'आप' को और वक़्त देने को तैयार केंद्र: शिंदे

सुशील कुमार शिंदे

दिल्ली में सरकार बनाने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए केंद्र अभी आम आदमी पार्टी को कुछ और दिनों की मोहलत देगा. केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने ये बयान दिया है.

दिल्ली विधानसभा चुनाव में जनता ने किसी भी दल को स्पष्ट जनादेश नहीं दिया है. इसके बाद से ही यहां राजनीतिक अस्थिरता का माहौल जारी है.

गृहमंत्री शिंदे ने पत्रकारों को बताया कि केंद्र सरकार ने उपराज्यपाल नजीब जंग से पूछा है कि दिल्ली में सरकार के गठन के लिए 'आप' अब और कितना वक्त लेगी?

उन्होंने कहा, "हम दिल्ली में सरकार बनाने के लिए 'आप' को कुछ दिन और देंगे. लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अंतर्गत इसकी व्यवस्था है."

शिंदे के इस बयान से ये बात तो स्पष्ट हो जाती है कि केंद्र सरकार दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू करने की हड़बड़ी में नहीं हैं और वो 'आप' का कम से कम सोमवार तक इंतजार करेगी.

गेंद 'आप' के पाले में

Image caption 'आप' ने समर्थकों के बीच इस पर जनमत संग्रह कराने का फ़ैसला किया है

दिल्ली विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीती 'आप' अपने फैसले के अनुसार आम जनता से राय ले रही है कि वह सरकार बनाए या नहीं. इसके बाद ही वह अपना फैसला बताएगी.

आठ विधायकों वाली कांग्रेस के 'आप' को बाहर से समर्थन देने की घोषणा के बाद पार्टी ने दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग से और वक्त मांगा था.

पार्टी ने कांग्रेस और भाजपा के समर्थन से सरकार बनाने के विकल्पों पर सोचने के पहले दोनों दलों के सामने 18 मुद्दे रखे थे. कांग्रेस ने यह कहते हुए गेंद 'आप' के पाले में डाल दी थी कि 18 में से 16 मुद्दे प्रशासनिक हैं. इनका संसद या विधान सभा से कोई लेना-देना नहीं है.

हालांकि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा है कि वे दिल्ली की जनता को चिट्ठी लिखकर सरकार बनाने के बारे में उनकी राय लेंगे. केजरीवाल इस चिट्ठी की 25 लाख प्रतियां जनता में बांटेंगे. इसके लिए पार्टी ने रविवार तक की समय सीमा तय की है.

70 सीटों वाले विधान सभा में भाजपा (31) और इसके सहयोगी अकाली दल (1) के पास 32 सीटें हैं. ये आंकड़ा बहुमत से चार अंक कम है. जबकि 'आप' के पास 28 सीटें हैं.

उपराज्यपाल ने पहले दिल्ली में अन्य विकल्पों के बीच राष्ट्रपति शासन लगाने और विधान सभा भंग रखने का सुझाव दिया था.

नजीब जंग ने दिल्ली की अकेली सबसे बड़ी पार्टी भाजपा से विचार विमर्श करने के बाद राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट दी है. इस रिपोर्ट में जो विकल्प बताए गए हैं उनमें से एक है केंद्र सरकार का शासन लागू करना.

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