सुप्रीम कोर्ट: कोलगेट में पीएम नहीं होगें पार्टी

  • 29 अक्तूबर 2013
मनमोहन सिंह
Image caption तत्कालीन कोयला सचिव पीसी पारेख ने प्रधानमंत्री को जाँच में शामिल नहीं किए जाने पर सवाल उठाए थे

सुप्रीम कोर्ट ने कोयला घोटाला मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम जाँच एजेंसी सीबीआई की प्रथम जाँच रिपोर्ट में शामिल किए जाने की याचिका खारिज कर दी है.

याचिका में अदालत से अपील की थी कि वो प्रधानमंत्री को आदेश दे कि वो कोयला खान आवंटन मामले में हलफ़नामा दाखिल करे, लेकिन अदालत ने इस मांग को भी ठुकरा दिया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अदालत ने कहा, “जाँच अभी भी चल रही है और सीबीआई अधिकारी छानबीन कर रहे हैं.”

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की उस अपील को स्वीकारा जिसमें सीबीआई ने जाँच टीम में एक और अफ़सर को शामिल करने की बात की थी.

कोयला आवंटन में कथित घोटाले की जाँच कर रही सीबीआई की टीम में 39 सदस्य शामिल हैं.

मामला

पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा था कि जाँचकर्ताओं की टीम में कोई बदलाव नहीं किया जाए, इसलिए सीबीआई को ये अपील दाखिल करनी पड़ी थी.

गौरतलब है कि कोल ब्लॉक आवंटन मामले में सीबीआई ने हिंदुस्तान के प्रमुख उद्योगपति कुमार मंगलम बिरला और उनकी दो कंपनियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

सीबीआई ने तत्कालीन कोयला सचिव पीसी पारेख के ख़िलाफ़ भी नया मामला दर्ज किया है.

भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कोयला घोटाला एक लाख 86 हज़ार करोड़ रुपए का अनुमानित घोटाला है.

इन कंपिनयों को कोयला की खाने बिना कोई बोली लगाए दी गई थीं.

विश्लेषकों का कहना था कि अगर इन कोयला खानों की नीलामी की गई होती तो सरकार को इतना घाटा नहीं उठाना पड़ा होता.

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक एसार पावर, हिंडाल्को, टाटा स्टील, टाटा पावर, जिंदल स्टील एंड पावर सहित 25 कंपनियों को विभिन्न राज्यों में कोयले की खानें दी गईं.

कैग की यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई थी.

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