आप के फ़ैसले से चढ़ा दिल्ली का राजनीतिक तापमान

  • 23 दिसंबर 2013
अरविंद केजरीवाल

आम आदमी पार्टी ने जैसे ही दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर अपनी सहमति दी, राजनीतिक सरगर्मी एकाएक तेज़ हो गई है. पार्टी ने राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक के बाद ये घोषणा की कि जनमत का ख़्याल करते हुए दिल्ली में सरकार बनाई जाएगी और अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री होंगे.

इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग से मुलाक़ात करके सरकार बनाने का दावा पेश किया. नजीब जंग ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है और राष्ट्रपति की सहमति मिलने के बाद केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी. उम्मीद है कि 26 दिसंबर को वे रामलीला मैदान में अपने मंत्रिमंडल के साथ शपथ लेंगे.

लेकिन इस बीच राजनीतिक बयानबाज़ी ने नया रंग ले लिया है. कांग्रेस के सुर भी थोड़े बदले नज़र आए, तो भाजपा ने इस गठबंधन पर ही सवाल उठा दिए. कांग्रेस ने कहा कि समर्थन बिना शर्त नहीं और आम आदमी पार्टीअपने वादों को पूरा करने के लिए समयसीमा निर्धारित करे.

लेकिन आप को सबसे तगड़ा झटका उस समय लगा, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रशांत भूषण ने ही इस पर संदेह जताया कि ये सरकार कितने दिन चलेगी. दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने भी बाद में ये स्पष्ट किया कि पार्टी कांग्रेस के समर्थन से सरकार नहीं बना रही है, बल्कि जनता की राय का सम्मान करते हुए ऐसा कर रही है.

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी 28 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी. भारतीय जनता पार्टी को 31 सीटें मिली थी, जबकि अकाली दल ने एक सीट पर जीत हासिल की थी. कांग्रेस को आठ सीटें मिली हैं. एक सीट जनता दल यूनाइटेड के पास है तो एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती है.

दावा

आम आदमी पार्टी के संयोजक और विधायक दल के नेता अरविंद केजरीवाल ने उप राज्यपाल नजीब जंग से पहली मुलाक़ात के बाद ही ये स्पष्ट किया था कि वे जनता की राय मांगेंगे और फिर सरकार गठन पर अपना रुख़ स्पष्ट करेंगे.

ग़ाज़ियाबाद में पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे जनता की राय का सम्मान करते हुए सरकार बनाने जा रहे हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने ये घोषणा की कि अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री होंगे.

उन्होंने कहा, "हमने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में चुनाव लड़ा है. सभी विधायकों ने उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में चुना है." इसके बाद केजरीवाल ने उप राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया.

अब आम आदमी पार्टी को उप राज्यपाल के न्यौते का इंतज़ार है. संभावना है कि इसी सप्ताह अरविंद केजरीवाल को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी. इस बीच केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस की ओर से सुरक्षा दिए जाने को ठुकराते हुए कहा है कि उन्हें सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है.

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली पुलिस को लिखी अपनी चिट्ठी में कहा है, "मुझे किसी सुरक्षा की आवश्यकता नहीं. भगवान ही मेरा सबसे बड़ा रक्षक है. हालाँकि मैं आपका आभारी रहूँगा अगर आप कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने में मदद करें."

राजनीतिक बयानबाज़ी

दूसरी ओर आप के सरकार बनाने पर सहमति जताने के साथ ही बयानबाज़ी का सिलसिला शुरू हो गया. दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अरविंद केजरीवाल को शुभकामना तो दी, लेकिन साथ ही उन्हें चुनावी वादों की भी याद दिलाई.

शीला दीक्षित ने कहा, "हम 'आप' को बाहर से समर्थन दे रहे हैं. लेकिन ये बिना शर्त नहीं है. अगर वे दिल्ली के लोगों को राहत दे पाएँ, तो ये अच्छा होगा."

अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली विधानसभा सीट से शीला दीक्षित को हराकर जीत हासिल की है.

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने आप और कांग्रेस के बीच सहयोग पर चुटकी ली है और कहा कि उन्हें इसका पहले से ही अंदाज़ा था. भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार रहे हर्षवर्धन ने कहा कि उनके लिए आप का फैसला नया नहीं है क्योंकि इसकी ज़मीन पहले से ही तैयार की जा रही थी.

उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने भ्रष्टाचार से लड़ने की बड़ी-बड़ी बातें की, लेकिन उन्होंने सत्ता के लिए अपने सारे वादों से समझौता कर लिया है.

उन्होंने कहा, "दिल्ली में जो सरकार बनने जा रही है, वो दिल्ली की जनता से धोखा है क्योंकि जनता ने कांग्रेस की भ्रष्ट सरकार को खारिज कर दिया. और उसी के साथ अब केजरीवाल सरकार बनाने जा रहे हैं." हालाँकि उन्होंने आम आदमी पार्टी को शुभकामनाएं दीं.

लेकिन आम आदमी पार्टी को सबसे बड़ा झटका उस समय लगा, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रशांत भूषण ने सरकार पर सवाल उठा दिए. उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि सरकार ज़्यादा समय तक टिक पाएगी."

वहीं दिल्ली कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कहा कि अगर 'आप' अच्छा काम करेगी, तो पाँच साल तक भी सरकार चल सकती है.

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