जब सचिन को मिली मोनालिसा की मुस्कुराहट

गुरुवार को बीसीसीआई ने मास्टर ब्लॉस्टर सचिन तेंदुलकर को विदाई के तौर पर उनके 200वें टेस्ट मैच से पहले एक पोट्रेट भेंट किया.

इस पोट्रेट को वडोदरा के जाने-माने पेंटर मूसा कच्ची ने बनाया है.

कच्ची बताते हैं कि जब बीसीसीआई ने उन्हें इस पोट्रेट के बारे में संपर्क किया तो वे काफ़ी खुश हुए और ख़ुद को क़िस्मतवाला समझा लेकिन जब उन्हें बताया गया कि उन्हें ये पोट्रेट छह दिन में बनाना है तो उनके पसीने छूट गए.

बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह ने पेंटर मूसा कच्ची से बात की और जाना कि ये उनके लिए कितना चुनौतीपूर्ण काम था.

जब बीसीसीआई ने आपसे सचिन तेंदुलकर को तोहफ़े में दी जानी वाली पेंटिंग के बारे में संपर्क साधा तो आपके दिमाग़ में सबसे पहले क्या आया?

बीसीसीआई के सचिव संजय पटेल जब मेरे घर आए और कहा कि आपको छह दिन में तेंदुलकर का पोट्रेट बनाना होगा तो मेरा सबसे पहला जवाब यही था कि बड़े कैनवस पर इतने कम समय में पोट्रेट बनना- इट इज़ नॉट पॉसिबल. इस पर बीसीसीआई के अधिकारियों ने कहा, ''वडोदरा शहर कला का बड़ा केंद्र है और ये वडो़दरा की नाक का सवाल है. इसलिए आप कोशिश कीजिए.''

उसके बावजुद मैंने कहा कि ये पॉसिबल नहीं है. लेकिन फिर मैंने रात-दिन मेहनत की. मेरे परिवार के चारों सदस्यों ने मेरी मदद की. मैं तस्वीर के एक भाग को बनाता तो मेरा परिवार उसे हेयर ड्रेसर से सुखाता था फिर मैं दूसरे को पेंट करता था. इतनी मेहनत करने के बाद ही ये पेंटिंग ख़त्म हो पाई.

क्या-क्या चुनौतियां पेश आई?

अब मुझे सचिन की तस्वीर बनानी थी तो मैंने सचिन की वेबसाइट ढूंढी. बीसीसीआई के लोगों ने भी मुझे दो-तीन फ़ोटो दी थी. लेकिन पेंटिंग बनाने के लिए वो काफ़ी नहीं थी. मैंने सचिन की कई तस्वीरें देखी. बीसीसीआई की तरफ़ से मुझे जो तस्वीरें दी गई उनमें सचिन के चेहरे पर गौरव तो दिखाई देता था लेकिन वे काफ़ी गंभीर प्रतीत होती थी जो पोट्रेट के लायक़ तो बिल्कुल नहीं थे. बीसीसीआई के लोगों का कहना था आप कोलकाता चलिए, वहां तस्वीरों का अध्ययन कीजिए और फिर पेंटिंग कीजिए. मैंने कहा मेरा पास इतना समय नहीं है. मैंने वडोदरा में सचिन जैसे चेहरे वाले मॉडल देखे और उनके पोट्रेट को सही रंग में ढालने के लिए इन मॉडल की कलर स्कीम देखी. मैंने ये जाना कि सचिन का रंग यूरोपीय कलर स्कीम का है. मैंने ये समझा और उसके बाद मैंने पोट्रेट पेंट किया.

जब आप सचिन का पोट्रेट बना रहे थे तो आपने उनके चेहरे के किस भाव को सामने लाने की कोशिश की?

सचिन का चेहरा बेहद प्रभावी है. उनकी आंखे शेर जैसी है. ऐसे में मेरे लिए काफ़ी मुशिकल हो रहा था. मेरे लिए मुश्किल यही समाप्त नहीं हो रही थी क्योंकि मेरे पास सचिन की जो भी तस्वीरें थी उनमें वे काफ़ी गंभीर दिख रहे थे जो भाव पोट्रेट के लिए मुझे मुनासिब नहीं लगा. मैंने कई पोट्रेट बनाए हैं. अपने अनुभवों को याद करके मैंने मोनालिसा का स्माइल याद की. मैंने सचिन के लिए सही रंगों का चुनाव करने के बाद उनके चेहरे पर मोनालिसा की स्माइल लगा दी. उनके घुंघराले बालों को बनाना और उनकी टी शर्ट में फ़ोल्ड को दिखाने के लिए भी मुझे कड़ी मेहनत करनी पड़ी.

लेकिन क्या कहीं डर था कि अगर सचिन को पसंद नहीं आई तो?

सचिन को मेरा बनाया गया पोट्रेट मेरे सामने ही दिया गया. उसके बाद वानखेड़े स्टेडियम में अंदर जाकर सचिन से मैंने कहा कि आपकी फ़ोटो बनाना मेरे लिए चुनौतीपूर्ण था. मेरे पास समय कम था लेकिन यहां सवाल वडोदरा और बीसीसीआई की इज्ज़त का था तो मैंने परमात्मा से प्रार्थना की ये किसी की इज़्ज़त का सवाल है. परमात्मा से मैंने कहा कि वो मेरा साथ दे. ये सब सुनने के बाद सचिन काफ़ी खुश हुए और कहा कि मैं आपका अभिनंदन करता हूं चाहे कोई और करें या न करें.

लेकिन जब आपके सामने पेंटिंग सचिन को दी गई क्या आप उससे संतुष्ट थे?

मैं एक कलाकार के तौर पर संतुष्ट नहीं था क्योंकि मुझे समय सीमा में बांध दिया गया लेकिन समय की मजबूरी थी और यही बात मैंने सचिन को भी कही.

तो वडोदरा की नाक बची या नहीं?

काम तो मैंने ज़ोरदार किया. सचिन के साथ-साथ सभी लोग ख़ुश हैं, तो वडो़दरा की नाक तो बच गई...(मुस्कराते हुए)

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