आम आदमी अब तक नहीं बना: योगेंद्र यादव

  • 29 नवंबर 2013
आम आदमी पार्टी सदस्य योगेंद्र यादव

दिल्ली के एक हॉल में आम आदमी पार्टी के विधानसभा चुनाव के दावेदार उम्मीदवारों की बैठक चल रही थी.

आम आदमी पार्टी पहली बार चुनाव लड़ रही है. इस कारण वहाँ काफी उत्साह था. उम्मीदवारों के अलावा पार्टी के कई कार्यकर्ता वहाँ थे. सभी ने पार्टी की ट्रेडमार्क वाली टोपी पहनी थी, पर एक व्यक्ति ने नहीं.

हमने पूछा तो उनका कहना था, "मैं आम आदमी बनने की कोशिश कर रहा हूँ. अब तक बन नहीं सका हूँ."

यह ख़ास आदमी हैं पार्टी के एक प्रमुख सदस्य योगेंद्र यादव. जाने-माने चुनाव विश्लेषक की हैसियत से वह पहले दूसरी पार्टियों की हार-जीत पर भविष्वाणी करते थे, आज ख़ुद अपनी पार्टी की जीत की बात कर रहे हैं.

सर्वे और चुनाव

आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव की दौड़ में पहले नंबर पर होने का दावा कर रही है. इस दावे के पीछे वह ताज़ा सर्वेक्षण है, जिसे योगेंद्र यादव के नेतृत्व में कराया गया है और जिसका पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल अपने भाषण और विज्ञापन में भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं.

चुनाव सर्वेक्षण योगेंद्र यादव का बरसों से पेशा रहा है. चुनाव विश्लेषक से राजनेता तक का उनका यह सफ़र उनके करियर में बड़ा परिवर्तन है. मगर यह आश्चर्य की बात नहीं. आख़िर चुनावी विश्लेषण से राजनीति का चोली-दामन का साथ है.

अब वह पेशेवर चुनाव विश्लेषक नहीं रहे. तो उन्होंने अब सर्वेक्षण क्यों कराया और क्या पार्टी के फ़ायदे के लिए सर्वेक्षण का इस्तेमाल नैतिकता के खिलाफ नहीं?

इस पर योगेंद्र यादव कहते हैं, "इसमें कोई शक नहीं है कि हमारी पार्टी इस सर्वे का प्रचार कर रही है. यह कम से कम देश की पहली पार्टी है, जो ईमानदारी से कह रही है ये हमारा सर्वेक्षण है, हमने पैसा दिया है."

उनका कहना है कि दूसरी पार्टियों को भी अपना सर्वेक्षण कराना चाहिए. लेकिन इस सर्वेक्षण को सार्वजनिक कराने के पीछे क्या उद्देश्य था?

वे कहते हैं, "शुरू में सर्वेक्षण को सार्वजनिक कराने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन जब हमने देखा कि टीवी चैनलों पर ऐसे सर्वेक्षण पेश किए जा रहे हैं, जो वास्तव में ग़लत हैं, तो हमारे पास दो ही विकल्प थे. या तो हम झूठ के सामने झूठ खड़ा कर देते या झूठ के सामने सच खड़ा करते."

'वोट कटवा'

योगेंद्र बताते हैं, "हमने एक राजनीतिक निर्णय लिया कि हम अपने सर्वे को सार्वजनिक करेंगे और देखिए न, इससे कितना फ़र्क पड़ गया. वही कंपनियां जो डेढ़ महीने पहले दूसरे आँकड़े दिखा रही थीं, एक महीने बाद उनके आंकड़े कैसे बदल गए?"

योगेंद्र यादव बताते हैं कि दूसरे सर्वेक्षण भी उनकी पार्टी को 25 प्रतिशत वोट से कम हासिल करने की भविष्वाणी नहीं कर रहे हैं.

योगेंद्र कहते हैं, "हमें वोट कटवा कहा जाता था कि हम दूसरी पार्टियों के वोट काटेंगे, लेकिन यह बात अब पांच-छह महीने पुरानी हो चुकी है."

योगेंद्र यादव के एक महीने पुराने सर्वेक्षण के अनुसार आम आदमी पार्टी को दिल्ली विधानसभा चुनाव में बहुमत से थोड़ी कम सीटें मिलेंगी.

पार्टी सत्ता में आए, चाहे न आए, योगेंद्र यादव कहते हैं कि वे 'खेल के नियम' बदलने में पहले ही कामयाब हो चुके हैं.

योगेंद्र कहते हैं, "आज से एक साल पहले रॉबर्ट वाड्रा (कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद) का नाम लेने में मीडिया वाले डरते थे, राजनेता भी डरते थे. जिस तरह के घोटाले देश में हो रहे थे, उसकी चर्चा नहीं होती थी."

उनके अनुसार "एक चुप्पी की अदृश्य दीवार टूटी है और मेरे लिए कम से कम यह किसी भी चुनावी सफलता से ज़्यादा अहम है. देश की राजनीतिक संस्कृति में जो बदलाव आया है, वह यह है. इसमें हमारी विजय है."

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