भाजपा 370 पर अपने रुख़ पर ही कायम: जावड़ेकर

दिल्ली में रविवार को हुई रैली में नरेंद्र मोदी ने धारा 370 पर जो बयान दिया उससे एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है.

क्या धारा 370 पर बीजेपी के रुख में कोई बदलाव आया है, या वो अभी भी इसे खत्म करने के अपने पुराने रुख पर कायम है?

इसी मुद्दे पर बीबीसी संवाददाता स्वाति बक्शी ने बात की भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर से.

मोदी ने रविवार को धारा 370 पर जो बयान दिया था, उसके बाद ये कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी 370 पर अपना रूख बदल रही है या नरम रुख अपना रही है. आपका इस पर क्या कहना है?

धारा 370 के संदर्भ में भारतीय जनसंघ से लेकर हमारे जो विचार थे, उस रुख में कोई बदलाव और ठहराव नहीं आया है. उसमें बदलाव की जरूरत नहीं है. देश की एकता की दृष्टि से, लोगों को जोड़ने के लिए और देश का एक संविधान होने के लिए ये जरूरी है.

हमारी पहले से जो भूमिका है वो राष्ट्रवाद के आधार पर है. कल मोदी जी ने भी यही कहा कि जो लोग इस धारा के रद्द होने का विरोध करते हैं, वे इसकी चर्चा तो करें कि कश्मीरी जनता को इस धारा का पूरा लाभ मिला है या नहीं.

ये मुद्दा मोदी जी ने उठाया और इसके बाद देश भर में चर्चा शुरू हुई. यही सही स्थिति है.

370 को खत्म करने की जगह उस पर चर्चा करने की मोदी की बात ने इस बात को हवा नहीं दी है कि बीजेपी 370 पर एक नया रुख अपना रही है?

भारतीय जनता पार्टी अपनी भूमिका पर कायम है. हमारा कहना है कि ये धारा रद्द होनी चाहिए.

यही विचार देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जी का भी था. मोदी जी ने अपने भाषण में इसका भी जिक्र किया.

नेहरू जी का मत था कि ये धारा धारे-धीरे समाप्त हो जाएगी. लेकिन 62 सालों में अभी तक ऐसा नहीं हुआ.

मोदी जी ने यही कहा कि आखिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस धारा को समाप्त करने की दिशा में कोई कदम क्यों नहीं उठाते, वह इस पर चुप क्यों हैं.

उन्होंने कहा कि जो लोग इस धारा को खत्म करने पर सहमत नहीं हैं वे इस पर चर्चा तो करें.

इस चर्चा की शुरुआत अंततः देश को जोड़ने वाली ही साबित होगी, यह हमारा विश्वास है. हमारा विचार कायम है लेकिन सबको साथ लेकर चलना है और जो इसके विरोध में हैं, उनको चर्चा तो करनी होगी.

क्या मोदी ने धारा 370 की बात कहकर खुद को लोगों के सामने प्रगतिशील नेता के रूप में पेश करने की कोशिश की है, क्या ये चुनावी रणनीति का ही एक हिस्सा है?

ये एक चुनावी रणनीति बिल्कुल नहीं है. मुझे लगता है जो प्रगतिशील है वही प्रगतिशील दिखेगा.

काँग्रेस प्रगतिशील नहीं है तो नहीं दिखेगी. हमारे सभी नेता मोदी, अटल जी, आडवाणी जी, प्रगतिशील हैं.

लेकिन अटल जी जब प्रधानमंत्री थे तो सब उनका स्वागत नहीं कर रहे थे, उनका विरोध भी कर रहे थे.

अटल जी को अब पीडीपी और अन्य लोग कह रहे हैं कि वह बहुत उदारवादी नेता थे.

मोदी जी को अटल जी जैसा होना चाहिए. वह हमारे प्रेरणास्त्रोत हैं, वह बीमार हैं और कुछ नहीं कर सकते, तो लोग उनके बारे में ऐसा कह रहे हैं.

जब 2009 में आडवाणी जी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे तो लोग विरोध कर रहे थे. अब लोग मोदी का विरोध कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्हें आडवाणी जैसा उदार होना चाहिए. ये एक नया तरीका है बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का विरोध करने का.

आपके अनुसार धारा 370 पर चर्चा के लिए कहना बीजेपी के बदले हुए और नरम रुख को नहीं दर्शाता है? या बीजेपी अपने पुराने रुख पर कायम है?

मोदी जी ने भाषण में सवाल पूछा था कि आज भारत में पंचों, सरपंचों और ग्राम सभाओं को अधिकार हासिल है लेकिन ये अधिकार कश्मीर में 370 के कारण नहीं है. तो ये कश्मीर के लोगों का फायदा है या नुकसान है.

भ्रष्टाचार के विरोध के अनेक कानून जो देश भर में लागू हैं वे कश्मीर में नहीं हैं, तो ये कश्मीर के लिए बुरा है या अच्छा है.

इसी तरह उन्होंने दलितों के संदर्भ में सवाल पूछे.

नेहरू जी की भी इच्छा थी, नेहरू जी को विश्वास था कि समय आने पर 370 को खत्म कर दिया जाए. हमें लगता है कि 62 साल हो गए हैं और अब इस धारा को खत्म कर देना चाहिए.

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