'आप' क्या इन पांच वादों को पूरा कर पाएगी?

  • 23 दिसंबर 2013
आप

आम आदमी पार्टी ने आख़िरकार दिल्ली में सरकार बनाने का फ़ैसला कर लिया है और इसके साथ ही पार्टी के सामने चुनावी वादों को हक़ीक़त की धरातल पर उतारने की चुनौती भी शुरू हो गई है.

आप ने अपने घोषणापत्र में दिल्ली की जनता को सस्ती बिजली, कम दर पर पानी और झुग्गियों की जगह पक्के मकान देने का वादा किया था.

अब सवाल उठता है कि क्या आप की सरकार इन वादों को पूरा कर पाएगी या फिर उसके वादे भी दूसरी पार्टियों की तरह हवा हवाई साबित होंगे?

(आम आदमी पार्टी दिल्ली में सरकार बनाएगी)

आप के पांच सबसे बड़े वादे:

सस्ती बिजली

आप के नेता अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की जनता से वादा किया था कि वह सरकार बनने के चार महीनों के अंदर ही बिजली के दाम 50 फ़ीसदी कम कर देंगे.

दिल्ली में रोजाना 5600 मेगावॉट बिजली की ज़रूरत है जबकि आपूर्ति केवल 5200 मेगावॉट है. दिल्ली में बिजली का उत्पादन नहीं होता है और उसे दूसरे राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है.

बिजली की क़ीमतों की बात करें तो उपभोक्ता को 200 यूनिट तक की बिजली के लिए तीन रुपए 90 पैसे देने पड़ते हैं जबकि इससे ऊपर प्रति यूनिट सात रुपए चुकाने पड़ते हैं.

(कांग्रेस ने नहीं फंसाया है 'आप' को)

आप ने बिजली कंपनियों का ऑडिट कराने का वादा करते हुए कहा गया है कि जब तक ऑडिट नहीं हो जाता, बिजली के दाम नहीं बढाये जाएंगे. बिजली के मीटरों की निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने के साथ कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाया जायेगा.

700 लीटर पानी मुफ्त

पानी पर ‘आप’ का दावा है कि वो 700 लीटर पानी हर परिवार को हर रोज़ मुफ्त में देगी.

पार्टी ने साथ ही दिल्ली जल बोर्ड का पुनर्गठन करने, टैंकर माफ़िया पर रोक लगाने, पानी प्रबंधन को पारदर्शी बनाने और सीवेज प्रणाली को नये सिरे से दुरुस्त करने का भी वादा किया है.

दिल्ली में रोज़ाना 435 करोड़ लीटर पानी की ज़रूरत है जबकि अभी रोज़ाना 316 करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति हो रही है. पीने के पानी के लिए दिल्ली हरियाणा जैसे राज्यों पर निर्भर है.

(भाजपा के बयानों में आप की सरकार)

फिलहाल दिल्ली के लोगों को 20 हज़ार लीटर तक पानी के लिए 100 रुपए का भुगतान करना पड़ता है. 20 हज़ार से 30 हज़ार तक 150 रुपए तो 30 हज़ार लीटर से ज्यादा ख़र्च करने वालों को 200 रुपए देने पड़ते हैं.

झुग्गी वालों को पक्का मकान

आप ने वादा किया है कि झुग्गी वालों को पक्के मकान दिए जाएंगे और अनाधिकृत कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा.

एक अनुमान के मुताबिक़ दिल्ली की 600 से अधिक झुग्गी बस्तियों में 40 लाख से अधिक लोग रहते हैं जो कि राजधानी की कुल आबादी का 55 प्रतिशत है.

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा

आप ने अपने चुनावी घोषणापत्र में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का वादा दिल्ली की जनता से किया है.

पार्टी का तर्क है कि दिल्ली की पौने दो करोड़ जनता को सामान्य लोकतांत्रिक सरकार से वंचित रखना लोगों के साथ धोखा है.

(ख़ुद को जोखिम में फंसा लिया 'आप' ने)

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग बहुत पुरानी है.

हर राजनीतिक दल को लगता है कि पूर्ण राज्य का दर्जा न होना दिल्ली की समस्याओं की जड़ है. यही वजह है कि भाजपा और भी कांग्रेस ने भी अपने चुनावी घोषणापत्र में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने का वादा किया था.

जनलोकपाल

पार्टी ने सरकार बनने पर 15 दिन के भीतर दिल्ली जनलोकपाल विधेयक पारित करके मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और सभी सरकारी एवं सार्वजनिक कर्मचारियों को जांच के दायरे में लाने का भी वायदा किया है.

इसके तहत मंत्रियों, विधायकों और सचिवों के ख़िलाफ़ आरोप होने पर छह महीने से एक वर्ष के भीतर जांच और मुकदमा पूरा होकर दोषियों को सज़ा मिलने की व्यवस्था बनेगी.

पार्टी संसद के दोनों सदनों में पारित लोकपाल विधेयक का विरोध करती है.

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