों से नदारद हैं.

मौसम विभाग ने जो ताज़ा जानकारी दी है उसके मुताबिक इस तूफ़ान के भारतीय तटों से टकराने में अब कुछ ही समय बाकी है.

मौसम विभाग के महानिदेशक एलएस राठौड़ ताजा अपडेट जारी करते हुए बताया, "छह से आठ बजे के बीच ये तूफ़ान ओडीशा के तट पर पहुंचेगा. अभी गोपालपुर से 90 किमी दूर है और करीब बीस किमी प्रति घंटा की रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है. तट पर पहुंचने पर हवा की रफ्तार 210-220 किमी प्रति घंटा रहेगी."

मौसम विभाग का कहना है कि तूफ़ान का सबसे ज़्यादा असर छह घंटे तक रहेगा, उसके बाद उसकी तीव्रता कम होने लगेगी.

वहीं, भुबनेश्वर से स्थानीय पत्रकार संदीप साहू के मुताबिक ओड़िशा के राजस्व मंत्री सूर्य नारायण पात्र ने बताया है कि अभी तक राज्य के तटीय इलाक़ों से तीन लाख साठ हज़ार लोगों को हटाकर सुरक्षित इलाक़ों में पहुँचा दिया गया है.

सबसे ज़्यादा एक लाख चालीस हज़ार लोगों को गंजाम ज़िले से हटाया गया है और पुरी से 80,000 लोगों को निकाल लिया गया है. राजस्व मंत्री ने बताया कि फ़ौज के 300 जवानों को संचार व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात कर दिया गया है.

रेलगाड़ियां निरस्त

संदीप साहू का कहना है कि हावड़ा-विशाखापट्टनम मार्ग पर की सभी रेलगाड़ियां निरस्त कर दी गई हैं और उम्मीद है कि ये सभी गाड़ियां कल भी निरस्त रहेंगी. इसके अलावा भुवनेश्वर की ओर जाने वाली सभी उड़ानें भी रद्द कर दी गई हैं.

इस बीच, सुबह से ही तेज़ हवाओं ने पूरे इलाक़े को अपनी ज़द में ले रखा है. ओडीशा सरकार ने पहले ही से तटीय इलाक़ों से लाखों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का इंतज़ाम कर दिया है.

ओडीशा की राजधानी से लेकर तटीय इलाक़ों तक सारी दुकानें और पेट्रोल पम्प बंद कर दिए गए हैं. सड़कों पर सन्नाटा पसरा है. तेज़ तूफ़ानी हवा की आवाज़ ने एक अजीब से ख़ौफ़ का माहौल बना दिया है.

मेरा सामना इन तेज़ हवाओं से ऊपर आसमान पर ही हो गया जब सुबह दिल्ली से भुवनेश्वर तक आने वाली उड़ान को तेज़ हवाओं की वजह से एयरपोर्ट पर लैंड करने में ख़ासी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा.

मुश्किल से उतरा विमान

विमान के पायलट ने जहाज़ को उतारने के लिए चार कोशिशें की तब जाकर बड़ी मुश्किल से विमान किसी तरह हवाओं की चुनौती का सामना करता हुआ उतर पाया.

इस बीच विमान में सवार लोगों का कलेजा मुंह को तब आ गया जब तेज़ हवाओं की वजह से विमान हिचकोले खाने लगा.

विमान के पायलट की सूझ बूझ की वजह से जैसे ही हमारा हवाई जहाज़ लैंड किया तो यात्रियों नें तालियाँ बजानी शुरू कर दी.

एयरपोर्ट पर उतरने के साथ ही पता चला कि इसे बंद किया जा रहा है और यहाँ से जाने वाली सभी उड़ानों को रद्द कर दिया गया है.

भुवनेश्वर से गंजम के बरहमपुर तक 200 किलोमीटर से ज्यादा के रास्ते में हवाओं ने पहले से ही तांडव मचाना शुरू कर दिया है. रास्ते में जगह-जगह पेड़ टूट कर गिरे पड़े थे.

कई जगहों पर टिन की छतें भी हवा से उड़ कर दूर गिरी हुईं नज़र आईं. सडकों पर वाहन ग़ायब होते चले गए.

लोगों में दहशत

बरहमपुर के लोगों का कहना है कि उनके मन में दहशत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि उन्होंने वर्ष 1999 में आए तूफ़ान की तबाही को क़रीब से देखा जिसमे 15 हज़ार से ज्यादा लोग मारे गए थे.

हालांकि इस बार सरकार ने पहले से ही अहतियाती क़दम उठाए हैं और पायलिन के आने से पहले ही लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का सिलसिला शुरू कर दिया है.

मैं इस वक़्त बरहमपुर में हूँ और तूफ़ान जिस वक़्त ओडीशा और आंध्र प्रदेश के तट से टकराएगा, मैं यहीं रहूँगा. यहाँ से कुछ ही सिर्फ़ 15 किलोमीटर की दूरी पर गोपालपुर है और मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जब पायलिन टकराएगा तो गोपालपुर के तट पर समुन्द्र में तीन से चार मीटर ऊँची लहरें टकराएंगी.

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