जाते-जाते सबकी आँखें नम कर गए सचिन

  • 16 नवंबर 2013
मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में सचिन तेंदुलकर

वेस्ट इंडीज के खिलाफ अपना 200वां और अंतिम टेस्ट मैच खलने वाले सचिन तेंदुलकर पुरस्कार वितरण समारोह में सबको रुला गए.

स्टेडियम में मौज़ूद लोगों और दुनिया के कोने-कोने में टीवी और अन्य माध्यमों से उन्हें देख रहे लोगों को संबोधित करते हुए सचिन तेंदुलकर ने सबसे पहले अपने पिता का आभार जाताया जिनकी साल 1999 में मौत हो गई थी.

उन्होंने कहा कि पिता के प्रोत्साहन के बिना मैं आज आपके सामने नहीं खड़ा होता. उन्होंने कहा कि उनके पिता ने उन्हें सिखाया कि सपनों का पीछा करो, उन्हें छोड़ो मत, हालांकि इसका रास्ता कठिन होगा. सचिन ने कहा कि आज मैं अपने पिता की बहुत कमी महसूस कर रहा हूँ.

नटखट बच्चा

अपनी माँ की बात करते हुए सचिन ने कहा कि मुझे नहीं पता कि उन्होंने मेरे जैसे नटखट बच्चे को कैसे सँभाला. उन्होंने कहा, ''मेरी माँ ने मेरे क्रिकेट खेलने की शुरुआत से लेकर आज खत्म होने तक प्रार्थना की है.''

इस अवसर पर सचिन ने अपने बड़े भाई नितिन को भी याद किया. उन्होंने कहा कि मेरे बड़े भाई ने कहा कि मुझे पता है कि तुम जो भी करोगे, उसमें अपना 100 फ़ीसदी योगदान दोगे.

सचिन ने बताया कि उन्हें पहली बार बल्ला उनकी बहन सविता ने दिया था. उन्होंने कहा,'''मैं जब बल्लेबाजी करता हूं तो वो आज भी व्रत रखती हैं.''

अपने एक और बड़े भाई अजित को धन्यवाद देते हुए सचिन ने कहा कि हम उनके सपनों को एक साथ जीते हैं. सचिन ने कहा, "उन्होंने मेरे लिए अपने करियर का त्याग कर दिया. वह ही मुझे पहली बार आचरेकर सर के पास ले गए थे. उन्होंने पिछली रात भी मुझे फ़ोन कर मेरे आउट होने पर चर्चा की थी."

खुशनुमा पल

क्रिकेट में किंवदंती बन चुके सचिन तेंदुलकर ने कहा कि मेरे जीवन में सबसे खुशनुमा पल उस समय आया जब मैं 1990 में अंजली से मिला. मैं जानता था कि एक डॉक्टर के रूप में उनके सामने एक बेहतरीन करियर था लेकिन उन्होंने कहा कि आप खेलना जारी रखो मैं बच्चों का ध्यान रखूंगी.

यह सुनकर अंजली की आँखों में आँसू आ गए. वो अपनी नम आँखों को पोंछती हुई देखी गईं.

सचिन ने आगे कहा कि इसके बाद नंबर आता है मेरे जीवन के दो अनमोल हीरों सारा और अर्जुन का. उन्होंने कहा कि कई बार उनके जन्मदिन और छुट्टियों पर मैं बाहर था और उन्हें मिस किया. उन्होंने कहा कि पिछले 14-16 सालों में मैं उनके साथ बहुत अधिक समय नहीं बिता पाया लेकिन अब मैं वादा करता हूँ कि अगले 16 साल मैं उनके साथ बिताउंगा.

आचरेकर सर का साथ

सचिन ने कहा, ''मेरा करियर 11 साल की उम्र में शुरू हो गया था. आचरेकर सर को स्टैंड में खड़ा देखकर मुझे बहुत खुशी हुई थी. मैं उनके स्कूटर पर बैठकर एक दिन में दो-दो मैच खेलने जाया करता था. मैं खेल सकूं, सर इसके लिए मुझे अपने स्कूटर पर बिठा कर ले जाते थे. उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि बहुत अच्छा खेला. क्योंकि वो यह नहीं चाहते थे कि मैं लापरवाह हो जाऊं.''

इस अवसर पर सचिन तेंदुलकर ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई का भी आभार जताया.

उन्होंने अपने वरिष्ठ खिलाड़ियों, अपने साथ खेल चुके राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, सौरव गांगुली और अनिल कुंबले जैसे खिलाड़ियों और अपने कोचों का भी आभार जताया.

भारतीय टीम के अपने साथियों से उन्होंने कहा कि जब महेंद्र सिंह धोनी ने 200वें टेस्ट मैच की टेस्ट कैप सौंपी तो मैंने टीम को एक संदेश दिया था. सचिन बोले, ''मैंने कहा था कि देश का प्रतिनिधित्व करने पर हम सबको गर्व है. मैं उम्मीद करता हूँ कि गरिमा के साथ देश की सेवा करते रहेंगे. मुझे आप पर पूरा भरोसा है कि आप सच्ची भावना से देश की सेवा करते रहेंगे."

अंत में सचिन तेंदुलकर ने दुनिया भर में फैले अपने प्रसंशकों का आभार जताया. इतना सुनते ही मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम सचिन-सचिन के नारों से गूंज उठा.

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