दिल्ली में बनेगी 'आप' की सरकार

अरविंद केजरीवाल

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में सरकार बनाने का फैसला किया है.

पार्टी ने स्पष्ट किया है कि उसके संयोजक और विधायक दल के नेता अरविंद केजरीवाल ही दिल्ली के मुख्यमंत्री होंगे.

पार्टी के फ़ैसले के बाद अरविंद केजरीवाल ने उप राज्यपाल नजीब जंग से मुलाक़ात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है.

दिल्ली में सरकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी को कांग्रेस बाहर से समर्थन देगी.

पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था, जिसके चलते सरकार बनाने को लेकर गतिरोध था.

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में अपने समर्थकों के 'जनमत संग्रह' के बाद ही सरकार बनाने का फैसला किया है.

कांग्रेस और भाजपा ने जहां आम आदमी पार्टी को शुभकामनाएं दी हैं, वहीं समाजसेवी अन्ना हज़ारे ने इस बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

बिना शर्त नहीं समर्थन

पार्टी ने कहा है कि वो उपराज्यपाल से आग्रह करेंगे कि क्या जंतर मंतर पर सरकार का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है.

निवर्तमान मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने आम आदमी पार्टी को शुभकामनाएं दी हैं.

उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने लोगों से ऐसे वादे किए हैं जिन्हें पूरा नहीं किया जा सकता है लेकिन अगर उन्हें भरोसा है तो वो उन्हें पूरा करके दिखाएं.

उन्होंने साफ़ किया कि आम आदमी पार्टी को दिया गया समर्थन 'बिना शर्त' नहीं है.

जनता से धोखा

वहीं भाजपा नेता हर्षवर्धन ने कहा कि उनके लिए आप का फैसला नया नहीं है क्योंकि इसकी ज़मीन पहले से ही तैयार की जा रही थी.

उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने भ्रष्टाचार से लड़ने की बड़ी बड़ी बातें की, लेकिन उन्होंने सत्ता के लिए अपने सारे वादों से समझौता कर लिया है.

उन्होंने कहा, "दिल्ली में जो सरकार बनने जा रही है, वो दिल्ली की जनता से धोखा है क्योंकि जनता ने कांग्रेस की भ्रष्ट सरकार को खारिज कर दिया. और उसी के साथ अब केजरीवाल सरकार बनाने जा रहे हैं."

बावजूद इसके उन्होंने आम आदमी पार्टी को शुभकामनाएं दीं.

70 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा और उसके सहयोगी दल को 32 सीटें मिलीं जबकि 28 सीटों के साथ आप दूसरे और आठ सीटों के साथ कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही. दिल्ली में सरकार बनाने के लिए 36 विधायकों की ज़रूरत है.

चमत्कार

आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस और भाजपा विरोध के नारे के साथ राजनीति में शुरुआत की. इसलिए वो चुनावों के बाद कांग्रेस का समर्थन लेने से हिचक रही थी.

इसीलिए पार्टी ने सरकार बनाने पर कोई भी फैसला लेने से पहले जनता से राय मांगी. आम आदमी पार्टी का कहना है कि उसके जनमत संग्रह में लोगों ने सरकार बनाने के हक़ में राय दी है.

हालांकि उसके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के साथ साथ राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नज़रें भी इस बात पर टिकी है कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में सभी झुग्गियों को नियमित करने, बिजली के दाम 50 फीसदी कम करने और हर परिवार को हर दिन 700 लीटर पानी देने के जो वादे किए हैं, उन्हें वो कैसा पूरा करेगी.

फिर भी, अपने गठन के एक साल के भीतर सरकार बनाने की आम आदमी पार्टी की उपलब्धि को किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है.

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