क्या बैसला कांग्रेस की नैया पार लगाएंगे?

किरोड़ी बैसला
Image caption बैसला ने राजस्थान के गुर्जरों को एकजुट कर व्यापक आंदोलन किया था.

राजस्थान के एक बड़े गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने कांग्रेस का समर्थन कर दिया है. कांग्रेस को इससे अपने पक्ष में बयार बदलने की उम्मीद है. लेकिन कुछ गुर्जर नेता कर्नल बैसला के फ़ैसले को ग़लत बताकर इसका विरोध कर रहे हैं.

प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है, ऐसे में बैसला का फ़ैसला चुनावों पर व्यापक असर डाल सकता है.

नाज़ुक राजनीतिक हालात में बैसला कांग्रेस के लिए सियासी तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं. राज्य में लगभग 40 सीटों पर गुर्जर मतदाता 10 हज़ार से 40 हज़ार की तादाद में है.

कई सीटों पर गुर्जर मतदाता निर्णायक भूमिका में भी हैं.

कितना होगा असर

कांग्रेस के समर्थन पर बैसला तर्क देते हैं, "कांग्रेस ने पिछले पांच साल के दौरान गुर्जर समाज को पांच प्रतिशत आरक्षण देने के लिए ईमानदार कोशिशें की हैं और जब अदालत के कारण यह आरक्षण अटका तो उसने एक प्रतिशत आरक्षण दे दिया. लेकिन भाजपा ने ऐसी ईमानदार कोशिशें नहीं की."

बैसला ने कहा कि उन्होंने भाजपा नहीं छोड़ी है और वे पार्टी के सदस्य हैं, लेकिन समाज के हित को देखते हुए उन्होंने यह क़दम उठाया है.

लेकिन गुर्जर आंदोलन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉक्टर रूपसिंह ने बैसला के इस निर्णय पर हैरानी जताई है. उनका कहना है कि कर्नल बैसला को ऐसा करने से पहले पूरे समाज को विश्वास में लेना चाहिए था.

उन्होंने कहा, "आंदोलन का पार्टियों में विलय होने देना ख़तरनाक है."

कांग्रेस के नेता इसे अपने पक्ष में देखते हैं और भाजपा के नेता कहते हैं कि इसका कोई असर नहीं होगा. कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉक्टर चंद्रभान मानते हैं कि बैसला के फ़ैसले का चुनावों पर असर होगा.

हालाँकि भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष ओमकार सिंह लखावत कहते हैं, "बैसला का प्रभाव पिछले पाँच साल में कम हुआ है. पिछला लोकसभा चुनाव इन्होंने हमारे टिकट पर लड़ा था, इसके बावजूद लोकसभा में हमारी चार ही सीटें आईं थी, इसलिए इनका प्रभाव बहुत कम है. जब ये हमें कोई फ़ायदा नहीं पहुँचा पाए तो कांग्रेस को कैसे पहुंचाएंगे."

ये हैं गुर्जरों के प्रभाव वाली सीटें

Image caption बैसला के नेतृत्व में हुए गुर्जर आंदोलन का असर उत्तर भारत के कई राज्यों पर हुआ था.

सीकर ज़िले में नीम का थाना और श्रीमाधोपुर, जयपुर ज़िले में कोटपुतली, विराटनगर, दूदू, बानसूर, थानागाजी, भरतपुर ज़िले में कामां, नगर, नदबई, वैर बयाना, धौलपुर ज़िले में बाड़ी, राजाखेड़ा, धौलपुर, करौली ज़िले में टोडाभीम, हिंडौन, करौली, सपोटरा और दौसा ज़िले में बांदीकुई, महवा, सिकराय और दौसा.

सवाई माधोपुर ज़िले में गंगापुर, बामनवास, सवाई माधोपुर और खंडार. टोंक में देवली-उनियारा, निवाई, मालपुरा, अजमेर किशनगढ़, पुष्कर, नसीराबाद, मसूदा, केकड़ी, चित्तौड़गढ़ ज़िले में बेगूं, निंबाहेड़ा, राजसमंद में भीम, नाथद्वारा, भीलवाड़ा में आसींद, मांडल, मांडलगढ़, जहाजपुर, बूंदी ज़िले में हिंडौली, बूंदी, कोटा में पीपलदा, सांगोद, रामगंज मंडी और झालावाड़ में डग, झालरापाटन, खानपुर और मनोहरथाना.

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