नवी मुंबई हवाई अड्डा बनने का रास्ता साफ़

Image caption दस साल से लंबित थी ये परियोजना

नवी मुंबई में बनने वाले बहुचर्चित और बहुप्रतीक्षित अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रास्ते का आख़िरी रोड़ा हट गया है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने परियोजना का विरोध करने वाले संगठनों के प्रतिनिधिमंडल से मिलकर मामले पर चर्चा की और उनके लिए नए पैकेज की घोषणा की, जिसे प्रतिनिधिमंडल ने स्वीकार कर लिया है.

नए पैकेज के मुताबिक़ अब परियोजना का विरोध करने वालों को उनके 317 हेक्टेअर अधिग्रहीत की जाने वाली ज़मीन के बदले 22.5 फ़ीसदी विकसित ज़मीन मिलेगी.

इसके साथ ही सरकार ने यह भी साफ़ कर दिया है कि ज़मीन अधिग्रहण के बदले में नग़द मुआवज़ा नहीं दिया जाएगा.

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य आर सी घरत ने बताया, “बैठक में मुख्यमंत्री ने हमें आश्वासन दिया है कि अधिग्रहीत ज़मीन की क़ीमत की तीन गुना ज़मीन दी जाएगी और 22.5 फ़ीसदी ज़मीन पर कुल दो एफ़एसआई दिए जाएंगे."

पैकेज

इस परियोजना के लिए 10 गांवों में 317 हेक्टेअर ज़मीन अधिग्रहीत की जाएगी जिसमें 3500 घर हैं. प्रतिनिधिमंडल ने इस नए पैकेज से सहमति जताई और कहा कि अब वे इसका विरोध नहीं करेंगे.

इस हवाई अड्डा परियोजना का ठेका जिस कंपनी को दिया जाएगा, मुआवज़े का ख़र्च भी वही उठाएगी.

क़ानूनी और पर्यावरणीय बाधाओं के चलते नवी मुंबई अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना पिछले 10 सालों से रुकी हुई थी.

बम्बई उच्च न्यायालय ने पिछले हफ़्ते हवाई अड्डे के लिए 108 हेक्टेअर इलाक़े के मेंग्रोव पेड़ काटने की अनुमति दी थी. अब परियोजना का विरोध करने वालों से समझौते बाद आगे की कार्यवाई शुरु की जाएगी.

इस हवाई अड्डे से हर साल लगभग 10 करोड़ यात्रियों को सुविधा मिलेगी और यह देश के सबसे बड़े ग्रीन फ़ील्ड हवाई अड्डों में से एक होगा.

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