आम आदमी पार्टी के सिकंदर निकले ये पांच

अरविंद केजरीवाल और कुमार विश्वास

दिल्ली में हुए में विधानसभा चुनाव में जहाँ शीला दीक्षित, एके वालिया, किरण वालिया, राज कुमार चौहान और योगानंद शास्त्री जैसे धुरंधरों को शिकस्त मिली वहीँ आम आदमी पार्टी के कुछ अंजान से चेहरे जीत के बाद एकाएक लोकप्रियता के पायदान चढ़ रहे हैं.

विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली 70 में से 28 सीटों में से निश्चित तौर पर सबसे बड़ी विजय ख़ुद अरविंद केजरीवाल की बताई जा रही है.

इनके अलावा भी आप के कुछ उम्मीदवार थे जिन्होंने अपने चुनाव क्षेत्रों में छाप छोड़ी है. एक नज़र ऐसे ही पांच चेहरों पर:

राखी बिड़ला

दिल्ली में मंगोलपुरी विधानसभा सीट हमेशा से ही कांग्रेस के कद्दावर नेता राज कुमार चौहान का गढ़ मानी जाती रही है. लेकिन अब नहीं.

आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव क्षेत्र से एक महिला पत्रकार को मैदान में उतारा जिनका नाम है राखी बिड़ला.

राखी एक निजी न्यूज़ चैनल के लिए काम करतीं थी और उन्होंने इस विधानसभा चुनाव में वो कर दिखाया जो पिछले चार चुनावों में कोई नहीं कर सका था. यानी राज कुमार चौहान को अपनी पांचवी चुनावी जंग में हार का सामना करना पड़ा और वो भी करीब दस हज़ार वोटों के अंतर से.

पत्रकारिता में अपने करियर के साथ-साथ राखी बिड़ला कई सामाजिक संस्थानों से भी जुड़ी रहीं और वाल्मीकि समाज के लिए भी उन्होंने काफी काम किया है.

26 वर्षीय राखी ने जीत के बाद पत्रकारों को बताया कि उन्हें अपनी जीत का भरोसा था और उनके चुनाव क्षेत्र में बहुत बेहतर काम करने की गुंजाइश है.

कमांडो सुरेन्द्र सिंह

सुरेन्द्र सिंह ने चुनावी मैदान में भी वही करने की कोशिश की जो उन्होंने जंग के मैदान में की थी.

सुरेन्द्र सिंह भारतीय सेना के पूर्व कमांडो हैं जो कारगिल और ऑपरेशन 'पराक्रम' जैसी अहम फौजी मुहिमों का हिस्सा रहे हैं.

उन्होंने भाजपा की एक मज़बूत कही जाने वाली दिल्ली कैंट सीट पर भाजपा के प्रत्याशी को परास्त किया.

क्षेत्र में चुनावी अभियान से पहले अंजान से इस शख्स ने मुंबई में हुए चरमपंथी हमले के दौरान ताज होटल में हुई जवाबी कार्रवाई में भाग लिया था. इस ऑपरेशन का नाम था 'ब्लैक थंडर'.

चुनाव के दौरान अपने फ़ेसबुक पेज पर उन्होंने अपने क्षेत्र में पानी की बेहतर सुविधाएं दिलाने और सफाई व्यवस्था को ज़्यादा कारगर बनाने जैसे मुद्दे आम लोगों तक पहुंचाए.

इनकी जीत से भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा क्योंकि वोटों की गिनती के दौरान मुक़ाबला बराबरी पर चलते चलते आखिरी राउंड तक गया और सुरेन्द्र सिंह को जीत मिली.

प्रकाश

25 वर्षीय प्रकाश 2013 के दिल्ली विधान सभा चुनावों से पहले गुड़गांव की एक मल्टीनैशनल कंपनी में बतौर सहायक प्रबंधक काम करते थे.

अब वे देवली विधानसभा सीट से विधायक हैं.

अपने चुनाव क्षेत्र में 50 हज़ार से ज़्यादा वोट लेकर विजयी हुए प्रकाश आप पार्टी के सबसे कम उम्र के विधायक हैं.

अपने स्कूली दिनों से ही प्रकाश कई जागरूकता अभियानों का हिस्सा रह चुके हैं.

अपने इलाके में उन लोगों की मदद करना एक तरह से प्रकाश का मिशन रहा है, जिन तक सरकारी योजनाएं पहुँच नहीं पातीं.

इनके मुताबिक़ इन्होंने उन गरीब लोगों की ख़ास तौर पर मदद की है जिन्हें वोटर आईडी, नए बैंक खाते और राशन कार्ड बनवाने में दिक्कतें आती रहीं हैं.

जीत के बाद प्रकाश ने कहा कि असल परीक्षा अभी बाकी है और मिशन तभी पूरा होगा जब उनकी पार्टी विपक्ष की भूमिका को बखूबी निभाएगी.

इसी जुनून के चलते प्रकाश ने अपनी जमी जमाई नौकरी छोड़ दी और आप पार्टी में शामिल हो गए थे.

संजीव झा

35 वर्ष के संजीव झा कई अन्य युवाओं की तरह एक ज़माने में दिल्ली आए थे ताकि सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट सके.

आज की तारीख़ में संजीव दिल्ली की बुराड़ी विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के विधायक है.

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कृष्ण को 10 हज़ार से भी ज्यादा मतों के अंतर से हराने वाले संजीव झा अपने दोस्तों के साथ मिल कर पिछले 15 वर्षों से दिल्ली के पिछड़े इलाकों में रहने वाले बच्चों को स्कूली शिक्षा मुहैया करवाने की मुहिम में जुटे रहे हैं.

इन्होने 'नवपल्लव' नामक एक संस्था का गठन भी किया है जिसका प्रमुख उद्देश्य है दूसरे राज्यों से नौकरी की तलाश में आने वाले युवाओं का मार्ग-दर्शन करना.

जन लोकपाल आंदोलन के समय संजीव अरविन्द केजरीवाल से जुड़े और उन्हें लगता है कि जनता ने उन पर जो भरोसा जताया है, उसके चलते वो जनता की ज़रूरतों को पूरा करने की कोशिश करेंगे.

मनीष सिसोदिया

जन लोकपाल आंदोलन के समय मनीष सिसोदिया एक आक्रामक नेता के तौर पर उभरे थे.

अब वे पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज चुनाव क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के विधायक हैं.

इलाके में इनकी भिडंत भाजपा के नकुल भारद्वाज और कांग्रेस के अनिल कुमार से थी.

मनीष को कुल 50,211 वोट मिले और नकुल भारद्वाज से इनकी जीत का फ़ासला पूरे 11,476 वोटों का रहा.

पेशे से पत्रकार रहे मनीष सिसोदिया एक निजी टेलीविज़न चैनल के अलावा ऑल इंडिया रेडियो से भी एक लंबे समय तक जुड़े रहे और सूचना के अधिकार कानून की पैरवी भी इन्होंने एक लंबे समय तक की है.

केंद्र सरकार में कथित भ्रष्ट मंत्रियों के ख़िलाफ़ चलाए गए एक आंदोलन के तहत मनीष ने 10 का आमरण अनशन भी किया था.

इससे पहले अन्ना हज़ारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान मनीष उनके साथ जेल भी गए थे.

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