प्रधानमंत्री की कोशिश ने मीडिया को कितना लुभाया?

मुख्यधारा मीडिया और सोशल मीडिया ने शुक्रवार को आयोजित प्रधानमंत्री की प्रेस कांफ्रेंस में मनमोहन सिंह की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की है.

इस प्रेस कांफ्रेस में प्रधानमंत्री ने कहा वह, 'आगामी लोकसभा चुनाव के बाद नए प्रधानमंत्री को बैटन थमा देंगे'.

साथ ही उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के पास देश का नेतृत्व करने के लिए उत्कृष्ट योग्यता है.

उनकी मुख्य विपक्षी दल यानी भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणी की भी आलोचना हुई है.

प्रधानमंत्री डॉक्टर सिंह ने कहा था, "अगर सशक्त प्रधानमंत्री का मतलब अपनी देखरेख में अहमदाबाद की सड़कों पर निर्दोष जनता का जनसंहार होने देना है, तो मुझे नहीं लगता कि हमारे देश को ऐसे सशक्त प्रधानमंत्री की ज़रूरत है."

इस मौके पर प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि जो लोग भ्रष्टाचार के बड़े मामलों में लिप्त हैं, उन्हें सजा दी जानी चाहिए. पिछले एक दशक में सत्ता में रहते हुए प्रधानमंत्री की यह तीसरी प्रेस कांफ्रेंस है.

खराब मूल्यांकन

टेलीविजन चैनल सीएनएन-आईबीएन ने प्रेस कांफ्रेंस समाप्त होते ही एक जन सर्वेक्षण करवाया, जिसमें लोगों से प्रधानमंत्री के भाषण का मूल्यांकन करने का अनुरोध किया गया.

चैनल की ओर से दिखाए गए आंकड़ों के अनुसार इसके तहत 79 फीसदी मतदाताओं ने सिंह के भाषण को 'घटिया' करार दिया. जबकि 10 फीसदी ने इसे श्रेष्ठ बताया. केवल छह फीसदी मतदाताओं ने इसे अच्छा बताया.

वहीं ट्विटर यूज़र्स ने हैश टैग #पीएमप्रेसमीट का इस्तेमाल करते हुए प्रधानमंत्री की आलोचना की.

एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार विक्रम चंद्रा ने ट्वीट किया, "प्रधानमंत्री की प्रेस कांफ्रेंस से एक बात साफ निकल कर आती है. प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री के प्रदर्शन से खुश हैं."

वहीं, आशीष डाबोले ने संदेश लिखा, "सेवानिवृत्ति की घोषणा करने की कोई जरूरत नहीं हैं. वह पहले ही पिछले साढ़े नौ सालों से रिटायर्ड जीवन जी रहे हैं."

आदित्य नागराजन ने ट्वीट किया, "प्रिय पीएम, आपमें और एक पेंसिल में केवल एक अंतर है कि पेंसिल का प्वाइंट होता है. #पीएमप्रेसमीट "

हेडलाइन्स टुडे टैनल से बात करते हुए शिवसेना के संजय राउत ने प्रधानमंत्री पर टाइम पास और अपना एवं देश का मनोरंजन करने के लिए प्रेस कांफ्रेंस करने का आरोप लगाया.

राहुल गांधी

यहां तक की राहुल गांधी की योग्यता को लेकर प्रधानमंत्री की ओर से की गई टिप्पणियों पर भी उपहास हुआ है.

फिल्म निर्देशक शेखर कपूर ने ट्वीट किया, "मनमोहन सिंह कहते हैं कि उन्हें वास्तव में पूरा यकीन है कि राहुल जी भारत के लिए बिल्कुल सही पीएम होंगे. श्रीमान, तब हमें बताएं की आपका ऐसा विश्वास क्यों हैं. या फिर हम आप पर विश्वास नहीं करेंगे."

यूज़र अर्जुन कुमार ने पोस्ट किया "समझ से परे है कि कोई समझदार व्यक्ति ऐसा कैसे कह सकता है कि राहुल गांधी में भारत का नेतृत्व करने की योग्यता है. उनकी योग्यताएं एक रहस्य है."

हेडलाइंस टुडे टीवी चैनल के डिप्टी एडीटर शिव अरूर ने ट्वीट किया, "गंभीर सवाल है- प्रधानमंत्री के राहुल गांधी में देश का नेतृत्व करने की योग्यता होने की घोषणा करने के बाद आप किस बात को गंभीरता से ले सकते हैं? "

मोदी की आलोचना

मीडिया ने प्रधानमंत्री डॉक्टर सिंह की ओर से मोदी को निशाना बनाए जाने के समय को लेकर भी कई सवाल उठाए.

एनडीटीवी से बात करते हुए शिवसेना के कानूनी सेल के प्रमुख राहुल नारवेकर ने सिंह की तुलना बुझने से पहले फड़फड़ाने वाले एक दिए से की. उन्होंने कहा कि यह सरकार की आलोचना से लड़ने की आखिरी कोशिश है.

जाने माने लेखक चेतन भगत ने ट्वीट किया "यह समझने को बैचेन हूं कि ऐसा क्या है, जो एक पीएचडी अर्थशास्त्री को कहने को मजबूर करता है कि प्रधानमंत्री पद के लिए राहुल गांधी के पास महान योग्यताएं हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी विनाशकारी हैं. "

वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा ने दूरदर्शन न्यूज पर बात करते हुए प्रधानमंत्री के साथ सहानुभूति जताई. उन्होंने कहा "राजनीति में यह हद हो गई है. आप एक सीमा के बाहर हमले सहन नहीं कर सकते हैं. आप शब्दावली का उलटफेर कर टालमटोल कर सकते हैं. आप पूछ सकते हैं कि उन्होंने मोदी को विनाशकारी क्यों कहा? शायद यही तरीका है, जो वह करना चाहते हैं क्योंकि वास्तविकता यह है कि भारत को एक निर्णायक और संवेदनशील प्रधानमंत्री की जरूरत है."

भ्रष्टाचार

दूसरी ओर, भ्रष्टाचार से लड़ने को लेकर पीएम की टिप्पणियों का भी पत्रकारों और ट्विटर यूजर्स पर कोई असर नहीं हुआ. उन्होंने सत्तारूढ़ शासन का प्रदर्शन ख़राब बताया.

टाइम्स नाउ की राजनीतिक संपादक नाविका कुमार ने अपनी राय जाहिर करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार पर और अधिक स्पष्टवादी होना चाहिए."

सीएनएन-आईबीएन पर एक बहस के दौरान भाजपा नेता सुधांशु मित्तल ने कहा "सिंह को इतिहास में सबसे अधिक भ्रष्ट शासन का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाएगा."

आउटलुक पत्रिका की पत्रकार सबा नक़वी ने कहा, "पीएम की छवि एक भ्रष्ट व्यक्ति की नहीं है लेकिन वह असहाय दिखाई देते हैं और यह प्रेस कांफ्रेंस में साफ़ नज़र आया."

प्रधानमंत्री सिंह की आलोचना कते हुए उन्होंने कहा, "उन्होंने अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं किया. भ्रष्टाचार एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और उन्हें अपना दिमाग इस्तामल करना चाहिए था."

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