अजीत जोगी: कूटनीति की सियासत, विवादों का व्यक्तित्व

अजीत जोगी

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के बड़े नेता अजीत जोगी दस साल से सत्ता से बाहर हैं. इन दस सालों से उन्होंने अपना ज़्यादातर समय व्हीलचेयर पर बिताया है. जब वो चुनाव प्रचार के लिए निकलते हैं, तो उनके डॉक्टरों के साथ-साथ उनके राजनीतिक विरोधियों की जान सांसत में आ जाती है.

उनकी जनसभाओं में भारी भीड़ उमड़ती है, पर उनकी सभाओं की भीड़ देखकर जितने परेशान भारतीय जनता पार्टी वाले होते हैं, उतने ही परेशान उनकी अपनी पार्टी के लोग रहते हैं.

अजीत जोगी से उनके साथी राजनेता सशंकित नहीं रहते, डरते हैं. प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बाकी नेता उनसे ईर्ष्या नहीं, घृणा सी करते हैं.

देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों में एक भोपाल के मौलाना आज़ाद कॉलेज ऑफ़ टेक्नोलॉजी से जोगी मेकेनिकल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडेलिस्ट हैं. वो आईपीएस भी रहे और आईएएस भी.

अर्जुन सिंह के शिष्य

अर्जुन सिंह के सुझाव पर राजनीति में 1980 के दशक में राजीव गांधी के उतारे हुए अजीत जोगी यूं तो राजनीति में काफ़ी पुराने हो गए हैं, लेकिन जब भी उन पर हमला होता है, उनके बचाव के लिए उनके बेटे अमित ऐश्वर्य और पत्नी रेणु के अलावा कोई साथ खड़ा नहीं दिखता.

इसके बावजूद अजीत जोगी बने हुए हैं. अजीत जोगी के लिए बाक़ी नेताओं के इस तरह के भाव का कारण यह नहीं कि वह बड़े जनाधार वाले नेता हैं. दरअसल जोगी अपनी बारी आने पर किसी को बख़्शते नहीं.

Image caption अजीत जोगी राजनीति के पक्के खिलाड़ी माने जाते हैं

रायपुर में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार रुचिर गर्ग कहते हैं "जोगी समझौता करने वाले नेता नहीं हैं. एक तो वह समझौता करते नहीं और अगर करते हैं, तो वे केवल वक़्ती ज़रूरत के लिए होता है. बाद में जिसने उन्हें समझौता करने के लिए मजबूर किया है, वो उसके साथ हिसाब बराबर करके ही दम लेते हैं."

जोगी किसी से भी कभी भी लड़ने-भिड़ने को तैयार रहते हैं. कांग्रेस में गांधी परिवार के सिवा कोई उनके तीरों से अछूता नहीं रहा है. जोगी उन दिनों के क़िस्से ख़ूब सुनाते हैं, जब वे सोनिया गांधी के भाषण लिखा करते थे.

आलाकमान की तरफ़ से उनके ऊपर कोई भी गाज गिरे, अजीत जोगी हमेशा नतमस्तक दिखे, ठीक राजनीति में अपने गुरु रहे अर्जुन सिंह की तरह.

दिग्विजय से नहीं पटी

दिग्विजय सिंह ऐसे ही एक नेता हैं. 2000 में जब छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग हुआ, तो मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह विधायकों से रायशुमारी के लिए पहुंचे. विद्याचरण शुक्ला मुख्यमंत्री बनना चाहते थे और विधायकों में उनका ख़ासा समर्थन भी था.

कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर रायपुर पहुंचे दिग्विजय सिंह ने अलग-अलग विधायकों से बात की. बाद में घोषणा कर दी गई कि अजीत जोगी बहुमत की पसंद हैं. शुक्ला नाराज़ हुए. दिग्विजय सिंह उन्हें मनाने के लिए शुक्ला के घर गए. थोड़ी देर बाद बाहर निकले तो उनका कुर्ता फटा हुआ था और कपड़ों पर धूल थी.

Image caption रमन सिंह पिछले दस साल से छत्तीसगढ़ की सत्ता में जमे हैं

बावजूद इसके जोगी और दिग्विजय सिंह की कभी नहीं पटी. इस साल मई में जब कांग्रेस के कई कद्दावर नेता छत्तीसगढ़ में माओवादी हमले में मारे गए, तो इसके बाद एक सभा में दिग्विजय सिंह की मौजूदगी में जोगी ने सरेआम कहा "कोई यह न सोचे कि छत्तीसगढ़ के नेता ख़त्म हो गए. यहाँ बाहरी नेतृत्व के ज़रूरत नहीं है."

मई में दरभा घाटी के हमले में बचने वाले कुछ भाग्यशाली नेताओं में अजीत जोगी अकेले हैं. घटना के बाद फ़ौरन ऐसी अफवाहें चलने लगीं कि अजीत जोगी इस हत्याकांड के पीछे हैं.

अजीत जोगी इन आरोपों के कारण दो भाजपा नेताओं के खिलाफ मानहानि का मुक़दमा ठोक चुके हैं लेकिन अफवाहें बंद नहीं हो रहीं और इस तरह की बातें 'ऑफ़ द रिकॉर्ड' कहीं न कहीं उनकी अपनी पार्टी के नेता भी कहते हैं.

अजीत जोगी के लिए सबसे बड़ी परेशानी ही शायद यह है कि उनके बारे में कोई भी आरोप लगते ही एक बड़ा तबक़ा कहने लगता है कि जोगी कुछ भी करने में सक्षम हैं.

खींचतान

जितने विवादित अजीत जोगी हैं, उतने ही विवादित उनके बेटे अमित ऐश्वर्य जोगी भी हैं. इस बार भी टिकट बाँटने के पहले कांग्रेस के अंदर ख़ूब उठापटक हुई. फिर चर्चा चली कि अजीत जोगी खेमा पार्टी छोड़ने को तैयार है.

टिकट की लिस्ट खुली, तो अजीत जोगी का नाम कांग्रेस की लिस्ट से बाहर था, लेकिन पार्टी ने उनके बेटे और उनकी पत्नी, दोनों को टिकट दे दिया था.

अमित जोगी जो कि एक हत्याकांड में अभियुक्त हैं, वो कांग्रेस के उम्मीदवार हैं.

हालाँकि अजीत जोगी चुनाव नहीं लड़ रहे हैं और विवादों के चलते उनकी पार्टी के चुनाव जीत जाने के बाद भी उनके मुख्यमंत्री बनने की संभावना कम दिखती है, बावजूद इसके वह छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सबसे बड़े नेता हैं.

राज्य में भाजपा को अपनी तीसरी बार जीत के लिए जितना भरोसा अपने नेता रमन सिंह पर है, उतना ही भरोसा अजीत जोगी और उनके चलते कांग्रेस में होने वाली खींचतान पर भी है.

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