छत्तीसगढ़ कांग्रेस की अगस्ता सौदे की जांच की मांग

विवादों में घिरे अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर का सौदा रद्द होने के बाद छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी ने राज्य में अगस्ता ए-109 पावर हेलिकॉप्टर सौदे की जांच की मांग की है.

छत्तीसगढ़ सरकार की इस ख़रीद पर कैग यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने भी आपत्ति दर्ज की थी.

लेकिन दूसरी ओर राज्य के विमानन सचिव सुबोध कुमार सिंह ने कहा है कि अगस्ता वेस्टलैंड से हेलिकॉप्टर ख़रीदी में पूरी पारदर्शिता बरती गई है और इसमें किसी तरह की जांच की आवश्यकता नहीं है.

कैग ने राज्य सरकार के अधिक कीमत देकर अगस्ता कंपनी का हेलिकॉप्टर खरीदने को लेकर कहा था कि एक ख़ास ब्रांड और विशिष्ट मॉडल का टेंडर बुलाकर अधिक कीमत में खरीदना न तो किसी भी प्रकार से सहभागिता को बढ़ाता है और न ही यह न्यायोचित है.

छत्तीसगढ़ सरकार के दस्तावेज बताते हैं कि जनवरी 2007 में मुख्यमंत्री रमन सिंह की अध्यक्षता में सरकार ने एक नया पावर हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी में मुख्यमंत्री रमन सिंह के अलावा मुख्य सचिव और मुख्य सचिव वित्त शामिल थे.

लेकिन अगले ही महीने रमन सिंह के मंत्रिमंडल ने हेलिकॉप्टर को विशिष्ट उत्पाद बताते हुए निर्णय लिया कि कमेटी हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए ग्लोबल टेंडर नहीं बुलाए.

कमेटी को अधिकार

इसके अलावा मंत्रिमंडल ने हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए बनाई गई कमेटी को अधिकृत किया कि वो अगस्ता ए-109 पावर हेलिकॉप्टर की निर्माता इतालवी कंपनी अगस्ता-वेस्टलैंड से जनवरी 2007 में प्राप्त प्रस्ताव पर मोलभाव करे.

सरकार को लगा कि इस आदेश को चुनौती दी जा सकती है तो उसने फिर ग्लोबल टेंडर बुलाया और उसमें अगस्ता वेस्टलैंड के ही ख़ास मॉडल खरीदने के लिए निविदा जारी की.

दिलचस्प यह है कि फरवरी में छत्तीसगढ़ सरकार जिस प्रस्ताव पर फैसला ले रही थी, उसमें यह शर्त थी कि 31 जनवरी 2007 तक आपूर्ति आदेश दे दिया जाए और इसके साथ ही 35.97 लाख अमरीकी डॉलर का अग्रिम भुगतान भी दे दिया जाए.

इसके बाद जब राज्य सरकार ने कंपनी से संपर्क किया तो कंपनी ने 61.25 लाख अमरीकी डॉलर में हेलिकॉप्टर देने के लिए स्वीकृति दे दी. गौरतलब है कि इससे पहले झारखंड सरकार ने यही हेलिकॉप्टर 55.91 लाख अमरीकी डॉलर में खरीदा था.

लेकिन मामला फिर उलझा और कुछ ही महीनों के बाद अक्तूबर 2007 में छत्तीसगढ़ सरकार ने 65.70 लाख अमरीकी डॉलर में इसकी खरीदी के लिये अनुबंध कर लिया.

अधिक कीमत

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि “अगस्ता कंपनी का ही हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए एक खास ब्रांड और विशिष्ट मॉडल का टेंडर बुला कर अधिक कीमत में खरीदना न तो किसी भी प्रकार से सहभागिता को बढ़ाता है और न ही यह न्यायोचित है.”

कैग ने हेलिकॉप्टर खरीद पर कई सवाल उठाए और सरकार से जवाब-तलब किया.

जाहिर है, सरकार के जवाब भी कैग के सवालों के घेरे में रहे और अंततः कैग की फाइल सरकार की ढेरों फाइलों के बीच दब कर रह गई.

इधर केंद्र सरकार द्वारा बुधवार को अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदा रद्द किए जाने के बाद राज्य में विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने भी इस मामले की जांच की मांग की है.

सौदे में गड़बड़ी

कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है, "केंद्र में अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर सौदा रद्द होना इस बात का सबूत है कि अगस्ता वेस्टलैंड ने सौदे में गड़बड़ी की थी. छत्तीसगढ़ में भी कैग ने जो आपत्ति दर्ज कराई थी, उस आशंका को करार रद्द होने से बल मिला है."

शैलेश त्रिवेदी ने कहा, “राज्य में अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर की खरीद के मामले की पूरी जांच की जानी चाहिए और इसके लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए.”

लेकिन राज्य विमानन सचिव सुबोध कुमार सिंह इससे सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि राज्य सरकार ने अगस्ता हेलिकॉप्टर की ख़रीदी निविदा बुला कर इसलिये ही की थी कि इसमें किसी दलाल या बिचौलिये की ज़रुरत नहीं पड़े. उनका कहना है कि इसमें कहीं जांच की ज़रुरत ही नहीं है.

सुबोध कुमार सिंह कहते हैं-“ इस खरीदी में तो किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश ही नहीं है. कैग की आपत्ति को लेकर हमारा पक्ष ये है कि डॉलर की कीमतों में कमी-बेसी के कारण हमें अगस्ता हेलिकॉप्टर के लिये अधिक क़ीमत चुकानी पड़ी थी. इस खरीदी में हमने पूरी पारदर्शिता बरती है और यह खरीदी कोई मुद्दा ही नहीं है.”

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