आज फ़रियादी है सरगुजा का सबसे अमीर 'राजा'

सरगुजा महाराजा

जहाँ तक नज़र जाती है सब इनका है. चाहे मकान हो, बस पड़ाव, सरकारी इमारतें, अस्पताल, स्कूल या खेत. इन सबका मालिकाना हक़ इनके ही परिवार का है.

इसलिए जब चुनाव प्रचार में वह सड़क पर घूम-घूमकर वोट मांग रहे हैं, तो लोग शर्मा भी जाते हैं.

ये सरगुजा के राजघराने से ताल्लुक़ रखने वाले त्रिभुवनेश्वर सिंह देव हैं, जो अंबिकापुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

चुनाव आयोग में दायर किए गए इनके दस्तावेज़ बताते हैं कि यह 561 करोड़ रूपए की संपत्ति के मालिक हैं. देखा जाए, तो छत्तीसगढ़ में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों में वह सबसे अमीर हैं.

लोग इन्हें आज भी 'राजा साहब' कहकर संबोधित करते हैं. मगर आज लोग इनके दरबार में नहीं बल्कि यह ख़ुद लोगों के दरबार में कुछ मांगने आए हैं. वह वोट मांगने आए हैं और इसी दौरान ये लखनपुर ग्राम पंचायत पहुंचे हैं.

'ईंट-पत्थर की दौलत'

'राजा साहब’ लोगों को याद दिलाते हैं कि उनके पूर्वजों ने किस तरह दान में लोगों को ज़मीन के पट्टे देकर इस इलाक़े में बसाया था.

लोग इन्हें श्रद्धा से टीएस बाबा के नाम से पुकारते हैं. 'बाबा' स्थानीय विधायक भी हैं और दोबारा अपनी जीत के लिए काफ़ी आशान्वित भी हैं.

सबसे अमीर प्रत्याशी होने की बात पर वह कहते हैं कि यह सिर्फ ईंट और पत्थरों की संपत्ति है, जो अब खंडहर हो रही है.

उनका कहना है, "ये कागज़ के आंकड़े हैं. ये पांच सौ करोड़ क्या हज़ार करोड़ के भी हो सकते हैं. मगर सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है आचरण. सबकुछ इस पर निर्भर करता है कि आप आम लोगों के साथ कैसे पेश आते हैं. उनमें कैसे घुलते-मिलते हैं या फिर भेदभाव करते हैं. उसी पैमाने पर आपको तोला जाता है."

सिंह का कहना है कि विधायक बनने के पीछे उनका कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं. वह तो उस परंपरा को बरक़रार रखना चाहते हैं, जो उनके पूर्वजों ने शुरू की थी.

'लोगों की सेवा में'

उनका कहना है, "लोगों के काम आना. उनका दुःख दर्द बांटना, मैं यह चाहता हूँ. विधायक बनने के पीछे यह मतलब नहीं है कि मुझे इससे आर्थिक लाभ चाहिए या रुतबा. मेरे पास दोनों पहले से ही हैं."

रविवार को चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन तक टीएस बाबा गली-कूचों का तूफ़ानी दौरा करते रहे. लखनपुर ग्रामपंचायत के बस पड़ाव पर उनका इंतज़ार कर रहे लोग उन्हें देखते ही 'सरगुज़ा महाराज ज़िंदाबाद' का नारा लगाने लगते हैं.

Image caption छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण में मंगलवार को 72 सीटों पर वोट डाले जाएंगे

तभी माइक से उद्घोष होता है कि "'बाबा साहब' के पास इतनी संपत्ति है कि उनकी आने वाली कई पुश्ते घर बैठकर खाएंगी, मगर वह लोगों की सेवा करना चाहते हैं."

यह पूछने पर कि राजतंत्र से लोकतंत्र तक का उनका सफ़र कैसा रहा?

सिंह देव कहते हैं, "पहले ज़माने में राजा भेस बदलकर प्रजा के बीच यह पता लगाने जाया करते थे कि जनता क्या सोचती है? उनके दुःख क्या हैं? तकलीफ़ें क्या हैं? उससे एक बेहतर प्रशासन देने में मदद मिलती थी."

मगर आज 'सरगुजा के राजा' बिना भेस बदले ही जनता के बीच हैं.

कभी राजमहल में यहाँ के लोग सवाली बनकर जाया करते थे और फ़रियाद करते थे. आज 'सरगुजा के महाराजा' ख़ुद सवाली बनकर जनता के दरबार में हैं. उन्हें पता है कि यह प्रजातंत्र है.

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