विनोद कांबली को दिल का दौरा पड़ा

विनोद कांबली

पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली को दिल का दौरा पड़ा है. उन्हें मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

सुबह तक़रीबन 10 बजे के आसपास उन्हें लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया और करीब 12 बजे उन्हें आईसीयू में शिफ़्ट किया गया.

('मैं उन्हें डिस्टर्ब नहीं करना चाहता')

अस्पताल में उनकी पत्नी मौजूद हैं. जब बीबीसी ने उनसे कांबली का हालचाल पूछा तो उन्होंने संक्षिप्त सा जवाब दिया, "वो अब बेहतर हैं."

वर्तमान में विनोद कांबली कई समाचार चैनलों में एक क्रिकेट विशेषज्ञ की भूमिका निभा रहे हैं.

पूर्व क्रिकेटर 41 वर्षीय विनोद कांबली ने साल 1993 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी जबकि उन्होंने अपना पहला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच साल 1991 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खेला था.

उन्होंने कुल 17 टेस्ट ही खेले और 24 साल की उम्र में उन्होंने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ वर्ष 1995 में जो टेस्ट खेला उसके बाद उन्हें दोबारा टेस्ट क्रिकेट में मौक़ा नहीं मिला.

सचिन के साथी

वो प्रख्यात भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के बचपन के दोस्त हैं. और मुंबई की एक स्कूली प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने अपने स्कूल शारदाश्रम के लिए सचिन तेंदुलकर के साथ मिलकर 664 रनों की रिकॉर्ड साझेदारी की थी जिसके बाद कांबली और सचिन का नाम भारतीय क्रिकेट जगत में छा गया था.

हाल ही में सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट से रिटायरमेंट लेने के बाद एक पार्टी का आयोजन किया था जिसमें विनोद कांबली को न्यौता नहीं भेजा गया था. जिस पर कांबली ने कथित तौर पर निराशा ज़ाहिर की थी.

विनोद कांबली और सचिन तेंदुलकर के बीच दोस्ती में कथित तौर पर दरार तब आ गई थी जब विनोद कांबली ने एक टीवी रियलिटी शो में कहा था कि सचिन ने उनकी टीम में वापसी के लिए कोई मदद नहीं की.

विनोद कांबली को करियर की शुरुआत में काफ़ी प्रभावशाली बल्लेबाज़ माना गया था. उन्होंने अपने शुरुआती मैचों में हो दो दोहरे शतक जमा दिए थे लेकिन बाद में वो अपनी इस फ़ॉर्म को बरक़रार नहीं रख सके.

क्रिकेट विशेषज्ञों ने विनोद कांबली की नाकामयाबी के लिए उनकी जीवनशैली को दोषी बताया और कहा कि इसी वजह से वो टैलेंटेड होते हुए भी सचिन जैसी कामयाबी हासिल नहीं कर पाए.

वर्ष 1996 के विश्व कप के सेमीफ़ाइनल में श्रीलंका के ख़िलाफ़ भारत की हार पर मैदान से बाहर निकलते हुए कांबली की आंखों में आंसू आ गए थे. वो दृश्य आज भी क्रिकेट प्रेमियों को भुलाए नहीं भूलता.

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