केजरीवाल भी टपक पड़े हैं: शीला दीक्षित

शीला दीक्षित

चार दिसम्बर को होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री शीला दीक्षित चुनावी दंगल में अपने तमाम विरोधी उम्मीदवारों की तरह ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं.

आम आदमी पार्टी और पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल उनके निशाने पर हैं. बीबीसी से बातचीत में शीला दीक्षित ने कहा, "अरविंद केजरीवाल लोगों को गुमराह कर रहे हैं. मुझे लगता है उन्हें दिल्ली की समझ भी नहीं है, वो गाज़ियाबाद से हैं."

कांग्रेस नेता शीला दीक्षित दिल्ली की सत्ता पर चौथी बार दावेदारी पेश कर रहीं हैं.

शीला दीक्षित ने कहा, "अरविंद केजरीवाल टपक पड़े हैं और उनका राजनीतिक इतिहास किसी को नहीं मालूम, राजनीतिक कार्यक्रम दिल्ली के लिए क्या है, इस बारे में मुझे लगता है कि उन्हें दिल्ली की समझ भी नहीं है, वो तो गाज़ियाबाद के निवासी हैं."

शीला दीक्षित ने कहा, "अरविंद केजरीवाल कहते हैं कि वो रामलीला मैदान में जाकर अपनी विधानसभा की बैठक करेंगे, यह सरासर ग़लत है. वो ऐसा कर ही नहीं सकते हैं. देश की संसद ये थोड़े ही कहेगी कि हम इंडिया गेट पर जाकर बैठेंगे."

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दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से ख़ास बातचीत.

'गंभीरता नहीं'

Image caption शीला दीक्षित कहती हैं कि अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक इतिहास किसी को नहीं मालूम.

शीला दीक्षित कहती हैं, "वो कहते हैं कि हम लोकपाल बिल लाएंगे. अरविंद केजरीवाल लोकपाल बिल ला ही नहीं सकते. दिल्ली में लोकायुक्त है. लोकपाल बिल बनेगा तो संसद में बनेगा, वो तो लोगों को गुमराह कर रहे हैं."

शीला दीक्षित ने कहा, "जिस तरह से एक राजनीतिक पार्टी को काम करना चाहिए या जिस तरह से एक राजनैतिक दल को गंभीर होना चाहिए, उनमें वो गंभीरता नहीं लगती है."

उन्होंने कहा, "अरविंद केजरीवाल का हाथ में झाड़ू उठाकर बात करना लोगों को दिलचस्प लगता है, बस इसके अलावा कुछ नहीं है."

चार दिसंबर को दिल्ली में विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं. साल 1998 से लगातार दिल्ली पर कांग्रेस का शासन रहा है. इस बार कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी में कड़ा मुकाबला है.

'चुनाव चुनौती भरा'

साल 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के त्रिशंकु नतीजों की संभावना को नकारते हुए शीला दीक्षित कहती हैं, "हर चुनाव चुनौती से भरा होता है, हर चुनाव अलग होता है. पहले भी चुनाव तिकोने हुए हैं. कभी बीएसपी आ गई, कभी एनसीपी आ गई , कभी आरजेडी आ गई, अब की बार ये आम आदमी पार्टी आ गई. भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस तो पुराने राजनीतिक दल हैं ही."

चुनाव आयोग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार दिल्ली के कुल मतदाताओं में युवाओं का बड़ा हिस्सा है.

साल 1998 से लगातार दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं 75 वर्षीय शीला दीक्षित ने इस बार दिल्ली के मुख्यमंत्री पद लिए कांग्रेस की तरफ से युवा चेहरा ना उतारने पर एक पल ठहरकर जवाब दिया.

'ग़लतफहमी'

Image caption शीला दीक्षित ने कहा कि यह बहुत ग़लतफहमी है कि युवा ख़ुद नेतृत्व करना चाहते हैं.

शीला दीक्षित का कहना था, "युवा अपने आदर्श बनाते हैं. मेरे ख्य़ाल में यह बहुत ग़लतफहमी है कि वे ख़ुद नेतृत्व करना चाहते हैं. उनमें इतना साहस भी है और इतना संयम भी है कि वह इस बात का इंतज़ार कर सकें कि वह भी एक दिन नेतृत्व करेंगे."

बढ़े हुए बिजली के दाम और महंगाई पर शीला दीक्षित ने कहा, "समृद्धि दिल्ली की निशानी है. दिल्ली में प्रति व्यक्ति आय दो लाख रुपये है. बिजली, पानी का बिल कितना आता है, ये इस बात पर निर्भर करता है कि इसका कितना उपभोग हो रहा है."

दिल्ली में ज़ोरशोर से शुरू हुई बीआरटी परियोजना के नाकाम होने पर शीला दीक्षित ने कहा, "ये प्रयोग दिल्ली में ट्रैफिक की संस्कृति के कारण सफल नहीं हुआ. हमारी दिल्ली का ट्रैफिक बीआरटी को अपना नहीं सका. दिल्ली में बीआरटी कॉरिडोर को जो सहयोग मिलना चाहिए था वह नहीं मिला."

शीला दीक्षित ने कहा, "दिल्ली देश की राजधानी है. इसलिए यहां जीतना पूरे देश में कांग्रेस के लिए लाभदायक हो सकता है."

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