महिलाएं और धर्म: बीबीसी हिंदी का गूगल हैंगआउट

दिल्ली बलात्कार कांड के एक साल बाद क्या बदला है इसी का जायज़ा लेने की मंशा से बीबीसी हिंदी ने पिछले एक हफ्ते आप तक पहुंचाईं वो कहानियों और वो मुद्दे जो औरतों के संघर्ष और उनके अधिकारों की कहानी कहती हैं.

इस दौरान बीबीसी हिंदी के फेसबुक पन्ने पर पाठकों से लगातार बातचीत हुई और कई कहानियां हैं जिन्हें आपने सराहा.

इन मुद्दों पर बहस अभी बाकी है और ये चर्चा की शुरुआत भर है, लेकिन इस बहस को आगे ले जाने के लिए बीबीसी के अपने पाठकों और श्रोताओँ के लिए आज यानी मंगलवार शाम 7:15 पर हम करेंगे एक गूगल हैंगआउट.

हैंगआउट देखने के लिए यहाँ क्लिक करें-

हैंगआउट पर बहस का मुद्दा है कि क्या धर्म नारीवाद के खिलाफ़ है?

क्या भारत में प्रचलित धर्म पितृसत्तात्मक विचारों को बढ़ावा देते हैं? या फिर धर्म सबके लिए एक समान है और स्त्री-पुरुष को लेकर कोई भेदभाव नहीं करता. सवाल ये भी कि क्या भारत के मुक़ाबले दुनिया के कुछ अन्य धर्म और पंथ महिलाओं के अधिकारों को लेकर ज़्यादा लचीले और सजग हैं.

गूगल हैंगआउट में हमारे साथ शामिल होंगे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य ज़फ़रयाब जिलानी, भारती श्रीपीठम् के कुलपति स्वामी सर्वानन्द सरस्वत, तर्कवादी समूह के प्रतिनिधी अमिताभ पांडेय, नारीवाद और महिलाओँ के अधिकारों पर काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता रंजना कुमारी, फिल्म अभिनेत्री स्वरा भास्कर और बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली नौकरीपेशा महिला भारती अली.

हैंगआउट में शामिल होने के लिए आप अपने सवाल @BBCHindi पर ट्वीट कर सकते हैं या फिर बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पेज पर सवाल पोस्ट कर सकते हैं. अगर आप चाहें तो अपने संपर्क की जानकारी भी यहाँ दे सकते हैं.

आप इससे पहले भी हमारे कई हैंगआउट्स से जुड़ चुके हैं. हम बीबीसी हिंदी के फेसबुक पन्ने पर शाम सात बजे से इस बहस को आपके लिए लाइव जारी करेंगे.

आप बीबीसी इंडिया के गूगल प्लस पेज और यूट्यूब पर ये हैंगआउट लाइव देख सकेंगे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

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