भारत हमारा पहला दोस्त हैः अफ़ग़ान सासंद

एलाय इरशाद, अफगानिस्तान की महिला सांसद

"इस क्षेत्र में भारत हमारा पहला दोस्त है और दूसरे नंबर पर है तुर्की. अफ़ग़ानिस्तान के बारे में बाक़ी पड़ोसी देश इतने अच्छे ख्याल नहीं रखते."

ये शब्द अफ़ग़ानिस्तान की महिला सांसद एलाय इरशाद के हैं.

भारत से एलाय का लगाव इस बात से समझा जा सकता है कि वे यहाँ आने का कोई मौक़ा हाथ से जाने नहीं देतीं. दिल्ली में बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत केवल उनके ही दिल में नहीं समाया है बल्कि अफ़ग़ानिस्तान में आम लोग भी भारत को अपना दोस्त मानते हैं.

अफगानिस्तान में बॉलीवुड से चेहरे की चाहत

भारत उन गिने चुने देशों में से है जो अफ़ग़ानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए काम कर रहा है. भारत ने इस सिलसिले में अब तक अफ़ग़ानिस्तान में दो अरब डॉलर का निवेश किया है.

महिला सांसद कहती हैं, "हम इंडिया की मदद की मिसाल देते हैं. जैसे कि हमारे देश में इंडिया के अस्पताल हैं और टाटा बसें हैं. आम लोग भारत से प्यार करते हैं."

भारत का असर उनकी भाषा पर भी दिखता . एलाय इरशाद साफ़ हिंदी जुबान में बात कर रही थीं. "मैंने ये भाषा हिंदी फ़िल्मों से सीखी है. हिंदी फ़िल्में जितनी अफ़ग़ानिस्तान में मशहूर हैं उतनी भारत में भी नहीं होंगी."

एलाय इरशाद अफ़ग़ानिस्तान की नई पीढ़ी की महिला नेता हैं जो पिछले कुछ सालों में राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में आई हैं. लेकिन हिम्मत में वो मर्दों से कम नहीं. उन्हें शिकायत है कि लोग महिलाओं की कम ही सुनते हैं.

'अल्लाह से दुआ'

Image caption काबुल की एक दीवार पर बॉलीवुड पोस्टर. (फाइल फोटो)

एलाय इरशाद कहती हैं, "तालिबान तो महिलाओं के खिलाफ हैं ही. इस में कोई नई बात नहीं लेकिन खुद हमारी सरकार में महिला विरोधी विचार आम बात है. हमारी पार्लियामेंट और हमारी लीडरशिप में ऐसे लोग हैं जो औरतों को आगे बढ़ने नहीं देना चाहते."

राजदूत की भूमिका में सिनेमा

वो कहती हैं उनके राजनीतिक साथी उनकी बातों का मज़ाक़ उड़ाते हैं. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के ज़माने में महिलाओं को घर के अंदर रखने पर बल दिया जाता था जिसके कारण आज भी पढ़ी लिखी महिलाओं की संख्या अधिक नहीं है.

हालांकि इसके बावजूद आज अफ़ग़ानिस्तान की संसद में महिलाओं के लिए 25 फीसदी सीटें सुरक्षित हैं. इस पर एलाय इरशाद कहती हैं सरकार को इसका श्रेय नहीं देना चाहिए.

वो कहती हैं, "हमने अब तक जो हासिल किया है उसमे सरकार ने कुछ नहीं किया. इसका श्रेय तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जाता है."

"महिलाओं के प्रोत्साहन और उनके सशक्तिकरण के लिए सरकार गंभीर नज़र नहीं आती. लेकिन कोई बात नहीं. तीन महीने में चुनाव होने वाले हैं. अल्लाह से दुआ करती हूँ कि कोई अच्छा सा लीडर आए और औरतों के लिए काम करे."

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