सोना न मिलने से दुखी, लेकिन सन्नाटे से खुश हैं लोग

  • 20 नवंबर 2013

उत्तर प्रदेश के डौंडिया खेड़ा गाँव के जिस किले में सोना पाने के लिए खुदाई चल रही थी उसके चारों तरफ तैनात पुलिसकर्मी या तो धूप में सुस्ता रहे थे या अख़बार पढ़ कर अपना समय बिताने की कोशिश कर रहे थे. कुछ मज़दूर उन तंबुओं को उखाड़ने में व्यस्त थे जिन में प्रशासन, पुलिस या एएसआई के अस्थायी कार्यालय स्थापित किए गए थे.

उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले के इस गाँव में एक महीने से जो कर्फ्यू जैसा माहौल था.

लेकिन पिछले एक महीने से चल रहा माहौल मंगलवार को बदला हुआ था और इस बदले हुए माहौल से सबसे ख़ुश थे गंगा प्रसाद.

गाँव में कर्फ्यू जैसे माहौल की वजह थी गंगा प्रसाद के घर के ठीक सामने एक खंडहरनुमा महल, जहां पुलिस की कड़ी निगरानी में 1000 टन सोने की खोज के लिए खुदाई हो रही थी.

एक महीने की खुदाई के बाद सोना नहीं मिला तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई), प्रशासन और पुलिस अब डौंडिया खेड़ा से विदा हो रहे हैं.

खंडहरनुमा महल के एक तरफ गंगा प्रसाद का घर है और दूसरी तरफ उनका खेत.

राहत में गाँव वाले

गंगा प्रसाद ने बीबीसी से कहा, "खेत में जाने पर पुलिस वाले टोकते थे. बुआई का समय सिर पर है. अब हम आराम से बुआई कर सकते हैं."

ठीक गंगा किनारे बसा डौंडिया खेड़ा एक छोटा सा बीहड़ी गाँव है. ऊंची नीची और पठारी ज़मीन, कहीं-कहीं नीम और बबूल के पेड़ और खेत.

बिजली इस गाँव ने अभी देखी भी नहीं है. गाँव तक पहुँचने के लिए एक ही कच्चा रास्ता है. पहले हमेशा सन्नाटे में डूबा रहता था यह गाँव.

गंगा प्रसाद के घर के अगल-बगल केवल 25 घर ही हैं और यहां की आबादी 300 से ज्यादा है भी नहीं.

पर एक स्थानीय साधू शोभन सरकार के एक सपने ने इस गांव को सुर्खियों में ला दिया. उन्हें सपना आया कि स्थानीय राजा के किले में एक हज़ार टन सोना गड़ा है. सोने की खोज के लिए खुदाई का काम 18 अक्टूबर से शुरू हुआ.

लोग दूर-दूर से इस गाँव में पहुँचने लगे. हमेशा ऊंघने वाले इस गाँव में मेले जैसा माहौल हो गया. सैंकड़ों लोगों की भीड़ डौंडिया खेड़ा में जुटने लगी.

इस भीड़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित गंगा प्रसाद थे क्योंकि उनका घर खुदाई स्थल के पास था. अपनी मुश्किल के बारे में गंगा प्रसाद बताते हैं, "इतनी भीड़ लगने लगी थी कि घर से निकलना मुश्किल हो रहा था. खेत जा के काम करना तो दूर की बात हो रही थी."

गाँव में सन्नाटा

मंगलवार के दिन माहौल एकदम विपरीत था. डौंडिया खेड़ा फिर से पूरी तरह से सन्नाटे में डूबा था जो कभी-कभी किसी चिड़िया के चहकने से टूट रहा था.

गांव से थोड़ी दूर पर लोगों का रेला तो था पर वह गाँव के दूसरे छोर पर लगे एक मेले को देखने के लिए जा रहा था.

डौंडिया खेड़ा के लोग खुश तो हैं कि अब उनके गाँव में कर्फ्यू जैसा माहौल नहीं है पर उन्हें इस बात का अफसोस भी है की उनके गाँव से सोना नहीं निकला.

गंगा प्रसाद के पड़ोस में रहने वाले अरविन्द यादव का कहना है कि अगर सोना निकलता तो गाँव की तरक्की होती.

उन्होंने बीबीसी से बताया, "शोभन सरकार ने कहा था कि वे इस गाँव में स्कूल, कॉलेज, अस्पताल बनवाते. यह तो अच्छी बात थी ही पर उन्होंने यह भी कहा था कि स्कूल, कॉलेज, अस्पताल बनवाने के लिए हमारी ज़मीन ऊंची कीमतों में खरीदते. वह एक बीघा के एवज में 15 लाख रुपये देने की बात कर रहे थे. पर अब हमें कुछ नही मिलेगा. हम खेती ही करते रहेंगे."

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