एटीएम में आप कितने सुरक्षित हैं?

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देश में सभी एटीएम की 24 घंटे सुरक्षा को उनकी नियामक संस्थाएं भी मुश्किल मानती हैं. लिहाज़ा यह बैंकों पर निर्भर होता है कि वो किस एटीएम में कैसी सुरक्षा उपलब्ध कराना चाहते हैं.

यह सवाल बेंगलुरु में मंगलवार को एक महिला पर एटीएम में हुए हमले और लूट के बाद अहम बनकर सामने आया है.

यह एटीएम बेंगलुरु में न केवल शहर के बीचों-बीच है बल्कि लगातार इसमें ग्राहकों की सक्रियता भी बनी रहती है.

देश में फिलहाल क़रीब एक करोड़ 40 लाख एटीएम हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है. एटीएम की संख्या बढ़ने के साथ इनकी सुरक्षा और इनसे जुड़े अपराध और धोखाधड़ी भी बढ़ रही है.

भारत में एटीएम की सुरक्षा सुनिश्चित करने और इस बारे में गाइडलाइंस बनाने की ज़िम्मेदारी भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की है.

एनपीसीआई के आपदा प्रबंधन प्रमुख भरत पंचाल का कहना है, ''कुछ एटीएम ऐसी सार्वजनिक जगहों पर होते हैं, जहां सुरक्षा की खास ज़रूरत नहीं होती, लेकिन कुछ स्थानों पर यह आवश्यक होती है. अलबत्ता, यह बैंकों पर है कि वो किस एटीएम को सुरक्षा के लिहाज़ से कितना संवेदनशील मानते हैं.''

पंचाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि एनपीसीआई ने कुछ समय पहले एटीएम की सुरक्षा पर इंडस्ट्री के विशेषज्ञों के साथ मिलकर गाइडलाइंस तैयार की थीं, जिसे रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया और भारतीय बैंक एसोसिएशन मंज़ूरी दे चुके हैं.

सुरक्षा गाइडलाइंस

आइए जानते हैं क्या हैं एटीएम सुरक्षा के लिए तय गाइडलाइंस

1. हर एटीएम पर सीसीटीवी कैमरे लगे हों, जहां से 24X7 रिकार्डिंग हो. इस रिकार्डिंग को कम से कम एक महीने और अधिकतम तीन महीने तक रखने की व्यवस्था हो, ताकि एटीएम में आने वालों को चिह्नांकित किया जा सके.

2. हर एटीएम पर रियर व्यू मिरर लगा हो, ताकि उसके ज़रिए ग्राहक यह जान सकें कि कोई उसके पीछे खड़ा होकर उसके पिन तो नहीं देख रहा.

3. हर एटीएम में एंटी स्कैमिंग डिवाइस लगी हो, ताकि आपके पिन को रिकॉर्ड कर उसका दुरुपयोग न किया जा सके.

4. एटीएम मशीनों में कार्ड डेटा प्रोटेक्शन की व्यवस्था हो, ताकि ग्राहकों के डेटा के ग़लत इस्तेमाल रोका जा सके और डेटा का बचाव किया जा सके.

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