सुप्रीम कोर्ट पहुंचा गुजरात का 'जासूसी' प्रकरण

Image caption ऑडियो टेप में अमित शाह किसी साहब का ज़िक्र कर रहे हैं

गुजरात का विवादास्पद जासूसी प्रकरण अब उच्चतम न्यायालय पहुंच गया है.

भारतीय प्रशासनिक सेवा के निलंबित अधिकारी प्रदीप शर्मा ने न्यायालय से न्यूज़ पोर्टलों द्वारा प्रसारित ऑडियो टेप का संज्ञान लेने का अनुरोध किया है और कहा है कि इसमें इस बात के सबूत हैं कि राज्य सरकार ने कैसे उन्हें फ़र्ज़ी मामलों में फंसाने का प्रयास किया था.

दो वेबसाइटों ने दावा किया था कि गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री और भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद अमित शाह ने एक महिला की गैरकानूनी तरीके से कथित तौर पर निगरानी करने का आदेश दिया था.

इन पोर्टलों का दावा है कि अमित शाह ने ये काम किसी 'साहब' के कहने पर किया था.

इन वेबसाइटों की तरफ से उजागर किए गए टेप में अमित शाह और एक आईपीएस अधिकारी को बात करते हुए बताया गया है.

प्रदीप शर्मा के वकील प्रशांत भूषण ने शुरू में ही ऑडियो टेप का हवाला देते हुए कहा कि पिछली सुनवाई के बाद महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ है, इसलिए इस पर शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता है.

सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 6 दिसंबर को करेगा.

पोर्टल का दावा

मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गुजरात सरकार के वकील के आग्रह के परिप्रेक्ष्य में प्रदीप शर्मा से इस मामले में हलफनामा दाख़िल करने को कहा है.

राज्य सरकार के वकील का कहना था कि रिकॉर्ड में तथ्य पेश किए जाने तक किसी प्रकार की मौखिक दलील की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए.

प्रशासनिक अधिकारी प्रदीप शर्मा पर कच्छ जिले में साल 2008 में एक निजी फर्म को भूमि आबंटन में कथित अनियमितता करने सहित पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं.

शर्मा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मोदी सरकार ने उन्हें निशाना बना रही है क्योंकि उनके छोटे भाई आईपीएस अधिकारी कुलदीप शर्मा ने गोधरा दंगों के बाद से मोदी और अमित शाह की कारगुजारियों का पर्दाफाश किया था.

शर्मा चाहते थे कि इन मामलों को सीबीआई के हवाले किया जाए.

इस मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में ज़ोरदार प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. कांग्रेस पार्टी समेत दूसरी विपक्षी पार्टियों ने भी इस मामले में नरेंद्र मोदी और अमित शाह की भूमिका की जांच कराने की मांग की है.

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