'आप' को समर्थन को लेकर कांग्रेस में बेचैनी

केजरीवाल

दिल्ली में आम आदमी पार्टी को सरकार बनाने के लिए कांग्रेस के बाहर से समर्थन देने पर कांग्रेस पार्टी में ही मतभेद के स्वर उभर रहे हैं.

कांग्रेस के कुछ बड़े नेता और कार्यकर्ता पार्टी आलाकमान के इस फ़ैसले पर अपनी नाख़ुशी सार्वजनिक रूप से जता रहे हैं. पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को दिल्ली कांग्रेस के दफ़्तर पर प्रदर्शन भी किया.

पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा है कि कांग्रेस में एक राय यह भी है कि सरकार बनाने के लिए 'आप' को समर्थन देने का फ़ैसला शायद सही नहीं है.

उन्होंने कहा, ''जनादेश कांग्रेस के लिए नहीं था, शायद हमें विपक्ष की भूमिका निभानी चाहिए थी और जनता के मुद्दे उठाने चाहिए थे.''

जनार्दन द्विवेदी ने कहा, ''उचित होता कि हम ये कहते कि मतदाताओं की हमसे अपेक्षा नहीं है कि हम सरकार बनाएं, जिसे बनाना है सरकार बनाए, हम विपक्ष की भूमिका अदा करते रहेंगे.''

द्विवेदी ने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने पिछले 15 सालों में दिल्ली का चेहरा बदल दिया है और अगर उसके बाद भी दिल्ली के लोगों का समर्थन नहीं मिला तो पार्टी के अंदर सभी महसूस करते हैं कि ये भीतर चिंतन करने का समय है.

उनके अनुसार पार्टी को इस बात की ओर ध्यान देना होगा कि कमी कहाँ रही, कार्यशैली में या पार्टी संगठन में और उन्हें दूर करना होगा.

'आप' को समर्थन के बारे में द्विवेदी ने कहा कि पार्टी की ओर से एक प्रस्ताव दिया गया है जिसे निभाना है और इसके लिए बीच का कोई रास्ता निकालना होगा.

लेकिन क्या पार्टी समर्थन वापसी पर भी विचार कर सकती है, इस सवाल के जवाब में द्विवेदी ने कहा कि कांग्रेस अतिवादी विचारधारा में विश्वास नहीं रखती है.

'बिना शर्त समर्थन नहीं'

उधर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल ने गुजरात में कहा कि उनकी पार्टी किसी व्यक्ति विशेष को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि आम आदमी को ज़ेहन में रखकर अपनी नीति बनाती है. पटेल ने कहा कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली में सरकार बनाकर अपने वादे पूरे करने चाहिए.

पटेल का कहना था, ''आगे चलकर क्या होगा देखते हैं. उनसे अपेक्षा है कि वो अच्छा काम करेंगे.''

इससे पहले सोमवार को प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा था कि कांग्रेस ने आप को बिना शर्त समर्थन नहीं दिया है. शीला दीक्षित के अनुसार पार्टी ने 'आप' को केवल बाहर से समर्थन देने की बात कही है.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के नए अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पष्ट कहा था कि कांग्रेस ने बिना शर्त समर्थन दिया है और इस संबंध में प्रदेश के प्रभारी शकील अहमद ने दिल्ली के उप-राज्यपाल नजीब जंग को ख़त भी लिख दिया है.

लेकिन सोमवार को जब आप पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने औपचारिक तौर पर सरकार बनाने के लिए उप-राज्यपाल से मुलाक़ात की तो उसके बाद शीला दीक्षित के इस बयान ने इस बात के संकेत दिए कि आप को समर्थन के मामले में कांग्रेस के भीतर सबकुछ ठीक नहीं है.

सोमवार को ही देर शाम कांग्रेस के कुछ समर्थकों ने आप को समर्थन के विरोध में प्रदर्शन किए थे और नारेबाज़ी की थी.

'कांग्रेस में नाख़ुशी'

आम आदमी पार्टी के नेता जिस तरह से कांग्रेस नेताओं के बारे में बयान दे रहे हैं उससे भी कांग्रेस पार्टी नेताओं में ख़ासी नाराज़गी है.

इससे पूर्व, आम आदमी पार्टी के नेता योगेंद्र यादव ने एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार कांग्रेस के ख़िलाफ़ आरोपों की जांच ज़रूर करेगी.

योगेंद्र यादव ने कहा कि आम आदमी पार्टी कांग्रेस को अपना सहयोगी नहीं मानती है.

उन्होंने कहना था, ''हमने कांग्रेस के सहारे नहीं, जनता के सहारे सरकार बनाई है, भले ही हमारी सरकार पहले दिन गिर जाए, लेकिन हम अपने वादों और सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे.''

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