'आतंकवाद के मुक़दमे नहीं हटा सकती यूपी सरकार'

अखिलेश यादव
Image caption हाईकोर्ट का फ़ैसला उत्तर प्रदेश सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार को झटका देते हुए कहा है कि राज्य सरकार केंद्रीय क़ानून के तहत चल रहे आतंकवाद से संबंधित मुक़दमों को केंद्र सरकार से पूछे बिना वापस नहीं ले सकती.

हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के न्यायाधीश देवी प्रसाद सिंह, अजय लांबा और अशोक पाल सिंह की एक बेंच ने गुरुवार को यह व्यवस्था दी.

रंजना अग्निहोत्री और पांच अन्य स्थानीय वकीलों की ओर से इस मामले में दायर एक जनहित याचिका पर एक दो सदस्यीय पीठ के सवाल उठाए जाने के बाद तीन सदस्यीय पीठ ने यह व्यवस्था दी.

याचिका में अदालत से उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से आतंकवादी गतिविधियों और सिलसिलेवार बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ्तार लोगों के ख़िलाफ़ चल रहे मुक़दमे वापस लेने के उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश को ख़ारिज करने की अपील की गई थी.

केंद्र सरकार की मंज़ूरी

समाचार एजेंसियों के मुताबिक़ याचिका पर फैसला सुनाते हुए तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा, ''केंद्रीय क़ानून के तहत चल रहे मुक़दमों को केंद्र सरकार की इजाज़त के बिना नहीं वापस नहीं लिया जा सकता.''

अदालत ने कहा, ''ग़ैरक़ानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के अध्याय छह के तहत दर्ज मामले केंद्र सरकार के विशेषाधिकार हैं. इसलिए इस तरह के मामलों को वापस लेने के लिए केंद्र सरकार की मंज़ूरी ज़रूरी है.''

खंडपीठ ने यह भी कहा कि बिना कारण बताए मुक़दमों को वापस नहीं लिया जा सकता है.

अदालत ने कहा कि अगर आतंकवाद और देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने से जुड़े मामलों को वापस लेने के लिए आवेदन किया जाता है तो उसके लिए विशेष और विशिष्ट कारण बताना होगा.

आतंकवादी गतिविधियों में शामिल लोगों पर से मुक़दमे हटाने से संबंधित उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश पर हाई कोर्ट ने सात जून को स्थगन आदेश देकर न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश महेंद्र दयाल की पीठ ने मामले को सुनवाई के लिए बड़ी पीठ को भेज दिया था.

दो न्यायाधीशों की पीठ ने पूछा था कि राज्य सरकार सरकारी वकील से पूछे बिना मुक़दमों को उठाने के बारे में कोई आदेश जारी कर सकती है?

बेंच ने यह भी सवाल उठाया था कि क्या केंद्रीय क़ानून के तहत चल रहे मामलों को राज्य सरकार केंद्र सरकार की इजाज़त लिए बिना उठा सकती है?

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