पाकिस्तान को बिजली दे पाएगा भारतीय पंजाब?

पंजाब, बिजली

पंजाब और हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ में इन दिनों हर रोज़ बड़े उद्योगपतियों के विमान उतरते हैं, जिनमें ज़्यादातर का इरादा निवेश का होता है.

पंजाब सरकार का दावा है कि पंजाब 'पावर सरप्लस स्टेट' (खपत से ज़्यादा बिजली उत्पादन करने वाला राज्य) बनने जा रहा है. इसी से देश-विदेश के उद्योग आकर्षित हो रहे हैं.

हालांकि, विपक्ष पंजाब सरकार के इन दावों पर सवाल उठा रहा है.

पंजाब में अभी मित्तल, वेदांता, एल-एंड-टी और जीवीके ऐसे प्रमुख औद्योगिक समूह हैं जो अपने पावर प्लांट का निर्माण और बिजली उत्पादन शुरू करने में जुटे हैं.

पंजाब सरकार का दावा है कि कोल लिंक और रेल लिंक की समस्या दूर होते ही करीब 1500 मेगावाट बिजली का उत्पादन तुरंत शुरू हो जाएगा.

बीती गर्मियों में ही पंजाब सरकार ने 2,000 करोड़ रुपए से ज़्यादा की बिजली अन्य राज्यों से खरीदी है क्योंकि गर्मियों में धान की खेती के लिए किसानों को काफ़ी ज़्यादा बिजली की ज़रूरत होती है.

चुनाव की तैयारी

Image caption पंजाब सरकार का दावा है कि पंजाब जल्दी ही पावर सरप्लस राज्य बन जाएगा.

पंजाब में प्रति व्यक्ति घरेलू बिजली की खपत भी देश में सबसे ज़्यादा है. इस वजह से मांग और उत्पादन में अंतर 30 फ़ीसदी तक है.

नवंबर के आखिरी सप्ताह में तलवंडी साबो प्रोजेक्ट की पहली यूनिट का उद्घाटन किया गया और रविवार 8 दिसंबर को राजपुरा में एल-एंड-टी पावर प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया गया.

पर्यवेक्षकों के अनुसार आने वाले लोकसभा चुनावों से पहले ही इन बिजलीघरों में उत्पादन शुरू कर पंजाब सरकार एक बड़ी चुनावी उपलब्धि का ज़ोर-शोर से प्रचार करना चाहती है. यही वजह है कि इन कंपनियों पर जल्द से जल्द प्रोजेक्ट पूरे कर उत्पादन शुरू करने का भी दबाव डाला जा रहा है.

पंजाब सरकार के उत्साह का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कंपनियों के हित को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार अपने स्तर पर केंद्रीय कोयला मंत्री को पत्र लिखकर इन बिजलीघरों को तुरंत कोल लिंक देकर कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के भी प्रयास कर रही है.

पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल कहते हैं, "पिछले साल उद्योगों को एकाध दिन के शेड्यूल कट का सामना करना पड़ा था, इस बार वो भी नहीं रहेगा. तलवंडी साबो प्रोजेक्ट की एक यूनिट शुरू हो चुकी है और राजपुरा में भी एक यूनिट जनवरी तक शुरू हो जाएगी."

सुखबीर उम्मीद जताते हैं, "सर्दी में वैसे ही बिजली की कमी नहीं होती और आने वाली गर्मियों तक तो पंजाब बिजली सरप्लस स्टेट हो जाएगा. ऐसे में उद्योगों को इससे बेहतर विकल्प कहां मिलेगा? वे पंजाब में ज़रूर निवेश करेंगे."

बिजली से कमाई

Image caption राज्य सरकार का कहना है कि अब उद्योगों को बिजली कटौती का सामना नहीं करना पड़ेगा.

पंजाब सरकार को भाखड़ा बांध से सिर्फ 10 पैसे प्रति यूनिट की उत्पादन लागत पर बिजली मिल रही है. वहीं अन्य थर्मल यूनिट और निजी कंपनियों से महंगी खरीद के बावजूद औसत खरीद प्रति यूनिट 3 रुपए के आसपास पड़ रही है.

वहीं बिक्री का औसत मूल्य ही 4 रुपए प्रति यूनिट से अधिक है. सबसे अधिक मार किसानों को मुफ्त बिजली और दलित परिवारों को 100 यूनिट प्रति माह फ्री बिजली देने के कारण सब्सिडी के तौर पर पड़ रही है. इससे बिजली बोर्ड खस्ता आर्थिक हालात में हैं.

सरप्लस बिजली होने पर पंजाब सरकार को इन कंपनियों से 2.90 रुपए प्रति यूनिट की दर से मिलने वाली सरप्लस बिजली को अन्य जरूरतमंद राज्यों या पाकिस्तान को बेचने पर मुनाफा भी मिल सकता है. हालांकि ये अभी दूर की कौड़ी है लेकिन इस पर विचार ज़रूर किया जा रहा है.

पंजाब सरकार का कहना है कि इस साल गर्मी में उद्योगों को एक दिन के कट का ही सामना करना पड़ा और निजी बिजली कंपनियों से बिजली की खरीद की छूट के चलते उद्योगों को ज़्यादा परेशानी भी नहीं हुई.

पंजाब सरकार का ये भी दावा है कि अगले साल तक बिजली उत्पादन बढ़ने और देश में ही बिजली कारोबार बढ़ने की छूट से बड़े उद्योगों को अपने स्तर पर बिजली खरीद की छूट भी रहेगी, ऐसे में बहुत हद तक संभव है कि पंजाब में आम लोगों के साथ ही उद्योगों के लिए भी बिजली की कमी नहीं रहेगी.

पंजाब सरकार ये भी दावा करती है कि बीते दशकों में ये पहला साल था जब गर्मियों में रिहायशी क्षेत्रों में बिजली को लेकर कोई भी शेड्यूल कट नहीं लगाया गया. उद्योगों के लिए भी एक दिन का शटडाउन था.

'सच का अंदाज़ा मुश्किल'

लेकिन पंजाब में विपक्ष सरकार के इन दावों से सहमत नहीं है. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार के दावों की परख अभी बाकी है.

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा कहते हैं, "पंजाब सरकार ने राज्य के कारोबारियों पर टैक्स का बोझ लाद दिया है और उद्योग राज्य से बाहर जा रहे हैं. ऐसे में सरप्लस बिजली का सब्ज़बाग भी उद्योगों को आकर्षित करने में सफल नहीं रहेगा."

बाजवा कहते हैं कि पिछली गर्मियों में भी पंजाब में बिजली की कमी बनी रही है और उद्योगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ा. 'ऐसे में सरकार अभी भी कितना सच बोल रही है, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है.'

पंजाब सरकार का कहना है कि वो उद्योगों को कई सुविधाएं दे रही है, इनमें सिंगल विंडो क्लीयरेंस से लेकर कर छूट तक शामिल हैं. वहीं ज़मीन भी उच्चतम दरों से करीब 30 फ़ीसदी कम भाव पर उपलब्ध है.

पंजाब के बिजली सचिव अनिरुद्ध तिवारी कहते हैं, "नए पावर प्लांट को देश के प्रमुख औद्योगिक समूहों ने लगाया है और करीब 25 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है. पंजाब औद्योगिक पथ पर आगे बढऩे के लिए तैयार है और विद्युत उत्पादन बढ़ने से उद्योगों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी."

पंजाब सरकार के दावे भले ही ऊंचे हों लेकिन ये सब इतना आसान नहीं लगता. बिजलीघरों की भी अपनी समस्याएं हैं.

तलवंडी साबो प्रोजेक्ट को कोल लिंक मिला है लेकिन पर्याप्त कोयले की आपूर्ति नहीं हो रही है.

राजपुरा प्लांट को कोल लिंक नहीं मिला है, प्लांट जनवरी तक तैयार होगा और इससे उत्पादन में देरी संभव है.

पंजाब में गोइंदवाल प्रोजेक्ट तैयार है लेकिन रेल लिंक नहीं मिला है और इसलिए उत्पादन में देरी हो सकती है.

'पाकिस्तान को बिजली'

पाकिस्तान में बिजली की भयंकर कमी है और भारत आसानी से 500 मेगावाट बिजली पाकिस्तान को दे सकता है. केंद्र सरकार और पंजाब सरकार के अधिकारियों की पाकिस्तानी अधिकारियों से पहले ही तीन दौर की बातचीत हो चुकी है. बिजली की आपूर्ति के लिए अमृतसर और लाहौर के बीच पावर ग्रिड स्थापित करने की भी तैयारी है.

इसे लेकर बातचीत काफी आगे भी बढ़ी लेकिन बीते दो माह से ये बातचीत ठप है.

समस्या ग्रिड को लेकर है क्योंकि भारत नहीं चाहता कि वो पाकिस्तान को सीधे अपने नेशनल ग्रिड से बिजली दे. इसके लिए अमृतसर में एक सब-ग्रिड बनाया जाना है. इस ग्रिड को बनाने में ही तीन साल का समय लगेगा और समझौते पर अभी दस्तखत भी नहीं हुए हैं.

दरअसल पाकिस्तान हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट के लिए डायरेक्ट लिंक चाहता है ताकि बिजली ख़रीद का काम तेज़ी से हो सके. वहीं पाकिस्तान में भारत से बिजली न खरीदने का राजनीतिक दबाव भी है.

ऐसे में भारत का पंजाब भले ही जल्दी ही पावर सरप्लस राज्य हो भी जाए अभी पाकिस्तानी पंजाब को बिजली की सप्लाई में कई अड़चनें हैं.

(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें. आप हमारे फ़ेसबुक पन्ने पर भी आ सकते हैं और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार