अन्ना कांग्रेस-भाजपा समर्थकों से घिरे हैं: प्रशांत भूषण

अन्ना हजारे
Image caption अन्ना हज़ारे अपने गांव रालेगण सिद्धि में अनशन पर बैठे हैं

आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण ने कहा है कि समाजसेवी अन्ना हज़ारे कांग्रेस और भाजपा से जुड़े नेताओं से घिरे हैं जो उन पर सरकारी लोकपाल का समर्थन करने के लिए दबाव डाल रहे हैं.

बीबीसी हिंदी के कार्यक्रम इंडिया बोल ने उन्होंने कहा, “आज दुर्भाग्य से ऐसी स्थिति हो गई है कि अन्ना का हमसे संपर्क लगभग टूट गया है. उन्हें ऐसे लोगों ने घेर रखा है जो भाजपा और कांग्रेस के साथ जुड़े हुए हैं. जैसे वीके सिंह. किरण बेदी भी कुछ हद तक भाजपा के साथ जुड़ चुकी हैं.”

सरकार ने लोकपाल बिल शुक्रवार को राज्यसभा में पेश किया जिस पर सोमवार को चर्चा होनी है. लोकसभा में इसे पहले ही पारित किया जा चुका है. कांग्रेस और भाजपा इसका समर्थन कर रहे हैं, ऐसे में राज्यसभा में इसे पास करने में कोई मुश्किल नहीं होनी चाहिए.

प्रशांत भूषण के मुताबिक अन्ना से कहा जा रहा है कि जिस लोकपाल बिल को सरकार ला रही, वो उसका समर्थन करें जबकि ये उस जनलोकपाल के बिल्कुल विपरीत है जिसके लिए अन्ना हजारे अनशन पर बैठे थे.

'राष्ट्रीय हित का मुद्दा'

प्रशांत भूषण ने कहा कि जो तीन मांगें संसद ने मान ली थी, उन्हें भी इसमें जगह नहीं दी गई है. लेकिन फिर भी जिन शक्तियों ने उन्हें घेर लिया है, वो उन्हें इसका समर्थन करने को कह रही हैं.

इससे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि उनकी पार्टी लोकपाल बिल पर प्रतिबद्ध है और इसे पारित करने के लिए सब पार्टियों का साथ चाहिए.

राहुल गांधी ने कहा, "लोकपाल कानून पर चर्चा काफी समय से चल रही है. ये मजबूत बिल है और इसमें भ्रष्टाचार के मुद्दे पर पारदर्शी तरीके से ध्यान दिया गया है. "

उन्होंने कहा कि 'अगर सब पार्टियों का समर्थन मिला तो हम इसे पारित करेंगे'. उन्होंने कहा कि ये राष्ट्रीय हित का मुद्दा है.

राहुल गांधी के साथ मौजूद वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि ये एक प्रभावी लोकपाल है और लोकपाल के तहत की जाने वाली जांच से सरकार का कोई लेना-देना नहीं होगा.

वहीं कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि लोकपाल विधेयक में साफ किया गया है कि सीबीआई उसके साथ मिलकर किस तरह काम करेगी, लेकिन सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति लोकपाल के जरिए नहीं की जाएगी. उसकी अलग प्रक्रिया है और उसे ही जारी रखा जाएगा.

सिब्बल ने कहा, "सीबीआई लोकपाल के अधीन काम करेगी."

दिल्ली की गुत्थी

दिल्ली में सरकार के गठन पर प्रशांत भूषण ने कहा, “अब हमको अगर कोई सरकार बनाने के लिए समर्थन दे रहा है तो हम सिर्फ मुख्यमंत्री बनने के लिए तो नहीं उतरे हैं. हम उनसे समझना चाहते हैं कि सरकार बनाने का मतलब क्या है.”

कांग्रेस ने कहा है कि आम आदमी पार्टी अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है जबकि भारतीय जनता पार्टी का कहना है कि आप अपनी शर्तें दूसरे पार्टियों पर थोप रही है.

कांग्रेस आम आदमी पार्टी को बिना शर्त समर्थन जबकि भाजपा सशर्त समर्थन देने का वादा कर रही है लेकिन आप ने कांग्रेस और भाजपा के सामने 18 मांगें रखी हैं जिन पर सहमति के बाद ही वो समर्थन लेगी.

इनमें दिल्ली में वीआईपी कल्चर बंद करना, जनलोकपाल बिल पारित करना, दिल्ली में स्वराज की स्थापना, दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा, महिलाओं को सुरक्षा के लिए विशेष बल बनाना और झुग्गी बस्तियों में रहने वालों को पक्के मकान देना जैसी बातें शामिल हैं.

प्रशांत भूषण ने कहा, “देश को बचाने के लिए इस व्यवस्था में मूलभूत परिवर्तन करने बहुत ज़रूरी हैं, इसलिए हमने एक पार्टी बनानी पड़ी और चुनावी दलदल में उतरना पड़ा.”

दूसरी तरफ आप के नेता कुमार विश्वास ने कहा, "हम भाजपा और कांग्रेस की भ्रष्टाचारी राजनीति के विरोध में आए हैं. अब तक सत्ता के लिए सरकारें बनती थीं पहली बार ऐसा हो रहा है कि सरकार मुद्दों और सिद्धांतों के आधार पर बन रही है."

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