अब तक भगदड़ की वजह से हुए हादसे

  • 14 अक्तूबर 2013
Image caption कुम्भ मेले के दौरान मची भगदड़ में मारे गए तीर्थमात्री

हाल के कुछ वर्षों में दुनिया भर में भगदड़ की वजह से हुए हादसों में कई हजार लोग मारे गए हैं.

इनमें से अधिकतर हादसे धार्मिक त्योहारों के मौकों पर हुए हैं.

एक नज़र मुख्य हादसों पर

10 फरवरी 2013, इलाहाबाद, भारत

विश्व प्रसिद्ध कुम्भ मेले के दौरान इलाहाबाद में रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 36 लोग मारे गए और कम से कम 39 लोग घायल हो गए.

19 नवंबर, 2012, पटना, भारत

छठ पूजा के मौके पर पटना के अदालतगंज घाट पर धक्का-मुक्की के कारण कम से कम 18 लोग मारे गए और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए.

14 जनवरी 2011, केरल, भारत

इस हादसे में 102 तीर्थयात्री सबरीमाला मंदिर से लौटते हुए मची भगदड़ में मारे गए. यह मंदिर घने जंगलों के बीच पहाड़ी इलाके में स्थित है.

22 नवंबर 2010, नोम पेन्ह, कम्बोडिया

जल उत्सव के वार्षिक समारोह के दौरान टोनले सेप नदी पर बने पुल पर मची भगदड़ में 375 से अधिक लोग मारे गए. प्रधानमंत्री हून सेन ने इस हादसे को खमेर रूज के बाद देश का सबसे बड़ा हादसा करार दिया.

30 सितंबर, 2008, राजस्थान, भारत

जोधपुर के प्रसिद्ध महेन्द्रगढ़ किले के अंदर स्थित चामुंडा देवी के मंदिर में भगदड़ की वजह से 220 लोग मारे गए.

3 अगस्त, 2008 हिमाचल प्रदेश, भारत

उत्तराखंड में पहाड़ी पर बने नंदादेवी मंदिर में भगदड़ की वजह से कम से कम 140 लोग मारे गए. खराब मौसम की वजह से मंदिर के रास्ते में बनी बरसाती के ढह जाने से अफ़रा-तफ़री के कारण मची. इस भगदड़ में सैंकड़ों लोग घायल भी हुए थे.

12 जनवरी, 2006, मीना, सऊदी अरब

मक्का में वार्षिक हज यात्रा के दौरान भगदड़ में कम से कम 364 लोग मारे गए थे. अधिकारियों के मुताबिक जमारात के पुल की ओर जाने वाले एक प्रवेश द्वार पर चलती बस से सामान गिर जाने के कारण भगदड़ मच गई थी.

31 अगस्त, 2005, बगदाद, इराक

आत्मघाती बम की अफवाह से मची भगदड़ में एक हजार के अधिक शिया मुस्लिम तीर्थयात्री कुचल कर या टिगरीस नदी में डूबकर मारे गए. मारे गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे.

25 जनवरी, महाराष्ट्र, भारत

दूरदराज इलाके में बने मंधर देवी के मंदिर में मची भगदड़ के दौरान 300 से अधिक हिन्दू तीर्थयात्री मारे गए. इनमें से कई तीर्थयात्री मंदिर को जाने वाले संकरे रास्ते पर बनी दुकानों में आग लगने के कारण जल कर मारे गए.

1 फरवरी, 2004, मीना, सऊदी अरब

हज के दौरान मची 27 मिनट की अफरा-तफरी में कम से कम 251 लोगों की मौत हो गई. अधिकारियों के अनुसार पिछली बार की भगदड़ की घटनाओं के नए नियमों के तहत मारे गए लोगों में से कई लोग शैतान को पत्थर मारे के लिए अधिकृत नहीं थे.

9 मई, 2001, अक्करा, घाना

अक्करा हार्ट्स ऑफ ओक और असानते कोटोको के बीच हुए मैच के बाद अक्करा स्पोर्ट्स स्टेडियम में कम से कम 126 लोग मारे गए. लोगों ने इसके लिए घाना की पुलिस को दोषी बताया, जिन्होंने दर्शकों से खचाखच भरे और बंद स्टेडियम में आंसू गैस छोड़ी.

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