जो किया सेना की मर्ज़ी से कियाः परवेज़ मुशर्रफ़

  • 30 दिसंबर 2013
परवेज़ मुशर्रफ़

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल(सेवानिवृत्त) परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि उन के ख़िलाफ़ ग़द्दारी का मुक़दमा एक दुश्मनी है और उन्होंने अपने दौर में जो भी किया उसके लिए उन्हें फ़ौज की पूरी हिमायत हासिल थी.

पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने ये बातें रविवार को मीडिया से बात करते हुए कही.

फ्रांसिसी समाचार एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ उन्होंने कहा कि उनके ख़िलाफ़ संविधान से ग़द्दारी के आरोपों से पूरी सेना नाराज़ है.

परवेज़ मुशर्रफ़ को अप्रैल में उनके घर में नज़रबंद किया गया था. उसके बाद से बाहरी मीडिया को दिया गया उनका ये पहला बयान है.

याद रहे कि परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ ग़ैर संवैधानिक कार्य करने के आरोप में ग़द्दारी के मुक़दमे को जोड़ने वाली विशेष अदालत ने एक जनवरी को उन पर चार्जशीट दायर करने का हुक्म दिया है.

केंद्र सरकार ने परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ संविधान तोड़ने और तीन नवंबर 2007 को देश में आपातकाल लगाने पर ग़द्दारी का मुक़दमा शुरू करने का प्रस्ताव पास किया है.

पाकिस्तान के संविधान की धारा 6 को तोड़ने की सज़ा उम्र क़ैद और मौत है.

परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ मुक़दमों के बाद सरकार और सेना के रिश्ते ख़राब होने की आशंका है क्योंकि सेना नहीं चाहती है कि उसके पूर्व अध्यक्ष को इस तरह क़ानूनी कार्रवाई से गुज़रना पड़े और इतने संगीन आरोपों का सामना करना पड़े.

परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना है, "मैं कहूंगा कि मेरे ख़िलाफ़ आरोपों से पूरी सेना नाराज़ है. मुझे सेना की ओर से जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक़ इस मामले में पूरी फ़ौज मेरे साथ है."

सुनवाई

Image caption कई मुक़दमों का सामना कर रहे परवेज़ मुशर्रफ़ अप्रैल से नज़रबंद हैं.

इस मामले की पहली सुनवाई पर पेश न होने पर अदालत ने आदेश दिया है कि वो आइंदा पेशी पर स्वयं अदालत में मौजूद रहें.

पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने विशेष अदालत के अधिकारों को भी इस्लामाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इस याचिका में कहा गया था कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने तीन नवंबर 2007 का फ़ैसला सेनाध्यक्ष के रूप में किया था और इसके लिए उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा सिर्फ़ सेना की अदालत में ही चल सकता है.

पाकिस्तान की केंद्र सरकार की ओर विशेष अदालत में पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ संविधान से ग़द्दारी करने के मुक़दमे की याचिका को मंज़ूर करते हुए परवेज़ मुशर्रफ़ को 24 दिसंबर को तलब किया था. लेकिन सुनवाई को उस वक़्त टाल दिया गया था जब परवेज़ मुशर्रफ़ के रास्ते से विस्फ़ोटक सामान बरामद किया गया था.

अब सुनवाई एक जनवरी को होनी है लेकिन परवेज़ मुशर्रफ़ का कहना है कि अभी उन्होंने सुनवाई में पहुँचने या न पहुँचने का फ़ैसला नहीं लिया है.

पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार हो रहा है जब किसी पूर्व सैन्य राष्ट्रपति पर संविधान के हनन के आरोप में मुक़दमा चलाया जा रहा है.

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