माया कोडनानी को सशर्त ज़मानत

माया कोडनानी

गुजरात उच्च न्यायालय ने नरोदा पटिया दंगा मामले में दोषी ठहराई गई गुजरात सरकार की पूर्व मंत्री माया कोडनानी को स्वास्थ्य कारणों से तीन महीने की अस्थायी ज़मानत दे दी है.

जस्टिस के एस झावेरी और के जे ठाकेर की एक खंडपीठ ने कोडनानी की छह महीने की ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए उनकी तीन महीने की ज़मानत मंज़ूर कर ली.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार कोडनानी के वकील हार्दिक देव ने कोर्ट में कहा कि कोडनानी आंतों की टीबी, दिल की बीमारी और अवसाद से ग्रस्त हैं.

उन्होंने इन बीमारियों के इलाज के लिए छह महीने की ज़मानत की दरख़्वास्त की थी और अदालत के समक्ष मेडिकल डॉक्यूमेंट्स भी पेश किए थे.

मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने ज़मानत अर्ज़ी का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें जेल मैनुअल के आधार पर इलाज उपलब्ध करवाया जा सकता है.

'दंगों की सरगना'

दस्तावेज़ों का अध्ययन करने और दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कोडनानी को तीन महीने की सशर्त ज़मानत दे दी.

अदालत ने कोडनानी से कहा कि वह इलाज के लिए गुजरात से बाहर जाने की जानकारी एसआईटी को उपलब्ध करवाएं.

पिछले साल 31 अगस्त को गुजरात की एक विशेष अदालत ने राज्य की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल नेता बाबू बजरंगी समेत 31 लोगों को नरोदा पटिया नरसंहार का दोषी करार दिया था.

कोर्ट ने तत्कालीन विधायक और मोदी सरकार की पूर्व मंत्री कोडनानी को “नरोदा इलाके में दंगों की सरगना” क़रार दिया था और 26 साल क़ैद की सज़ा सुनाई थी.

नरोदा पटिया दंगों के समय कोडनानी विधायक थीं और 2007 में नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें महिला और बाल विकास मंत्री बनाया गया था.

मार्च 2009 में गिरफ़्तारी के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

तीन बार विधायक रहीं कोडनानी गोधरा के बाद हुए दंगों में गिरफ़्तार होने वाली पहली महिला हैं.

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