भारत-पाक डीजीएमओज की जल्द होगी मुलाकातः सरताज अजीज

सरताज अजीज

पिछले तीन चार महीनों में भारत-पाक नियंत्रण रेखा के उल्लंघन की घटनाएं बार-बार सुर्खियां बनीं. यही नहीं नवाज शरीफ के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान के साथ शांति बहाल होने की जो उम्मीदें जगी वहां भी भारत को निराशा ही हाथ लगी.

इन हालातों में पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज जब भारत दौरे पर आए तो बीबीसी ने भारत-पाक संबंधों और कई अन्य मुद्दों पर उनसे पाकिस्तान के ताजे रुख को जानने की कोशिश की.

मौजूदा हालात में हुर्रियत नेताओं से मुलाकात क्यों जरूरी थी?

पिछले 15 सालों में पाकिस्तान से जितने भी विदेश मंत्री भारत आए उन सबने उनसे मुलाकात की है. अभी ये खबर सुर्खियां इसलिए बन रही है क्योंकि भारत में चुनावी राजनीति का माहौल गर्म है.

मौजूदा हालात में दोनों देशों के आपसी ताल्लुकात तनावपूर्ण हैं.

कश्मीर मसले पर अगर हमें आगे कोई भी बातचीत करनी है तो उसके लिए कश्मीरी नेताओं की राय जाननी जरूरी है. आख़िरकार वे स्थानीय नेता हैं.

सलमान खुर्शीद और प्रधानमंत्री के साथ बातचीत कैसी रही?

बातचीत सकारात्मक रही. वैसे अहम बातचीत तो न्यूयार्क में दोनों प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के दौरान हुई थी.

हमारी इस मीटिंग में हम सहमत हुए कि साल 2003 में हुए नियंत्रण रेखा से जुड़े समझौते को दोनों देश वाकई में लागू करना चाहते हैं. हमने इस बात पर भी चर्चा की कि दस साल से एलओसी पर अमन रहने के बाद अब अचानक तनाव क्यों शुरू हो गया.

बातचीत में हम इस बात पर सहमत हुए कि न केवल दोनों डीजीएमओ मिलें, बल्कि दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी बकायदा हर छह महीने पर मिले.

इसके अलावा जो काम पहले चल रहा था जैसे कि व्यापार और बिजली खरीद आदि से जुड़ी तकनीकी बातचीत, उन सब मुद्दों पर संवाद जारी रहे, यह बात भी हुई.

भारत-पाक के डीजीएमओज की मुलाकात में क्या रुकावटें हैं?

वे टेलीफोन पर बात करते हैं, और काफी विस्तार से बात करते हैं. इसलिए उन्होंने ये समझा होगा कि शायद मुलाकात की अब कोई जरूरत नहीं.

हम अपने लोगों से जब पूछते हैं तो वे कहते हैं कि भारत ने कोई तारीख़ तय नहीं की है अब तक. और भारत कहता है कि पाकिस्तान ने तारीख़ नहीं दी.

तो हमने ये तय किया है कि अगले मंगलवार को जब उनकी बातचीत होगी तो वे मिलने की जगह और तारीख़ तय करेंगे. तो अगले दो-तीन हफ़्ते में शायद ये मुलाकात संभव हो सकेगी.

क्या भारत-पाक संबंधों के सुधरने की उम्मीद बाकी है?

जब नवाज़ शरीफ़ सत्ता में आए तो ये उम्मीद जगी थी कि भारत-पाक के संबंध सुधर जाएंगे. ये उम्मीद अभी ख़त्म नहीं हुई है. प्रतिबद्धता तो दोनों तरफ से है. दोनों देश के लोग शांति चाहते हैं.

मनमोहन सिंह जी ने कहा कि दोनों मुल्क अपना विकास और आर्थिक ताकत तब तक हासिल नहीं कर सकते जब तक शांति बहाल नहीं हो जाती .

इसलिए ज़रूरी है कि रुकावटों के आने के बावजूद हम अपनी प्रतिबद्धता जारी रखें.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मुताबिक बुनियादी हालातों में अगर अड़चनें ना आएं तो शांति प्रक्रिया काफी तेज़ी से आगे बढ़ सकती है.

नियंत्रण रेखा पर तनाव को रोकने में सफलता क्यों नहीं मिल रही?

पाकिस्तान कहता है कि भारत की ओर से संघर्षविराम का उल्लंघन ज्यादा हो रहा है. और भारत पाकिस्तान पर आरोप लगाता है.

इस पर हमने न्यूयार्क में भी बात की थी और अभी भी बात की है कि ये पता लगाना होगा कि ये उल्लंघन कौन शुरू करता है और वहां क्या होता है.

हमने कहा था कि कोई स्वतंत्र व्यवस्था होनी चाहिए. हमने ये सुझाव दिया था कि संयुक्त राष्ट्र का निगरानी समूह ये काम करे.

Image caption नवाज शरीफ के सत्ता में आने से उम्मीद जगी थी कि भारत-पाक संबंधों में सुधार आएगा.

भारत इसे स्वीकार वैसे ना करे लेकिन घटनाओं पर रिपोर्ट मंगवाने में मुझे कोई हर्ज नहीं दिखता.

दोनों देशों में अमन के खिलाफ कुछ लोग हैं जो नहीं चाहते कि हमारे बीच ताल्लुकात बेहतर हों. उनके लिए हो हल्ला करना कोई मुश्किल नहीं.

मुंबई हमलों से जुड़े अभियुक्तों को सज़ा में क्यों देरी हो रही है?

मुंबई हमले को अब पांच साल होने वाले हैं. भारत को हमेशा ये शिकायत रही है कि अभियुक्तों को सज़ा दिलवाने में पाकिस्तान अब तक संजीदा नहीं रहा है. मगर अब इस केस की सुनवाई में तेज़ी आ चुकी है.

सितंबर में हमारा मिशन सबूत लेकर आया. साथ ही हमने नया जज और नया वकील मुक़र्रर किया.

अब सुनवाई अंतिम दौर में है. तो अब इसका फैसला जल्दी ही हो जाएगा.

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