मीडिया में क्यों हो रहा है यौन शौषण?

Image caption काम की जगह पर यौन शोषण के खिलाफ इसी साल क़ानून पारित किया गया है.

“पूरी दुनिया से सवाल पूछनेवाले, बराबरी और सच की लड़ाई लड़नेवाले पत्रकार, जिनके काम की आप बहुत इज़्ज़त करते हैं, जब उनमें से ही कोई अपनी महिला सहकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करे तो ये बहुत दुखदायी और निराशाजनक होता है.”

अपने अनुभवों को बीबीसी से साझा करते हुए पत्रकार रुक्मिणी सेन कहती हैं कि किसी मीडिया संस्था में ताकतवर पद पर पहुंचने के बाद कोई पुरुष अगर अपने सिद्धांतों को ताक पर रख दे तो ये महिलाओं को बहुत हतोत्साहित करता है.

18 साल से पत्रकारिता कर रहीं रुक्मिणी के मुताबिक जब अपनी नौकरी को ताक पर रखकर कोई महिला अपने से वरिष्ठ सहकर्मी के ख़िलाफ़ शिकायत करने की हिम्मत जुटाती भी है, तो उस वक्त ज़्यादातर पुरुष सहकर्मी उनके साथ नहीं खड़े होते हैं.

तो क्या लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारिता जगत में यौन हिंसा या शोषण के मामले उतने ही आम हैं जितने और क्षेत्रों में?

पिछले कुछ महीनों में काम की जगह पर यौन शोषण के कई मामले सामने आए जैसे दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो में काम कर रही महिलाकर्मियों की शिकायत, सन टीवी की एक महिलाकर्मी एस अकिला का मामला और अब तहलका पत्रिका के संपादक तरुण तेजपाल के ख़िलाफ़ यौन हिंसा की शिकायत.

‘मुझे सबने मना किया था’

लेकिन महिला पत्रकारों के मुताबिक ऐसे मामलों में अपनी आवाज़ उठा पाना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. बीबीसी से बातचीत में एस अकिला ने बताया कि सन टीवी में काम करते हुए जब उनके सीनियर ने उनसे अश्लील बातें करनी शुरू कीं तो कई महिला सहकर्मियों ने ही उन्हें शिकायत करने से मना किया.

अकिला ने कहा, “दफ़्तर में वो शख़्स ऐसे बर्ताव कई महिलाओं के साथ सालों से करते आ रहे थे, लेकिन नौकरी चले जाने के डर से किसी ने शिकायत नहीं की, मुझे भी सबने मना किया, लेकिन मेरे लिए ये करना ज़रूरी था.”

अकिला की शिकायत के बाद एक अन्य मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत उन्हें सस्पेंड कर दिया गया. पर अकिला के मुताबिक ये उनकी शिकायत की वजह से किया गया.

Image caption तहलका अख़बार के संपादक तरुण तेजपाल के खिलाफ़ उनकी एक सहकर्मी ने यौन हिंसा के संगीन आरोप लगाए हैं.

उनकी शिकायत के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए विशाखा निर्देश के तहत एक शिकायत कमेटी का गठन भी हुआ, लेकिन फ़ैसला उनके हक में नहीं आया.

दो महीने पहले समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अकिला ने जिन धमकियां और अश्लील बातों के आरोप लगाए हैं, वो फोन पर दिए गए यानी वो कार्यस्थल पर नहीं हुए इसलिए उनपर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती.

अकिला अब नौकरी की तलाश में हैं. ये ज़रूर है कि जिस शख़्स के ख़िलाफ़ उन्होंने शिकायत की, उन्होंने अब सन टीवी से इस्तीफा दे दिया है.

शिकायत के बाद भी प्रताड़ना

भारत में काम कर रही महिला पत्रकारों के संगठन ‘नेटवर्क फॉर वुमेन इन मीडिया इन इंडिया’ की राष्ट्रीय संयोजक और पत्रकार लक्ष्मी मूर्ति मानती हैं कि पत्रकार होने की वजह से महिलाएं अपनी बात कहने में ज़्यादा सक्षम महसूस करती हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर कैसा अमल होगा इसका अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहा है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किए गए विशाखा निर्देशों के तहत कार्यस्थल पर यौन शोषण की शिकायत किए जाने पर संस्था की ज़िम्मेदारी है कि वो एक शिकायत कमेटी का गठन करे जिसकी अध्यक्षता एक महिला करे, उसकी आधी से ज़्यादा सदस्य महिलाएं हों और उसमें यौन शोषण के मुद्दे पर काम कर रही किसी बाहरी ग़ैर-सरकारी संस्था की एक प्रतिनिधि भी शामिल हो.

बीबीसी से बातचीत में लक्ष्मी ने कहा, “यौन शोषण पर सुप्रीम कोर्ट के विशाखा निर्देश और अब क़ानून बनना महिला आंदोलन की एक बड़ी सफलता है, लेकिन अब भी 80-90 फ़ीसदी मीडिया दफ़्तरों में शिकायत कमेटियां नहीं बनाई गई हैं और ना ही उनके सदस्य सही तरीके से नियुक्त किए जाते हैं.”

लक्ष्मी के मुताबिक शिकायत के बाद भी महिलाओं से ही सवाल पूछे जाते हैं, उनकी सच्चाई पर शक किया जाता है और उन्हें एक दिक्कत पैदा करनेवाली कर्मचारी माना जाने लगता है जिसकी वजह से उन्हें काम के कई अच्छे मौकों से महरूम किया जाता है.

भारत सरकार ने इसी साल कार्यस्थल पर यौन शोषण के खिलाफ़ एक कानून पारित किया. इसके तहत कार्यस्थल की परिभाषा सिर्फ दफ़्तर तक सीमित नहीं रखी गई है और इसमें असंगठित क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं को भी शामिल किया गया है.

नए कानून का पालन ना करने पर कंपनी के मालिक को 50,000 रुपए तक का जुर्माना भी देना पड़ सकता है.

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