संसद में भी गूँजा देवयानी का मुद्दा, माफ़ी की मांग

अमरीका में भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े की गिरफ़्तारी और उनके साथ कथित दुर्व्यवहार के मुद्दे की गूंज बुधवार को राज्यसभा में सुनाई दी और सभी पार्टियों ने एक सुर में इसकी निंदा की.

विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि देवयानी खोबरागड़े की सकुशल वापसी और गरिमा बहाल करना उनकी जिम्मेदारी है.

देवयानी को अपनी नौकरानी के वीज़ा के लिए फ़र्ज़ी दस्तावेज़ देने के आरोप में हथकड़ी लगाकर गिरफ़्तार किया गया और निर्वस्त्र कर उनकी तलाशी ली गई.

भारत ने इस मुद्दे पर कड़ा विरोध जताया है जबकि अमरीका का कहना है कि इस मामले में नियमों को मुताबिक ही कार्रवाई हुई है.

'एक सुर में बोलिए'

बुधवार को राज्य सभा में भारतीय राजनयिक की गिरफ़्तारी पर हुई चर्चा के दौरान सलमान खुर्शीद ने कहा, "उन्हें वापस लाना मेरी ज़िम्मेदारी है और हमें उनकी गरिमा बहाल करनी होगी और मैं ये हर क़ीमत पर करूंगा."

उन्होंने कहा कि इस विषय पर सत्ता पक्ष और विपक्ष को सदन में और सदन के बाहर या मीडिया में एक सुर में बोलना होगा.

ख़ुर्शीद ने कहा, "हमें अपने देश की भावना को व्यक्त करना होगा. इस मुद्दे पर हम अलग-अलग राय नहीं व्यक्त कर सकते हैं. अगर हमने ऐसा नहीं किया तो यह देश हित में नहीं होगा."

उन्होंने कहा कि अमरीका ने भारतीय राजनयिक के साथ जो किया है, वह किसी भी क़ीमत पर स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा कि इसकी ख़बर आते ही सरकार ने उचित माध्यमों पर तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त की.

विदेश मंत्री ने कहा कि उनका मंत्रालय भारतीय राजनयिक को अमरीका में हर संभव क़ानूनी और अन्य तरह की मदद पहुँचाने का प्रयास कर रहा है.

षडयंत्र की आशंका

Image caption विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि इस मामले में अमरीका से उसे कोई सहयोग नहीं मिला है.

उन्होंने इस पूरे मामले को एक षडयंत्र बताया. उन्होंने कहा कि शिकायत दर्ज कराने वाली महिला को लेकर कई बार अमरीकी अधिकारियों और दूतावासों में अपनी शिकायत दर्ज कराई गई लेकिन वहाँ से कोई सहयोग नहीं मिला.

विदेश मंत्री ने सदन को इस मामले के सामने आने के बाद उठाए गए क़दमों की जानकारी दी. उन्होंने कहा किसी भी अमरीकी राजनयिक को नया परिचय पत्र जारी नहीं किया जाएगा और उन्हें सामान के कर मुक्त आयात की इजाज़त नहीं दी जाएगी.

इससे पहले राज्य सभा में सदस्यों ने इस मामले को देश का अपमान बताते हुए सरकार से कड़े क़दम उठाने की मांग की. सदस्यों की मांग थी कि इस मामले में राजनयिक पर दर्ज मामला वापस लिया जाए और इसके लिए अमरीका माफ़ी मांगे.

माफ़ी की मांग

चर्चा की शुरुआत राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने की. उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की.

जनता दल यूनाइटेड के शिवानंद तिवारी ने कहा कि अमरीका में भारतीय राजनयिक के साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ है, वह वियना समझौते का उल्लंघन है.

सरकार की प्रतिक्रिया का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि पहली बार सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि देवयानी खोबरागड़े पर दर्ज मामले को वापस लेते हुए अमरीका को देश से माफी मांगनी चाहिए.

समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने कहा कि इस घटना के बाद पूरे देश में रोष है. उन्होंने कहा कि अमरीका में इस तरह की पहली घटना नहीं है, वहाँ इस तरह का व्यवहार पहले जार्ज फर्नांडीज़, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, फ़िल्म अभिनेता शाहरुख़ ख़ान और उत्तर प्रदेश के मंत्री आज़म ख़ान के साथ भी हो चुकी हैं.

उन्होंने कहा कि पहले हुई इस तरह की घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया न देने की वजह से ही अमरीका ने यह हरकत फिर की है.

उन्होंने कहा, "जब तक हम अमरीका को बड़ा मानने की हीन ग्रंथी से मुक्त नहीं होंगे, तबत इस तरह की घटनाएं होती रहेंगी."

'देश का अपमान'

अन्नाद्रमुक की डॉक्टर मैत्रेयी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं पाकिस्तान, श्रीलंका और अमरीका में पहले भी होती रही हैं. "लेकिन हमने कभी कड़ी प्रतिक्रिया नहीं जताई."

उन्होंने अमरीकी प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता से इनकार करने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की.

Image caption इस घटना से भारत और अमरीका के संबंधों पर असर पड़ सकता है.

वहीं द्रमुक की कनिमोडी ने इस घटना की आलोचना करते हुए तमिल मछुआरों के श्रीलंका में हो रही गिरफ़्तारी का मुद्दा उठाया.

बीजू जनता दल के शशिभूषण बेहरा ने इस घटना को दुखद बताते हुए कहा कि इससे देश अपमानित महसूस कर रहा है.

उन्होंने कहा, "इसके लिए अमरीका को भारत से माफी मांगनी चाहिए." उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में द्विपक्षीय रिश्तों को प्रभावित किए बिना कार्रवाई करनी चाहिए.

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तारिक अनवर ने कहा कि वे एक केंद्रीय मंत्री के साथ नवंबर 2003 में अमरीका गए थे, उस समय भी सबके कपड़े उतारकर तलाशी ली गई थी. इस संबंध में जब उन्होंने भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों से कहा तो उन्होंने कुछ कर पाने में असमर्थता जताई.

इस चर्चा में शिवसेना के संजय राउत के अलावा शिरोमणी अकाली दल के नरेश गुजराल, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रेमचंद्र गुप्ता, लोजपा के रामविलास पासवान और कुछ अन्य सदस्यों ने भाग लिया.

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