नहीं जानती एफ़आईआर क्यों हुई: तसलीमा

तसलीमा नसरीन

बांग्लादेशी मूल की विवादित लेखिका तसलीमा नसरीन के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश के बरेली ज़िले में सूचना प्रौद्योगिकी क़ानून के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई है.

यह एफ़आईआर बरेली के एक प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु की शिकायत पर दर्ज की गई है.

आरोप है कि तसलीमा नसरीन की ट्वीट से मुसलमानों की भावनाएं आहत हुई हैं.

उत्तर प्रदेश पुलिस के मुताबिक एफ़आईआर दरग़ाह आला हज़रत के मौलाना सुब्हानी मियाँ के बेटे हसन रज़ा ख़ाँ नूरी की ओर से दर्ज कराई गई है. शिकायत में कहा गया है कि तसलीमा ने हाल ही में अपनी ट्वीट में मुस्लिम उलेमाओं को अपराधी कहा जिससे मुसलमानों की भावनाएं आहत हुईं.

फ़तवा

बीबीसी से बातचीत में तसलीमा नसरीन ने अपने ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज किए जाने पर हैरानी जताते हुए कहा, "मैं नहीं जानती कि मेरे ख़िलाफ़ एफ़आईआर क्यों दर्ज की गई है. मैंने तो सिर्फ़ सच बोला था."

तसलीमा का कहना है, "असल में 2007 में उलेमा ने फ़़तवा जारी कर मेरे सिर पर ईनाम रखा था. मैंने इसी बारे में ट्वीट किया था. अब उन उलेमा का कहना है कि मेरी ट्वीट से उनकी भावनाएं आहत हुई हैं. मैं चकित हूँ क्योंकि मैंने कुछ भी ग़लत नहीं कहा है?"

भारत में हाल ही में सोशल मीडिया पर अपनी बात कहने को लेकर एफ़आईआर होने के कई मामले सामने आए हैं.

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत इंटरनेट पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति कठोर हो रहा है. इसके जवाब में तसलीमा कहती हैं, "मुझे नहीं लगता कि भारत एक कठोर या असहिष्णु देश है, लेकिन कुछ लोग अभी भी असहिष्णु हैं, ख़ास कर धार्मिक कट्टरपंथी. वे लोगों का उत्पीड़न करने की कोशिश करते हैं. ये लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में यक़ीन नहीं रखते हैं."

हैरानी

Image caption फ़ेसबुक पर भड़काऊ टिप्पणियाँ करने के आरोप में सामाजिक कार्यकर्ता शीबा असलम फ़हमी के ख़िलाफ़ हाल ही में एफ़आईआर दर्ज़ की गई.

तसलीमा नसरीन के ख़िलाफ़ सूचना प्रौद्योगिकी क़ानून की धारा 66ए के तहत मामला दर्ज किया गया है.

भारत के बारे में तसलीमा कहती हैं, "मैं भारत को प्यार करती हूँ और उन लोगों का सम्मान करती हूँ जो मानवाधिकारों में यक़ीन रखते हैं. यहाँ के क़ानून बहुत अच्छे हैं."

अपनी ट्वीट के बारे में तसलीमा कहती हैं, "मैं जो भी लिखती हूँ मानवाधिकारों के लिए लिखती हूँ. मैं सिर्फ़ इस दुनिया को बेहतर बनाना चाहती हूँ. लोगों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए मैंने अपने जीवन का त्याग किया है."

इंटरनेट पर आज़ादी के सवाल पर तसलीमा कहती हैं, "यह अच्छी बात है कि अब हमारे पास इंटरनेट है. हम खुलकर अपनी बात रख सकते हैं और कोई हमारे लेखन, राय या विचारों को सेंसर नहीं कर सकता. यह एक खुले समाज के लिए बहुत अच्छा है. सभी लोग अपनी राय रख सकते हैं. एक सभ्य समाज में अपनी राय रखने के लिए किसी को सज़ा नहीं दी जानी चाहिए, भले ही उसकी राय कुछ भी हो."

तसलीमा पर इससे पहले भी मामले दर्ज हुए हैं. उन्हें जान से मारने तक की धमकियाँ मिली हैं. तो क्या इस एफ़आईआर के बाद तसलीमा के लेखन में बदलाव आएगा.

इस बारे में स्वयं तसलीमा कहती हैं, "मुझे जो सही लगता है मैं उसे पूरी स्वतंत्रता से लिखती रहूंगी. मैं एक प्रजातंत्र में रहती हूँ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बराबरी में यक़ीन रखती हूँ. मैं कभी भी अपने आप को वो लिखने से नहीं रोकूंगी जिसे मैं सही मानती हूँ. मैं हमेशा से खुलकर लिखती रहूं हूँ. मुझे मेरे देश से बाहर भेज दिया गया. मैं निर्वासित होकर रह रही हूँ, फिर भी मैंने सच लिखने से कभी भी ख़ुद को नहीं रोका."

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