हर्षवर्द्धनः 'आप' ने शुरुआत ही समझौते से की है

डॉक्टर हर्षवर्द्धन

दिल्ली में विपक्षी दल भाजपा के नेता डॉक्टर हर्षवर्द्धन ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को दिल्ली में सरकार पर एक ओर बधाई दी तो दूसरी ओर इस बात पर निराशा जताई कि 'आप' जनता की पहली कसौटी पर ही खरी नहीं उतरी.

बीबीसी हिंदी से ख़ास बातचीत में डॉक्टर हर्षवर्द्धन ने 'आप' पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जिस कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे उसी के समर्थन से सरकार बना रहे हैं.

हर्षवर्द्धन ने कहा, "अरविंद केजरीवाल ने अपने बच्चे की कसम खाई थी और कहा था कि वह न तो कांग्रेस से सहयोग लेंगे, न ही देंगे. अब उन्होंने उसी कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनाने का फ़ैसला ले लिया, जिस कांग्रेस को चुनाव में भ्रष्ट कहा था. 'आप' ने सरकार बनाने की शुरुआत ही समझौते से की है."

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार रहे डॉक्टर हर्षवर्द्धन के अनुसार अब 'आप' की पहली चुनौती होगी जनता में अपनी विश्वसनीयता बरकरार रखने की क्योंकि उन्होंने राजनीति में प्रवेश करने के पहले नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें की थीं.

'आप' के नेता अरविंद केजरीवाल पर सवाल खड़े करते हुए हर्षवर्द्धन ने कहा, "उन्होंने जब पार्टी बनाई थी तो वादा किया था कि भारतीय राजनीतिक व्यवस्था को पाक-साफ करेंगे, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे. वह जिस कांग्रेस को देश की सबसे भ्रष्ट पार्टी बताते रहे, बड़ी-बड़ी गालियां दीं और जिनके ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा अब उसी की मदद से सरकार बनाने का फ़ैसला कर लिया."

'पिछले दरवाज़े से'

भाजपा नेता के मुताबिक़ कांग्रेस और 'आप' की आपसी क्या समझ रही इसके बारे में कोई नहीं जानता.

हर्षवर्द्धन कहते हैं, "अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस से बिना शर्त समर्थन लेने की बात कर ली. इसके बाद शर्त सहित समर्थन के लिए भी तैयार हो गए."

उन्होंने कहा, "दिल्ली की जनता ने जनविरोधी आचरण, भ्रष्टाचार और घोटालों के कारण जिस दल को नकार दिया था आज वे उसी दल के साथ मिलकर सरकार बना रहे हैं. कांग्रेस को पिछले दरवाजे से सत्ता के गलियारे में पहुंचा दिया है."

हर्षवर्द्धन के अनुसार उन्हें लगता है कि 'आप' ने दिल्ली की जनता को गुमराह किया है.

दूसरा विश्वासघात

दिल्ली की जनता से भ्रष्टाचार मामले पर लुभावने-सुहाने वायदे करने का आरोप लगाते हुए हर्षवर्द्धन ने कहा कि 'आप' नेता केजरीवाल ने पार्टी के माध्यम से राजनीतिक व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात कही थी. मगर उनके आचरण से ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा.

उन्होंने कहा कि केजरीवाल अपने पहले इम्तिहान में ही फेल हो गए हैं.

हर्षवर्द्धन का मानना है कि आप ने सुराज के नाम पर 400-500 लोगों को इकट्ठा कर जनता के कंधे पर बंदूक रख दी. सत्ता प्राप्ति के फैसले के लिए जनता को जिम्मेदार बनाना चाहा.

उन्होंने कहा कि ऐसा करना जनता के साथ दूसरा बड़ा विश्वासघात है.

मगर इसके साथ ही हर्षवर्द्धन यह भी मानते हैं कि यदि केजरीवाल सरकार बना लेते हैं और दिल्ली की जनता के साथ किए गए वायदे पूरे करते हैं तो उन्हें बड़ी खुशी होगी.

उन्होंने बताया, "हम विपक्ष में बैठकर जनता के साथ किए गए वायदे पूरे करने के लिए सब तरह के दबाव बनाएंगे. हम जनता के हितों के लिए लगातार काम करेंगे और देखेंगे कि जनता के हितों पर सरकार कोई समझौता तो नहीं कर रही."

भाजपा की रणनीति

Image caption दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं.

आप एक नई पार्टी है. उसकी सरकार भी नई होगी. आप पहली बार सरकार बनाने जा रही है. ऐसे में वह पांच साल का समय पूरा करेगी या नहीं?

इस सवाल पर हर्षवर्द्धन का कहना है, "हां, आप ने नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें की थीं मगर वे अपनी उस स्थिति से गिरकर धड़ाम से नीचे आ गए हैं."

वह कहते हैं, "आप को पांच साल का समय मिलेगा या नहीं, यह सवाल कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए. कांग्रेस बताए कि वह आप के साथ मिलकर कैसे समझौते करेगी, उनकी क्या शर्तें हैं और वे क्या-क्या काम करेंगे."

आप के सरकार बनाने का फैसला करने के संदर्भ में पार्टी के रुख के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा राजनीति में शुचिता के लिए काम कर रही है.

उन्होंने कहा, "हमारा एजेंडा एकदम स्पष्ट है. हम विपक्ष में बैठेंगे. हमारे पास नंबर नहीं था. इसलिए हमने सरकार नहीं बनाई. हम किसी सौदे में शामिल नहीं होना चाहते थे. कोई तोड़-फोड़ नहीं करना चाहते थे. न ही कोई अनैतिक तरीका इस्तेमाल करना चाहते थे."

हर्षवर्द्धन ने कहा, "बीजेपी विपक्ष में बैठकर जनता की सेवा करेगी. उनके लिए आवाज उठाएगी. हम सरकार को मजबूर करेंगे कि वह जनता के हित के लिए ईमानदारी से काम करे."

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