छत्तीसगढ़ कांग्रेसः कौन बनेगा मुख्यमंत्री?

अमित जोगी

छत्तीसगढ़ में अगर कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में जीत मिलती है, तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा?

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष चरणदास महंत से अगर आप यह सवाल पूछें तो उनका जवाब होता है, “अभी से मुख्यमंत्री कैसे तय किया जा सकता है? यह तो चुनाव के बाद विधायक दल और केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से तय होगा.”

लेकिन भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री रमन सिंह तक छत्तीसगढ़ में अपनी सभाओं में बार-बार दुहरा रहे हैं कि अगर कांग्रेस की सरकार आई, तो अजीत जोगी को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा.

लेकिन अजीत जोगी इस सवाल के जवाब में मुस्कराकर कहते हैं, “मैंने पहले ही कह दिया है कि मैं मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हूं. मैं तो चुनाव भी नहीं लड़ रहा हूं, फिर मैं मुख्यमंत्री कैसे बनूंगा?”

लेकिन राजधानी रायपुर से लगभग 250 किलोमीटर दूर गौरेला-पेंड्रा और कोटा के इलाके में इस सवाल का जवाब आपको मिल सकता है.

'सबको दावेदारी का हक़'

अपने जीवन में पहली बार अपने पिता की मरवाही सीट से चुनाव लड़ रहे अमित जोगी बीबीसी के सवाल पर कहते हैं, “यह हास्यास्पद है कि मेरा नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सामने लाया जाए.”

तो क्या उनकी माँ डॉक्टर रेणु जोगी मुख्यमंत्री बनेंगी, इस पर अमित जोगी मुस्कराते हुए कहते हैं, “यह सवाल आप माँ से ही पूछिए.”

ज़ाहिर है, रेणु जोगी मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर सीधे इनकार नहीं करतीं. उनकी सभाओं में संचालक और दूसरे वक्ता शुरू से लेकर आख़िर तक कई बार यह दुहराते हैं कि आप विधायक नहीं, मुख्यमंत्री चुनने वाले हैं और यह भी कि राज्य का तीसरा मुख्यमंत्री एक बार फिर इसी इलाक़े से चुना जाने वाला है.

डॉक्टर रेणु जोगी कहती हैं, “मेरे कार्यकर्ताओं की भावनाएं हैं कि मैं मुख्यमंत्री बनूं. इससे अधिक मैं क्या बोल सकती हूं?”

हालांकि नेता प्रतिपक्ष रवींद्र चौबे मुख्यमंत्री पद के लिए रेणु जोगी के नाम पर कोई टिप्पणी नहीं करते. वे कहते हैं कि 'भाजपा अगर हमसे मुख्यमंत्री का नाम पूछ रही है, तो इसका मतलब है कि उसने हार स्वीकार कर ली है.'

चौबे कहते हैं, “हरेक व्यक्ति को दावेदारी हक़ है, लेकिन होगा वही जो कांग्रेस का विधायक दल तय करेगा और केंद्रीय नेतृत्व चाहेगा.”

जोगीलैंड

छत्तीसगढ़ में मरवाही और कोटा को जोगीलैंड कहा जाता है. जोगीलैंड यानी पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का इलाक़ा, जहां जोगीसार गांव में जोगी का पैतृक घर है.

छत्तीसगढ़ विधानसभा की कोटा और मरवाही सीटें आसपास हैं. सड़क के एक तरफ मरवाही तो दूसरी ओर कोटा और कहीं-कहीं गांव भी इन दोनों सीटों में बंटे हुए हैं.

इस बार मरवाही से अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी चुनाव लड़ रहे हैं तो कोटा से उनकी पत्नी डॉक्टर रेणु जोगी.

छत्तीसगढ़ बनने के बाद रायपुर मेडिकल कॉलेज में नेत्र विशेषज्ञ और असिस्टेंट प्रोफ़ेसर की सरकारी नौकरी छोड़कर साल 2006 में पहली बार उपचुनाव लड़ने वाली 61 साल की रेणु जोगी तीसरी बार सामान्य सीट कोटा से चुनाव लड़ रही हैं.

कोटा परंपरागत रूप से कांग्रेस की सीट रही है. 1952 से आज तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्ज़ा रहा है. 1952 से 62 तक कांशीराम तिवारी यहां के विधायक रहे तो एक बार लाल चंद्रशेखर सिंह विधायक बने. 1967 से 1980 तक चार बार यहां से मथुरा प्रसाद दुबे ने कांग्रेस विधायक के तौर पर चुनाव जीता.

राजेंद्र प्रसाद शुक्ल 1985 से 2003 तक पांच बार यहां से चुनकर विधायक, मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष बने. उनके निधन के बाद साल 2006 में हुए उपचुनाव में रेणु जोगी ने यहां से चुनाव लड़ा और विधानसभा पहुँचीं.

2006 के उपचुनाव में रेणु जोगी ने भाजपा के भूपेंद्र सिंह को 23,470 वोटों से पराजित किया था. वहीं 2008 के चुनाव में कोटा सीट से 18 उम्मीदवार खड़े हुए थे, लेकिन 16 की ज़मानत ज़ब्त हो गई थी. 17वें उम्मीदवार भाजपा के मूलचंद खंडेलवाल 9811 वोटों से हार गए थे.

रेणु जोगी का आरोप है कि राज्य सरकार ने उन्हें विकास कार्यों के लिए सबसे कम पैसे उपलब्ध कराए, लेकिन उनका दावा है कि अब कांग्रेस की सरकार बनेगी तो वो कोटा का कायापलट कर देंगी.

लेकिन भाजपा प्रत्याशी काशी साहू ऐसी किसी संभावना से ही इनकार करते हैं. काशी साहू का कहना है कि इस बार कोटा से इतिहास दर्ज होगा.

उनका आरोप है कि रेणु जोगी ने विकास का कोई काम नहीं किया है. वो कहते हैं, “जोगी का जादू ख़त्म हो चुका है.”

हालांकि स्थानीय पत्रकार अखिलेश नामदेव इससे सहमत नहीं हैं.

Image caption अजीत जोगी का कहना है कि वह मुख्यमंत्री पद की होड़ में नहीं हैं.

अखिलेश कहते हैं, “कोटा विधानसभा में चार नगर पंचायत हैं और भाजपा ने इन 13 सालों में एक भी ऐसा नेता नहीं तैयार किया, जो समान रूप से सभी नगर पंचायतों में स्वीकार्य हो. नगर पंचायत चुनाव हार चुके काशी साहू को भी कोटा पंचायत के अलावा कहीं भी भाजपाई भाव नहीं दे रहे हैं. ऐसे में जोगी के इस इलाक़े में रेणु जोगी के हारने की बात भाजपा के लिए.”

जोगी का दबदबा

कांग्रेस उम्मीदवारों के टिकट का जब ऐलान हुआ तो सबसे अधिक चौंकाने वाला नाम मरवाही सीट से पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी का था.

36 साल के अमित जोगी पहली बार चार जून 2003 को एनसीपी के कोषाध्यक्ष रामअवतार जग्गी की हत्या के बाद चर्चा में आए थे. उस समय अजीत जोगी और अमित जोगी समेत 30 से अधिक लोगों को इस मामले में अभियुक्त बनाया गया था.

जून 2005 में अमित जोगी को इस मामले में गिरफ़्तार किया गया था और वो लगभग 10 महीने तक जेल में रहे थे.

हालांकि 31 मई 2007 को उन्हें स्थानीय अदालत ने इस मामले में बरी कर दिया लेकिन इसके ख़िलाफ़ सीबीआई ने ऊपरी अदालत में अपील की. मृतक रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने भी इस मामले में अमित जोगी को सज़ा सुनाने की मांग की है.

जनवरी 2003 में ही अमित जोगी का नाम तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री दिलीप सिंह जूदेव को लेकर हुए स्टिंग ऑपरेशन में भी सामने आया था.

इन तमाम आरोपों के बाद आदिवासी के लिए सुरक्षित मरवाही विधानसभा से अमित जोगी का नाम कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लोगों को चौंका गया. राज्य बनने के बाद मरवाही से अजीत जोगी चुनाव जीतते रहे हैं. ऐसे में माना जा रहा था कि इस सीट से वो अपने किसी विश्वस्त को चुनाव लड़ाएंगे.

नागरिकता पर सवाल

साल 1977 में अमरीका में पैदा हुए अमित जोगी ने जब नामांकन भरा तो ज़ाहिर है, पिता अजीत जोगी की तरह उनकी जाति को लेकर भी सवाल हुए और नागरिकता को लेकर भी.

भाजपा प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव का दावा है कि अमित जोगी ने भारतीय नागरिकता पाने के लिए 15 दिसंबर 2001 के आवेदन पत्र में हलफ़नामे के ज़रिए जानकारी दी थी कि उनका जन्म सात अगस्त 1977 को अमरीका के टेक्सस में हुआ था.

वहीं अमित ने 26 अगस्त 2002, को जब उनके पिता अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे, तब डॉमिसाइल सर्टिफिकेट के लिए दिए गए आवेदन में अपना जन्म स्थान बिलासपुर और जन्मतिथि सात अगस्त 1978 बताई है.

संजय कहते हैं, “हम इस मामले को अदालत में ले जाएंगे.”

सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक और रायपुर के रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से एलएलबी करने वाले अमित जोगी इन आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहते हैं कि जनता इसका जवाब देगी.

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