सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ ताल या तीसरे मोर्चे की थाह

  • 30 अक्तूबर 2013
तीसरा मोर्चा, तालकटोरा स्टेडियम, दिल्ली

दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम के मंच पर एक साथ एक दर्जन से अधिक नेताओं ने एक आवाज़ में सांप्रदायिकता के खिलाफ नारा बुलंद किया. कहने को ये सांप्रदायिकता के खिलाफ एक सम्मलेन में शामिल होने आए थे, लेकिन वो इन अटकलों को नहीं रोक सके कि ये एक गैर कांग्रेस, गैर भाजपा तीसरे मोर्चे के संभावित पुनर्गठन की एक कोशिश है.

वामपंथी दलों द्वारा बुलाए गए इस सम्मेलन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सांप्रदायिक ताक़तों से सावधान रहने की ज़रुरत है.

उनके अनुसार धार्मिक जुलूसों और यात्राओं के ज़रिए समाज को तोड़ने और टकराव की स्थितियां पैदा की जा रही हैं.

समाजवादी पार्टी के नेता मु लायम सिंह यादव के शब्द अलग थे लेकिन अर्थ एक.

उन्होंने मुज़फ्फरनगर में हुए हाल के दंगों के हवाले से कहा कि सांप्रदायिक ताक़तें हर जगह दंगे कराना चाहती हैं और इन ताक़तों के खिलाफ एकजुट होना ज़रूरी है.

जनता दल यूनाइटेड अध्यक्ष शरद यादव ने भी सांप्रदायिक तत्वों को ललकारते हुए कहा अब 'इनकी नहीं चलेगी'.

सम्मेलन में14 पार्टियों ने हिस्सा लिया लेकिन नेताओं की संख्या इससे कहीं अधिक थी.

भाषण और ताली

Image caption इस सम्मेलन में चंद्रबाबू नायडू नहीं आए.

तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में मौजूद लोगों ने कभी नेताओं के भाषणों पर तालियां भी बजाईं और नारे भी लगाए.

उत्साह मंच पर भी था और स्टेडियम के अंदर मौजूद लोगों में भी. सभी नेताओं ने जनता से अपील की कि वो ये संकल्प लें कि देश का सांप्रदायिक सद्भाव नहीं बिगड़ने देंगे.

लेकिन वहाँ बैठे सभी लोगों को ये भी अंदाज़ा था कि सम्मलेन का असल मक़सद था तीसरे मोर्चे की सम्भावना को परखना, जैसा कि ट्रिब्यून अख़बार के एक वरिष्ट पत्रकार के वी प्रसाद ने मुझे बताया, "ये नेता तीसरा मोर्चा बनाने के लिए थाह ले रहे हैं."

नीतीश कुमार और मुलायम सिंह यादव ने तीसरे मोर्चे की बात खारिज कर दी, लेकिन 2014 के आम चुनाव के बाद मोर्चे की सम्भावना को किसी नेता ने ख़ारिज नहीं किया.

मोदी फैक्टर

मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार को बाहर से समर्थन देती है और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी इस सरकार में कांग्रेस की भागीदार है.

मंच पर मौजूद अधिकतर पार्टियां कांग्रेस विरोधी थीं, लेकिन वो बीजेपी के विरोध के लिए भी जानी जाती हैं.

Image caption सम्मेलन स्थल से जाते हुए मुलायम सिंह यादव.

वहाँ मौजूद कुछ लोगों ने मुझसे बातें करते हुए ये स्वीकार किया कि अगले साल के चुनाव में बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की बढ़ती हुई लोकप्रियता के मद्देनज़र भी ये नेता एक मंच पर बैठने के लिए तैयार हुए हैं.

के वी प्रसाद ने कहा कि मोदी कि बढ़ती हुई ताक़त को रोकना इन नेताओं का ख़ास उद्देश्य है. मोदी एक बड़े नेता के रूप में उभरे हैं जिसके कारण इन पार्टियों में थोड़ी खलबली मची है. उनका कहना था "उन्हें एक साथ जोड़ने के लिए एक गोंद चाहिए और मोदी उनके लिए गोंद काम कर रहे हैं."

वाम दलों के करीब मानी जाने वाली तेलुगुदेशम पार्टी के चंद्रबाबू नायडू की इस सम्मेलन में अनुपस्थिति उल्लेखनीय है.

टीडीपी नेता चंद्र बाबू नायडू के बारे में कहा जाता है कि वो इन दिनों भाजपा के क़रीब होते जा रहे हैं. वह आंध्र प्रदेश में अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस, को एक बड़ी समस्या के रूप में देखते हैं.

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