एक करोड़ का मुआवज़ा: क्या ये काफ़ी है?

विनोद मेहंदियान

दिल्ली पुलिस की तरफ से एक साल के लिए प्रतिनियुक्ति पर आबकारी विभाग गए सिपाही विनोद मेहंदियान गत शुक्रवार देर रात शराब माफ़िया का शिकार हो गए थे. विनोद मेहंदियान के परिवार के लिए दिल्ली सरकार की ओर से घोषित किए गए मुआवज़े की वजह से यह मामला चर्चा का विषय बन गया है.

इस मामले में अभियुक्त पवन और रवींद्र उर्फ़ रब्बन को गिरफ्तार कर लिया गया है.

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि ड्यूटी पर मरने वाले पुलिस वालों के परिवार को एक करोड़ रुपए का मुआवज़ा दिया जाएगा. इसी वादे के अनुसार विनोद मेहंदियान के परिवार के लिए एक करोड़ रूपए का मुआवज़ा घोषित किया गया है.

45 साल के विनोद का सिर फट चुका था लेकिन फिर भी किसी तरह हिम्मत करके उन्होंने पुलिस से संपर्क किया. उन्होंने बताया कि वह कहाँ हैं और उन्हें वहाँ से एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया. उनका परिवार भी मॉडल टाउन के पास की पुलिस लाइन से वहाँ पहुंचा लेकिन डॉक्टर उन्हें नहीं बचा पाए.

'मैंने पापा को फ़ोन किया'

विनोद मेहंदियान की 21 साल की बेटी आयुषी कहती हैं, "मेरे पापा बहुत बहादुर थे, बहुत ही ज्य़ादा बहादुर. उन्हें शहीद का दर्जा मिलना चाहिए."

आयुषी याद करते हुए बताती हैं, "उस दिन भी मेरे पापा को ऑफिस से घर वापस आते हुए देर हो गई थी. मेरा दो साल का छोटा भाई पापा को बहुत याद कर रहा था. मैंने पापा को फ़ोन किया तो पता चला कि शराब माफिया ने उन्हें अधमरा कर छोड़ दिया है."

समाज विज्ञानी अभय दुबे कहते हैं, "आम तौर पर चलन यह है कि अगर ड्यूटी पर तैनात किसी व्यक्ति की मौत होती है तो उसके परिवार के किसी व्यक्ति को नौकरी दी जाती है. आर्थिक सहायता चाहे कितनी भी हो लेकिन यह नौकरी दिया जाना बहुत ज़रूरी है. नौकरी दिए जाने के साथ अगर यह आर्थिक सहायता बढ़ाई गई है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए."

'अधिकतम मुआवज़ा'

Image caption विनोद मेहंदियान अपनी बेटी को एमबीए कराना चाहते थे.

उन्होंने कहा,"अभी तक जो मुआवज़ा दिया जाता था वो कम होता था. लेकिन अगर इस तरह से अधिकतम मुआवज़ा दिया जाएगा तो लोग ईमानदारी से अपने कर्तव्य पर कुछ भी कुर्बान करने को तैयार रहेंगे."

अभय दुबे ने कहा, "अगर नकद एक करोड़ रुपया मिल रहा है तो परिवार अपना आर्थिक प्रबंधन कर सकता है लेकिन अगर इसका एक हिस्सा रुपए के तौर पर देकर एक हिस्सा ऐसे रूप में दिया जाए जिसका लंबे समय में प्रयोग हो सके तो यह भी अच्छा होगा."

विनोद मेहंदियान अपने परिवार के लिए इकलौते आर्थिक स्रोत थे. उनकी बेटी आयुषी कहती हैं, "अब सारी ज़िम्मेदारी मुझ पर आ गई है."

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह कहते हैं, "जो इंसान चला गया उसकी क्षतिपूर्ति तो नहीं हो सकती लेकिन मैं समझता हूँ कि दिल्ली सरकार की तरफ से यह अच्छा कदम है. उनके परिवार को संतोष होना चाहिए."

'एकरूपता होनी चाहिए'

वह बताते हैं, "पुलिस राज्यों के अधीन विषय है. हर राज्य का अलग नियम है. बहुत कुछ राज्य सरकार या मुख्यमंत्री के विवेक पर निर्भर है."

प्रकाश सिंह कहते हैं," मेरी जानकारी में इससे पहले इतनी सहायता राशि नहीं दी गई है. इस तरह की बातें होती हैं कि उस राज्य में इतना मुआवज़ा मिल गया हमारे राज्य में नहीं मिला तो लोगों के दिल में कसक रह जाती है. सहायता राशि को बढ़ाए जाने की ज़रुरत तो थी लेकिन सभी राज्यों के लिए इसमें एकरूपता होनी चाहिए."

वह कहते हैं, "राज्य सरकारें जो धन आवंटित करती हैं लोग उससे संतुष्ट हो जाते हैं और बात वहीं ख़त्म हो जाती है."

आयुषी कहती हैं, "मम्मी बात करने की हालत में नहीं हैं. मुझे अब बस दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस पर ही भरोसा रह गया है, जिनके भरोसे मेरे पापा हमें छोड़ गए हैं. मैं बस यही चाहती हूँ कि मेरे पापा के हत्यारों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले ताकि आगे किसी के साथ ऐसा ना हो."

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